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बिहार की राजनीति : हर कोई है अचंभित...देखिए बदली सियासत पर सियासतदानों का रिएक्शन....

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पटना। बिहार की राजनीति में अचानक से सबकुछ बदल गया। नीतीश कुमार तो अभी भी मुख्यमंत्री है लेकिन उनके सहयोगी अब विपक्ष में है और विपक्ष की पार्टी अब उनकी सहयोगी बनकर सरकार बनाने जा रही है। बिहार की इस बदली हुई राजनीतिक फिजां ने हर किसी को अचंभित करके रख दिया है। देखिए बिहार की सियासत पर सियासतदानों ने क्या कुछ कहा-

भाजपा सांसद रविशंकर प्रसाद-मेरा सवाल है भ्रष्टाचार के गोद में नीतीश जी फिर से चले गए। उन्होंने 2017 में क्या कहा था? रेलवे भर्ती, मॉल, रेलवे होटल को रांची में बेचने के मामले में भारी घपला हुआ है। तेजस्वी ने कहा था कि मैं अपने वकील से बात करूंगा। क्या अब नीतीश जी को जबाव मिल गया?

केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह- हम नीति और नियत के साथ चलते हैं, इनके मन में महत्वाकांक्षा सिर पर नाचने लगी। कुछ बहाना तो चाहिए...अगर हमें खत्म करना होता तो 43(JDU विधानसभा सीटें) और 74(बीजेपी विधानसभा सीटें) की कोई तुलना थी क्या?

पूर्व उपमुख्यमंत्री और बीजेपी नेता तारकिशोर प्रसाद- 2017 में नीतीश RJD से अलग हुए तो उन्होंने कहा कि RJD हमारे दल को तोड़ रही है, फिर भ्रष्टाचार के मुद्दे पर वे अलग हुए। कल भी यह कहा कि भाजपा JDU को तोड़ रही है। इससे समझ आता है कि ये सोची समझी साजिश है।

बीजेपी नेता शाहनवाज़ हुसैन- नीतीश जी के साथी अच्छे नहीं हैं। 'अच्छा सिला दिया हम लोगों के प्यार का' ये तो बड़ी गलत बात है। जब भी मिले कभी आभास नहीं हुआ कि वे छोड़ कर जाएंगे। लोकसभा के चुनाव में 40 सीट भाजपा जीतेगी।

प्रशांत किशोर, चुनावी रणनीतिकार - बिहार में जो कल हुआ या जो हो रहा है। मैं उसे 2012-13 से बिहार में जो राजनीतिक अस्थिरता को दौर शुरू हुआ है उस परिपेक्ष्य में देखता है। 10 साल में ये छठी बार सरकार बनाई जा रही है। मेरी आशा है कि कम से कम अब राज्य में राजनीतिक स्थिरता लौटे।

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक- बीजेपी ने बिहार के लोगों को सुचिता पूर्ण शासन दिया है, क़ानून का राज स्थापित किया है। भाजपा आज भी बिहार के लोगों के भावनाओं के अनुरूप काम करती रहेगी। 2024 में भाजपा जीतेगी।

RJD के राज्यसभा सांसद मनोज झा- ये सिर्फ सरकार शपथ नहीं लेने जा रही है बल्कि 2017 से लेकर 2020 तक के जनादेश की घर वापसी हो रही है। ये बहुत महत्वपूर्ण है ऐसे दौर में जब मौजूदा भाजपा ने ये तय कर लिया है कि लोकतांत्रिक मूल्यों को क्षत-विक्षत करना है। बिहार ने एक संदेश दिया है।