
शनिवार, 17 अक्टूबर 2026
LivePatna: पटना हाईकोर्ट ने द्वेषपूर्ण अनावश्यक मुकदमेबाजी पर कड़ा रुख अपनाया है. जस्टिस सोनी श्रीवास्तव ने द्वेषपूर्ण आपराधिक कार्रवाई को रद्द किया. व्यक्तिगत रंजिश के लिए आपराधिक न्यायशास्त्र के दुरुपयोग के खिलाफ एक कड़ा संदेश देते हुए,हाईकोर्ट ने एक शिकायत मामले से उत्पन्न संपूर्ण आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है.कोर्ट ने यांत्रिक न्यायिक कार्रवाइयों और पूर्व-संज्ञान वैधानिक सुरक्षा उपायों का पालन न करने की कड़ी निंदा की है.राकेश कुमार तिवारी बनाम बिहार राज्य व अन्य (आपराधिक विविध सं. 60085/2023) मामले में अपना विस्तृतCAVफैसला सुनाते हुए जस्टिस सोनी श्रीवास्तव ने न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी,पटना द्वारा पारित 5 मई,2025 के संज्ञान आदेश को निरस्त कर दिया. हाईकोर्ट ने पाया कि यह अभियोजन स्पष्ट रूप से निरर्थक,परेशान करने वाला और दुर्भावनापूर्ण था. इस विवाद की शुरुआत पुलिस जांच से लेकर विरोध याचिका तक कानूनी लड़ाई की शुरुआत विरोधी पक्ष संख्या 2 (शिकायतकर्ता) शीला तिवारी द्वारा 20 अक्टूबर,2022 को दर्ज कराई गई एक शिकायत से हुई थी. इसे बाद में सीआरपीसी की धारा 156(3) के तहत जांच के लिए भेजा गया और कदमकुआं थाना कांड संख्या 281/2023 दर्ज किया गया.हालांकि, एफिडेविट दर्ज होने के महज एक महीने के भीतर शिकायतकर्ता ने अपनी पुरानी शिकायतों का हूबहू दोहराव करते हुए एक विरोध याचिका दायर की. हाईकोर्ट के समक्ष मामला रद्द संबंधित याचिका के लंबित रहने के दौरान,पुलिस ने 30 अप्रैल,2024 को अंतिम रिपोर्ट (क्लोजर रिपोर्ट) सौंप दी,जिसमें मामले को झूठा पाया गया.निचली अदालत ने इस रिपोर्ट को औपचारिक रूप से स्वीकार कर लिया. हालांकि,इसके साथ ही निचली अदालत ने लंबित विरोध याचिका को शिकायत मानकर बयान दर्ज किए और 5 मई,2025 को आईपीसी की धारा 384 (रंगदारी/extortion)के तहत संज्ञान ले लिया. तकनीकी बाधाओं को खारिज कर न्याय को प्राथमिकतासुनवाई के दौरान,विपरीत पक्ष द्वारा बाद के संज्ञान आदेश को चुनौती देने के लिए दायर अंतरिम आवेदन की पोषणीयता पर एक प्रारंभिक आपत्ति उठाई गई. तर्क दिया गया कि मूल एफआईआर की चुनौती अब निष्प्रभावी हो चुका है,इसलिए नई याचिका दायर की जानी चाहिए थी.सर्वोच्च न्यायालय के ऐतिहासिक सिद्धांतों—जैसे सुगंधा बनाम पी. राजकुमार ((2020) 10SCC706) और कलेक्टर (LA)बनाम कातीजी ((1987) 2SCC107) का हवाला देते हुए जस्टिस श्रीवास्तव ने इस तकनीकी आपत्ति को खारिज कर दिया. हाईकोर्ट ने माना कि याचिकाकर्ता को सीआरपीसी की धारा 482 / बीएनएसएस की धारा 528 के तहत एक नया आवेदन दायर करने के लिए मजबूर करने से केवल मुकदमों की संख्या बढ़ेगी,कीमती न्यायिक समय नष्ट होगा और प्रक्रियात्मक देरी होगी,जबकि अदालत पहले से ही इस मामले पर गहराई से विचार कर रही थी.कोर्ट ने बेतुके आरोप और निर्दोषता का साक्ष्यमामलें के तथ्यों पर जस्टिस श्रीवास्तव ने याचिकाकर्ता राकेश कुमार तिवारी के खिलाफ लगाए गए आरोपों की पूरी तरह से असंभावना को उजागर किया.शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि याचिकाकर्ता ने दिल्ली पुलिस को पार्लियामेंट स्ट्रीट थाना कांड संख्या 27/2022 की जांच के दौरान उसके पति के कार्यालय में तोड़फोड़ करने का निर्देश दिया था. कोर्ट ने टिप्पणी की कि यह आरोप पूरी तरह से सुदूर और काल्पनिक है,क्योंकि दिल्ली पुलिस दिल्ली में शुरू हुए एक अलग आपराधिक मामले में अपने स्वतंत्र वैधानिक कर्तव्यों का पालन कर रही थी.सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि अदालत ने रेखांकित किया कि घटना के समय याचिकाकर्ता न तो घटनास्थल पर उपस्थित थे और न ही पटना में थे. वह बिहार क्रिकेट एसोसिएशन के अध्यक्ष के रूप में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (BCCI)की नामांकन प्रक्रिया में भाग लेने के लिए मुंबई में मौजूद थे. कोर्ट ने नोट किया कि आईपीसी की धारा 384 (संपत्ति देने के लिए किसी व्यक्ति को नुकसान के भय में डालना) के मूल तत्व पूरी तरह से गायब थे,और यह धारा मूल प्राथमिकी का हिस्सा भी नहीं थी.इसके अलावा,निचली अदालत द्वारा जांचे गए गवाह पूरी तरह से मामले से जुड़े/हितबद्ध पक्ष थे—विशेष रूप से शिकायतकर्ता के पति और उनके कर्मचारी.जस्टिस श्रीवास्तव के निर्णय का एक मुख्य पहलू भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS)की धारा 223(1) के प्रावधानों के पूर्ण वैधानिक जनादेश पर केंद्रित था. उमर व अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य (2026INSC1058) और कुशल कुमार अग्रवाल बनाम प्रवर्तन निदेशालय (2025SCC OnLine SC1221) में सर्वोच्च न्यायालय के हालिया निर्णयों का हवाला देते हुए,कोर्ट ने जोर दिया कि बीएनएसएस ने शिकायत पर संज्ञान लेने से पहले आरोपी को नोटिस जारी करने और सुनवाई का अवसर देने का एक महत्वपूर्ण वैधानिक प्रावधान पेश किया है.निचली अदालत से मँगवाई गई स्थिति रिपोर्ट से स्पष्ट रूप से यह सत्यापित हुआ कि 5 मई,2025 के संज्ञान आदेश से पहले याचिकाकर्ता को कोई नोटिस या समन जारी नहीं किया गया था. जस्टिस श्रीवास्तव ने फैसला सुनाया कि इस अनिवार्य प्रावधान को दरकिनार करना एक "गंभीर त्रुटि" है,जो प्राकृतिक न्याय और विधायी मंशा पर चोट करती है,जिससे यह आदेश प्रक्रियात्मक अनियमितता के बजाय कानूनी रूप से अमान्य हो जाता है.फ़ालतू मुकदमों को शुरुआत में ही कुचल दिया जाना चाहिएपेप्सी फूड्स लिमिटेड बनाम न्यायिक मजिस्ट्रेट ((1998) 5SCC749) और कृष्ण लाल चावला बनाम यूपी राज्य ((2021) 5SCC435) के ऐतिहासिक फैसलों का हवाला देते हुए,कोर्ट ने इस बात की कड़ी आलोचना की कि किस तरह विरोधियों को परेशान करने और व्यक्तिगत बदले लेने के लिए आपराधिक कानून मशीनरी का दुरुपयोग किया जाता है.सुब्रत रॉय सहारा बनाम भारत संघ का विस्तृत उल्लेख करते हुए जस्टिस श्रीवास्तव ने दोहराया कि जब कोई निर्दोष नागरिक अर्थहीन आपराधिक मुकदमों के जाल में फंसता है,तो उसे गहरा मानसिक,सामाजिक और वित्तीय कष्ट सहना पड़ता है.हरियाणा राज्य बनाम भजन लाल (1992Supp (1)SCC335) के लैंडमार्क मापदंडों—विशेष रूप से श्रेणियों (1), (5),और (7)—का उपयोग करते हुए,पटना हाईकोर्ट ने माना कि अभियोजन को आगे बढ़ाने की अनुमति देना अदालत की प्रक्रिया का घोर दुरुपयोग होगा.यह निष्कर्ष निकालते हुए कि इस कार्यवाही को जारी रखने से न्यायिक समय की बर्बादी के अलावा कोई अन्य उद्देश्य पूरा नहीं होगा. जस्टिस श्रीवास्तव ने "...याचिकाकर्ता के खिलाफ पूरी आपराधिक कार्यवाही,जिसमें न्यायिक मजिस्ट्रेट,प्रथम श्रेणी,पटना द्वारा शिकायत मामला संख्या 15721(C)/2024 के संबंध में पारित आदेश दिनांक 05.05.2025 शामिल है,को एतद्द्वारा रद्द (quash)किया जाता है. तदनुसार, I.A. No.01of2025 के साथ यह वर्तमान आवेदन स्वीकार किया जाता है."पटना से आनंद वर्मा की रिपोर्ट-
झारखंड हाईकोर्ट से एक बड़ी खबर सामने आ रही है। अदालत ने मनरेगा घोटाले से जुड़े एक मामले में तत्कालीन ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर को बड़ा झटका दिया है। झारखंड हाईकोर्ट ने मनरेगा योजना के तहत तीन लाख से अधिक के कथित गबन के मामले में तत्कालीन ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर सुष्मिता प्रिया (उर्फ सुष्मिता गुप्ता) को राहत देने से साफ इनकार कर दिया है। जस्टिस रोंगोन मुखोपाध्याय की अदालत ने उनकी आपराधिक पुनरीक्षण याचिका को खारिज करते हुए निचली अदालत के आदेश को बरकरार रखा है। साल 2018 में मांडर थाने में कांड संख्या 109/2018 के तहत यह मामला दर्ज किया गया था। आरोप था कि मनरेगा के तहत जलेश्वर लोहरा की जमीन पर ट्यूबवेल निर्माण के लिए 3 लाख 11 हजार 244 रुपये स्वीकृत किए गए थे। लेकिन, निर्धारित स्थान पर काम न करवाकर राशि का दुरुपयोग किया गया। जांच के बाद पुलिस ने चार्जशीट दाखिल की और ट्रायल कोर्ट ने आईपीसी की धाराओं के तहत इसका संज्ञान लिया था। अदालत में बचाव पक्ष के वकील मुकेश कुमार सिन्हा ने दलील दी कि सुष्मिता प्रिया मार्च 2010 से सितंबर 2012 तक संविदा पर तैनात थीं। उनका तर्क था कि स्थल निरीक्षण, जमीन की पहचान और सत्यापन की मुख्य जिम्मेदारी जूनियर इंजीनियर, हल्का कर्मचारी और मेट की होती है। याचिकाकर्ता की प्रत्यक्ष भूमिका नहीं थी और नियमों के तहत गलत जगह निर्माण होने पर राशि वसूली का प्रावधान है, इसलिए उन्हें आपराधिक मुकदमे से मुक्त किया जाना चाहिए।वहीं, राज्य सरकार के वकील ने इसका कड़ा विरोध करते हुए कहा कि ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर होने के नाते वे परियोजना की मुख्य निगरानी अधिकारी थीं।केस डायरी और संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए झारखंड हाईकोर्ट ने यह माना कि ब्लॉक प्रोग्राम ऑफिसर के दायित्वों में चल रही परियोजनाओं की नियमित निगरानी करना शामिल है, जिसका निर्वहन नहीं किया गया। अदालत ने कहा कि रिकॉर्ड पर मौजूद बयानों और साक्ष्यों से उनकी भूमिका स्पष्ट रूप से सामने आती है, और इसी के साथ अदालत ने उनकी डिस्चार्ज याचिका खारिज कर दी।
शुक्रवार को झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपने पैतृक गांव नेमरा में सैकड़ों स्थानीय लोगों से मुलाकात की। इलाके के अलग-अलग गांवों से पहुंचे ग्रामीणों ने अपनी समस्याएं मुख्यमंत्री के सामने रखीं और समाधान की गुहार लगाई।दोपहर करीब साढ़े बारह बजे, सीएम हेमंत सोरेन टावर चौक के पास बनाए गए पंडाल में पहुंचे। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से एक-एक कर मुलाकात की, उनकी बातें बेहद गौर से सुनीं और कई लोगों से उनकी परेशानियों से जुड़े लिखित आवेदन भी स्वीकार किए। ग्रामीणों ने अपने व्यक्तिगत, सामाजिक और जनहित से जुड़े कई अहम मुद्दे उनके सामने रखे। सीधे राज्य के मुखिया तक अपनी बात पहुंचाने का अवसर मिलने से आम जनता में एक नई उम्मीद जगी है।गौर करने वाली बात यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माताजी रूपी सोरेन के निधन के बाद से, वे गत 8 अक्टूबर से अपने पैतृक गांव नेमरा में ही हैं। यहां वे पारंपरिक रीति-रिवाजों के अनुसार अपनी माता के श्राद्ध कर्म और तमाम पारिवारिक परंपराओं को पूरी निष्ठा से निभा रहे हैं।परिवार पर आए इस गहरे दुख और व्यस्त धार्मिक अनुष्ठानों के बीच भी मुख्यमंत्री का इस तरह आम जनता से मिलना और उनकी समस्याएं सुनना इलाके में खासी चर्चा का केंद्र बन गया है। यह वाकया साफ तौर पर दर्शाता है कि एक तरफ जहां वे अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियां पूरी कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जनसेवा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से पीछे नहीं हट रहे हैं।व्यक्तिगत दुखों से ऊपर उठकर जनता के बीच रहना और उनकी सुधि लेना वाकई एक मिसाल है। झारखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इस जन-सरोकार की शैली की सराहना हो रही है।
झारखंड में इन दिनों मतदाता सूची के गहन पुनरीक्षण का महा-अभियान चल रहा है! मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी श्री के. रवि कुमार ने सभी पात्र नागरिकों से अपील की है कि वे अपने बीएलओ (Booth Level Officer) से संपर्क कर मतदाता सूची में दर्ज अपने नाम, पते और अन्य विवरणों की जांच जरूर करवा लें। यह आपकी अपनी सूची है, इसे त्रुटिरहित बनाना हम सबकी जिम्मेदारी है।लेकिन कई बार बीएलओ के घर-घर जाने पर मतदाताओं के नहीं मिलने या अपरिचित नंबर से आने वाली कॉल्स को रिसीव न करने के कारण सत्यापन में अड़चन आ रही है।अगर आपके पास भी बीएलओ का फोन नहीं है या आप उनसे संपर्क करना चाहते हैं, तो घबराइए मत! इसके लिए बस आपको 'ECINET' ऐप डाउनलोड करना है।ऐप खोलेंबीएलओ से संपर्क करने वाले विकल्प को चुनेंअपनी विधानसभा और मतदान केंद्र की जानकारी दर्ज करेंआपके संबंधित बीएलओ का मोबाइल नंबर आपकी स्क्रीन पर आ जाएगा। इसे तुरंत अपने फोन में सुरक्षित (Save) कर लें ताकि पहचान में आसानी हो। ऐप पर 'Book a Call with BLO' की सुविधा भी उपलब्ध है, जिसकी मदद से आप अपनी सुविधानुसार उनसे संपर्क कर सकते हैं। मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी ने बीएलओ को भी निर्देश दिए हैं कि यदि घर पर मुलाकात न हो या फोन कॉल का जवाब न मिले, तो वे WhatsApp के माध्यम से टेक्स्ट या वॉयस मैसेज भेजें। मैसेज में अपना परिचय और नंबर जरूर दें, ताकि आप बिना किसी हिचकिचाहट के कॉल बैक कर सकें।
चाईबासा के चक्रधरपुर में स्थित रश्मि इलेक्ट्रॉनिक्स दुकान में हुए सनसनीखेज मोबाइल चोरी मामले का पुलिस ने आखिरकार सफल उद्भेदन कर लिया है। पुलिस ने इस बड़ी वारदात में शामिल 3 अपराधियों को गिरफ्तार किया है और उनके पास से चोरी गए 21 महंगे मोबाइल फोन भी बरामद कर लिए हैं। इस खुलासे के साथ ही पुलिस प्रशासन और स्थानीय व्यापारियों ने बड़ी राहत की सांस ली है। बीते 5 अक्टूबर 2026 की रात, अज्ञात चोरों ने चक्रधरपुर थाना क्षेत्र के रेशमी इलेक्ट्रॉनिक्स का शटर उठाकर विभिन्न कंपनियों के कुल 52 महंगे मोबाइल फोन चोरी कर लिए थे। इस संबंध में चक्रधरपुर थाना कांड संख्या 111/2026 के तहत मामला दर्ज किया गया था। खास बात यह है कि पिछले दो महीनों के भीतर इस दुकान में लगातार दो बार बड़े पैमाने पर चोरी की घटना को अंजाम दिया गया था, जिससे जिला पुलिस के लिए यह एक बड़ी चुनौती और सिरदर्द बन गया था।मामले की गंभीरता को देखते हुए पश्चिमी सिंहभूम के पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार, चक्रधरपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी सह सहायक पुलिस अधीक्षक डॉ. सैयद मुस्तफा हाशमी और चक्रधरपुर थाना प्रभारी के नेतृत्व में एक विशेष छापेमारी टीम का गठन किया गया था। इतना ही नहीं, वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य जुटाने के लिए सीआईडी (CID) से फिंगरप्रिंट विशेषज्ञ टीम को भी घटनास्थल पर बुलाया गया था।तकनीकी सर्विलांस और वैज्ञानिक अनुसंधान के आधार पर पुलिस ने इस पूरी वारदात में कुल 5 अपराधियों की संलिप्तता का खुलासा किया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए इनमें से तीन आरोपियों को विधिवत गिरफ्तार कर लिया है:नितेश पटेल, पिता - रामबिलास राउत, निवासी - घोड़ासहन, जिला - मोतिहारी, बिहार।जितेन्द्र साह उर्फ चोना, पिता - शंकर साह, निवासी - आश्रम रोड, रक्सौल, पूर्वी चंपारण, बिहार।गोविन्द चौधरी, पिता - स्व. मिश्रीलाल चौधरी, निवासी - धरम्पट्टी, सुपौल, बिहार।पुलिस के अनुसार, इन सभी गिरफ्तार अपराधियों का पहले से भी आपराधिक इतिहास रहा है। वहीं, इस कांड में शामिल अन्य दो आरोपी—मोतिहारी के रहने वाले शेराज और संजय सहनी की गिरफ्तारी तथा बाकी बचे मोबाइलों की बरामदगी के लिए पुलिस की छापेमारी अभी भी लगातार जारी है।इस सफल उद्भेदन में प्रशिक्षु पुलिस उपाधीक्षक अमित कुमार, थाना प्रभारी अवधेश कुमार, पु.अ.नि. रमेश गिरि, रंजीत उरांव, सुनील कुमार पाण्डेय और राज किशोर तिवारी की टीम ने अहम भूमिका निभाई है।
पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया शुक्रवार को देवघर पहुंचे। देवघर परिसदन में उनका पुष्पगुच्छ भेंट कर स्वागत एवं अभिनंदन किया गया। राज्यपाल के आगमन को लेकर प्रशासनिक स्तर पर आवश्यक गतिविधियां देखी गईं। देवघर पहुंचने के बाद राज्यपाल श्री कटारिया ने सपरिवार बाबा बैद्यनाथ मंदिर में विधिवत पूजा-अर्चना की और बाबा का आशीर्वाद लिया।पूजा-अर्चना के बाद राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा कि वह सम्मेद शिखरजी पहले भी कई बार आ चुके हैं, लेकिन बाबा बैद्यनाथ धाम में दर्शन करने के लिए पहली बार देवघर पहुंचे हैं। उन्होंने बाबा बैद्यनाथ से राज्य में खुशहाली और परिवार के सभी सदस्यों के सुखी एवं समृद्ध रहने की कामना की।बाबा के दरबार में राज्य की खुशहाली की कामनाबाबा बैद्यनाथ धाम में सपरिवार पूजा-अर्चना कर राज्यपाल ने अपनी आस्था प्रकट की। द्वादश ज्योतिर्लिंगों में प्रतिष्ठित बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है। राज्यपाल का पहली बार बाबा मंदिर पहुंचना इस यात्रा का प्रमुख आकर्षण रहा। उन्होंने बाबा से सभी के जीवन में सुख, शांति और समृद्धि बनाए रखने का आशीर्वाद मांगा।
वन, पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन विभाग की ओर से 10 से 12 दिसंबर तक तीन दिवसीय नेशनल फॉरेस्ट्री कांग्रेस (NFC-2026) का आयोजन मोरहाबादी स्थित स्कीपा (SKIPA) सभागार में किया जाएगा। वन भवन मुख्यालय में आयोजित समारोह में राष्ट्रीय सम्मेलन की रूपरेखा, आधिकारिक ब्रोशर और वेब पोर्टल का अनावरण किया गया। इस दौरान अधिकारियों ने सम्मेलन के उद्देश्यों, तकनीकी सत्रों और झारखंड के वानिकी परिदृश्य पर चर्चा की।उन्होंने कहा कि धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की पावन भूमि का लगभग एक तिहाई भूभाग वनों से आच्छादित है। राष्ट्रीय वानिकी कांग्रेस 2026 की मेजबानी करना झारखंड के लिए अत्यंत गौरव का विषय है।यह राष्ट्रीय मंच वन संरक्षण, जैव विविधता सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और वनों पर निर्भर समुदायों की आजीविका को सशक्त बनाकर देश की प्राकृतिक संपदा के सतत प्रबंधन के लिए एक नई दिशा तय करेगा।
गोपालगंज : बिहार के गोपालगंज के प्रसिद्ध थावे दुर्गा मंदिर में चोरी मामले में अदालत के फैसले के बाद पुलिस की जांच और अनुसंधान टीम की कार्यशैली भी चर्चा में है. करीब 11 महीने पहले मंदिर के गर्भगृह से मां भवानी का सोने का मुकुट, सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान की चोरी हुई थी. मामले में पुलिस ने विशेष जांच टीम यानी एसआईटी गठित कर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच शुरू की थी. करीब 45 दिनों तक सीसीटीवी फुटेज खंगालने और हजारों मोबाइल नंबरों का विश्लेषण करने के बाद पुलिस ने 27 जनवरी को मामले का खुलासा किया था. पुलिस ने मामले में पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर चोरी का सामान बरामद किया. अब अदालत ने चार दोषियों को सात-सात साल और एक दोषी को तीन साल की सजा सुनाई है.मामले में एसपी विनय तिवारी ने इस सफल कार्रवाई में शामिल पुलिसकर्मियों और अभियोजन टीम के योगदान की सराहना करते हुए उन्हें प्रशस्ति पत्र और नकद पुरस्कार देकर सम्मानित किया है.गोपालगंज के पुलिस अधीक्षक विनय तिवारी ने बताया कि17दिसंबर2025की रात थावे दुर्गा मंदिर के गर्भगृह का ताला काटकर मां का सोने का मुकुट,सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती सामान की चोरी हुई थी. घटना की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम का गठन किया गया था. तत्कालीन एसडीपीओ के नेतृत्व में एसआईटी और जिला सूचना इकाई यानी डीआईयू की टीम ने जांच शुरू की.एसपी के मुताबिक,जांच टीम ने लगातार करीब45दिनों तक मंदिर और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली. इसके साथ ही हजारोंमोबाइल नंबरों का तकनीकी विश्लेषण किया गया. कड़ी मेहनत और तकनीकी अनुसंधान के आधार पर27जनवरी को चोरीकांड का खुलासा करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार किया गया. पुलिस ने चोरी किए गए सामान कीबरामदगी भी कर ली थी.इस मामले में अनुसंधानकर्ता कर्मवीर सिंह,डीआईयू टीम के सदस्यों हरेंद्र और राजमुन्ना समेत अन्य पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. वहीं,अभियोजन की प्रक्रिया को तेजी से पूरा कराने के लिए जिला अभियोजन पदाधिकारी विजय कुमार मिश्रा,एपीओ शुभम कुमार और अन्य संबंधितअधिकारियों ने भी काम किया. मंदिर के मुख्य पुजारी संजय पांडेय ने अदालत में बरामद आभूषणों की पहचान की. अनुसंधानकर्ता के साक्ष्य और गवाहों के बयान के आधार पर अदालत में मामले की सुनवाई आगे बढ़ी.एसपी विनय तिवारी ने बताया कि इस मामले में करीब आठ महीने तक स्पीडी ट्रायल चलाकर दोषियों को सजा दिलाने की दिशा में लगातार प्रयास किया गया. अदालत ने चार दोषियों को सात-सात साल की कैद और10-10हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई,जबकि एक अन्य दोषी को तीन साल की कैद और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा दी गई.एसपी ने कहा कि इस पूरे मामले के उद्भेदन,अनुसंधान और अभियोजन में शामिल पुलिसकर्मियों तथा संबंधित टीम के सदस्यों को उनके बेहतर कार्य के लिए प्रशस्ति पत्र और नकद राशि देकर सम्मानित किया गया है.गोपालगंज से नमो नारायण मिश्र की रिपोर्ट
अपनी अलग-अलग मांगों को लेकर 108 एंबुलेंस कर्मियों ने एक दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया था, जिसे फिलहाल स्थगित कर दिया गया है। लेकिन, सरकार और कर्मियों के दावों में बड़ा विरोधाभास देखने को मिल रहा है।एक तरफ जहां 108 एंबुलेंस कर्मियों का यह कहना है कि प्रशासन ने उनकी सिर्फ एक ही मांग मानी है, वहीं दूसरी तरफ सरकार का यह दावा है कि कुल दो मांगों पर सहमति बन चुकी है।लेकिन, इस पूरे मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि कर्मियों की एक प्रमुख मांग—जिसके तहत सदर अस्पताल के सिविल सर्जन के अधीन 108 एंबुलेंस का संचालन किए जाने की बात थी—उसे कानून के खिलाफ बताते हुए सीधे तौर पर खारिज कर दिया गया है।प्रशासनिक रुख साफ होने के बावजूद, हालांकि मांगों पर पूरी तरह सहमति नहीं बन पाई है, फिर भी एंबुलेंस कर्मियों ने फिलहाल अपनी एक दिवसीय हड़ताल को स्थगित कर दिया है।लेकिन राहत की यह सांस शायद ज़्यादा लंबी न हो। कर्मियों ने यह साफ कर दिया है कि जब तक उनकी बाकी सभी मांगें पूरी नहीं हो जातीं, तब तक उनका आंदोलन आगे भी जारी रहेगा। यानी आने वाले दिनों में यह विवाद एक बार फिर तूल पकड़ सकता है।
नालंदा:बिहार के नालंदा जिले में उत्पाद विभाग के सिपाही अजीत कुमार की मौत के मामले में जांच के दौरान चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं. शुरुआती जानकारी में दावा किया गया था कि शराब तस्करों की फायरिंग में सिपाही अजीत को गोली लगी थी. हालांकि,जांच में सामने आए तथ्यों के अनुसार,उनकी मौत अपनी ही टीम के एक होमगार्ड जवान की राइफल से चली गोली लगने के कारण हुई. मामले में टीम का नेतृत्व कर रही महिला दारोगा पुष्पा कुमारी और दो जवानों को हिरासत में लिया गया है.शराब तस्करों की फायरिंग का दावा जांच के घेरे मेंजानकारी के अनुसार,गुरुवार को शराब तस्करों के खिलाफ अभियान के दौरान सिपाही अजीत को गोली लगी थी. उन्हें गंभीर हालत में पहले पावापुरी मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया. हालत बिगड़ने पर डॉक्टरों ने उन्हें पटना रेफर कर दिया,जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई.शुरुआत में घटना को शराब तस्करों की गोलीबारी से जोड़कर देखा गया था. लेकिन बाद की जांच में गोली चलने की परिस्थितियों को लेकर नए तथ्य सामने आए. आरोप है कि घटना के वास्तविक कारण की जानकारी तत्काल स्थानीय पुलिस को नहीं दी गई थी. इसके बाद पुलिस ने मामले की गहन पड़ताल शुरू की.एसआईटी कर रही पूरे मामले की जांचमामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई है. पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गोली किन परिस्थितियों में चली और घटना के बाद अधिकारियों को क्या जानकारी दी गई थी. संबंधित कर्मियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है.इसके साथ ही शराब की खेप लेकर जा रहे वाहन,उसके संचालकों और तस्करी नेटवर्क का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है. जांच टीम इस सिलसिले में झारखंड भी गई है.फिलहाल,मामले में हिरासत में लिए गए कर्मियों की भूमिका और घटना की वास्तविक परिस्थितियों को लेकर जांच जारी है.संजय कुमार की रिपोर्ट-
पटना:भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के अधिकारी त्यागराजन एस.एम. को केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी मिली है. उन्हें केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में निदेशक नियुक्त किया गया है. उनकी इस नियुक्ति के बाद बिहार से लेकर केंद्र सरकार तक के उनके प्रशासनिक सफर की चर्चा हो रही है.त्यागराजन एस.एम. बिहार में विभिन्न प्रशासनिक पदों पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं. राज्य में कार्य करने के दौरान उन्हें प्रशासनिक व्यवस्था और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़े विभिन्न दायित्वों को निभाने का अनुभव प्राप्त हुआ. अब केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी मिलने के बाद उनके प्रशासनिक अनुभव का उपयोग सहकारिता क्षेत्र से संबंधित कार्यों में किया जाएगा.सहकारिता मंत्रालय में निभाएंगे नई भूमिकाकेंद्रीय सहकारिता मंत्रालय देश में सहकारी संस्थाओं के विकास, उनके कामकाज को बेहतर बनाने और सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने से जुड़े विषयों पर कार्य करता है. ऐसे में मंत्रालय में निदेशक का पद महत्वपूर्ण प्रशासनिक जिम्मेदारी से जुड़ा है. इस पद पर रहते हुए संबंधित अधिकारी को मंत्रालय के निर्धारित कार्यों और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में भूमिका निभानी होती है.त्यागराजन एस.एम. की नियुक्ति बिहार के प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा का विषय बनी हुई है. राज्य में सेवाएं देने के बाद केंद्र सरकार के मंत्रालय में जिम्मेदारी मिलना उनके प्रशासनिक करियर का नया पड़ाव है.बिहार से केंद्र तक का सफरत्यागराजन एस.एम. का प्रशासनिक सफर राज्य स्तर से केंद्रीय स्तर तक पहुंचा है. उनकी नई नियुक्ति के साथ अब सहकारिता मंत्रालय में उनकी भूमिका पर नजर रहेगी. हालांकि, उनके कार्यभार संभालने की तारीख, नियुक्ति की अवधि और नई जिम्मेदारी से संबंधित विस्तृत आधिकारिक जानकारी की पुष्टि नियुक्ति आदेश से की जानी चाहिए.केंद्र सरकार में यह नई जिम्मेदारी उनके प्रशासनिक करियर में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखी जा रही है.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
रांची में आज दोपहर अचानक मौसम का मिजाज पूरी तरह बदल गया है। दोपहर करीब 12:40 बजे शहर में अचानक जोरदार बारिश शुरू हो गई.अचानक हुई इस बारिश की वजह से सड़कों पर अफरा-तफरी का माहौल देखा गया। चल रहे लोगों और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। बारिश के कारण सड़कों पर वाहनों की रफ्तार भी धीमी पड़ गई। खुद को भीगने से बचाने के लिए लोग सड़क किनारे दुकानों और शेड के नीचे शरण लेते नजर आए। मौसम विभाग ने अपने पूर्वानुमान में पहले ही चेतावनी दी थी कि 15 अक्टूबर के बाद राजधानी के मौसम में बदलाव आ सकता है और बारिश की संभावना बन सकती है। आज की इस झमाझम बारिश के बाद शहर के तापमान में भारी गिरावट और ठंड बढ़ने की पूरी संभावना है।आइए जानते हैं आज और आने वाले दिनों में रांची का मौसम कैसा रहने वाला है।आज रांची का अधिकतम तापमान करीब 29 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहने का अनुमान है। दिनभर बादल छाए रहने और बारिश की वजह से अब शाम ढलते ही सिहरन और ठंडक काफी बढ़ जाएगी।अगर बात आने वाले दिनों की करें, तो 17 और 18 अक्टूबर को भी अधिकतम तापमान 29 डिग्री और न्यूनतम तापमान 20 डिग्री के आसपास ही बने रहने की संभावना है। वहीं, 19 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान गिरकर 19 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। यानी साफ है कि अब सुबह और रात के समय हल्की ठंड ने दस्तक दे दी है। मौसम में हो रहे इस अचानक बदलाव को देखते हुए मौसम विभाग ने लोगों को ताजा अपडेट पर नजर बनाए रखने की सलाह दी है।
पटना : बिहार के जमुई जिले में स्थित सिमुलतला आवासीय विद्यालय ने राष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि हासिल की है. C-Fore School Ranking 2026 में विद्यालय को देशभर में दूसरा स्थान मिलने की जानकारी सामने आई है. जदयू के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय झा ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए इसे पूरे बिहार के लिए गर्व का विषय बताया. उन्होंने विद्यालय के विद्यार्थियों, शिक्षकों और राज्यवासियों को बधाई दी.नेतरहाट विद्यालय की तर्ज पर हुई स्थापनासंजय झा ने सिमुलतला आवासीय विद्यालय की स्थापना की पृष्ठभूमि का उल्लेख करते हुए बताया कि कभी नेतरहाट विद्यालय संयुक्त बिहार की शैक्षणिक पहचान हुआ करता था. वर्ष1954में स्थापित इस विद्यालय में पढ़ना मेधावी विद्यार्थियों का सपना माना जाता था. वर्ष2000में बिहार के विभाजन के बाद नेतरहाट विद्यालय झारखंड में चला गया. इसके बाद बिहार में भी इसी तर्ज पर एक उत्कृष्ट आवासीय विद्यालय स्थापित करने की जरूरत महसूस की गई.9 अगस्त 2010 को हुआ था उद्घाटनसंजय झा के अनुसार, वर्ष2005में नीतीश कुमार के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद शिक्षा व्यवस्था में सुधार और विद्यार्थियों को बेहतर अवसर उपलब्ध कराने के लिए कई पहल की गईं. इसी क्रम में जमुई जिले के सिमुलतला में नेतरहाट विद्यालय की तर्ज पर आवासीय विद्यालय स्थापित करने का निर्णय लिया गया. सिमुलतला आवासीय विद्यालय का उद्घाटन9अगस्त2010को हुआ था.डेढ़ दशक में बनाई राष्ट्रीय पहचानस्थापना के लगभग डेढ़ दशक के भीतर विद्यालय की राष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनने को बिहार की शिक्षा व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस उपलब्धि से विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों का उत्साह बढ़ने की उम्मीद है. संजय झा ने कहा कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में एनडीए सरकार शिक्षा के विकास और प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है.सिमुलतला आवासीय विद्यालय को मिली इस रैंकिंग से बिहार में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को लेकर चर्चा तेज हो सकती है. हालांकि, रैंकिंग जारी करने वाली संस्था के आधिकारिक विवरण और मूल्यांकन मानकों की पुष्टि होने पर ही इस उपलब्धि के पूरे संदर्भ को स्पष्ट रूप से समझा जा सकेगा.पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट-
बक्सर : बड़ी खबर बिहार के बक्सर से है जहां निगरानी विभाग की टीम ने भ्रष्टाचार के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए जिले के ब्रह्मपुर थाने में तैनात दारोगा नीरज कुमार को 50 हजार रुपये रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया है. इस कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है. आरोपी दारोगा पर एक मामले में पैरवी करने के नाम पर रिश्वत मांगने का आरोप है.पीड़ित की शिकायत पर बिछाया गया जालजानकारी के अनुसार,दारोगा नीरज कुमार ने एक मामले में मदद और पैरवी करने के बदले संबंधित व्यक्ति से 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी. रिश्वत की मांग से परेशान पीड़ित ने इसकी शिकायत निगरानी विभाग से की. शिकायत मिलने के बाद विभाग ने मामले की जांच की और आरोपों की पुष्टि के लिए आवश्यक कार्रवाई शुरू की.इसके बाद निगरानी विभाग की टीम ने आरोपी दारोगा को पकड़ने के लिए जाल बिछाया. योजना के तहत टीम ने निर्धारित स्थान पर कार्रवाई की और कथित तौर पर रिश्वत की रकम लेते समय नीरज कुमार को गिरफ्तार कर लिया.डीएसपी के नेतृत्व में हुई कार्रवाईइस पूरी कार्रवाई को निगरानी विभाग के डीएसपी विनोद कुमार के नेतृत्व में अंजाम दिया गया. कार्रवाई में नौ सदस्यीय टीम शामिल थी. टीम ने योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी कर आरोपी दारोगा को अपने कब्जे में लिया. गिरफ्तारी की पुष्टि डुमरांव के एसडीपीओ भास्कर रंजन ने की है.पूछताछ के बाद आगे की कार्रवाईदारोगा की गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच में जुटी है. आरोपी से पूछताछ कर रिश्वत मांगने के कथित मामले से संबंधित जानकारी जुटाई जा रही है. विभाग की ओर से आगे की कानूनी प्रक्रिया भी पूरी की जा रही है.इस कार्रवाई को सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के खिलाफ निगरानी विभाग की महत्वपूर्ण कार्रवाई माना जा रहा है. मामले में जांच और कानूनी प्रक्रिया के आगे बढ़ने के साथ अन्य तथ्यों का खुलासा होने की संभावना है.संजय कुमार की रिपोर्ट-
झारखंड हाईकोर्ट ने राजधानी रांची के एक प्रतिष्ठित स्कूल और उसके छात्रावास की बदहाल स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई है। अदालत ने राज्य सरकार को कड़ा निर्देश देते हुए 28 अक्टूबर तक स्टेटस रिपोर्ट मांगी है।मामला रांची के अमर शहीद ठाकुर विश्वनाथ शाहदेव सीएम स्कूल ऑफ एक्सलेंस यानी जिला स्कूल का है। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एमएस सोनक की अगुवाई वाली खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान स्कूल की खस्ताहाल तस्वीरों को देखा। कोर्ट ने मौखिक रूप से टिप्पणी करते हुए कहा कि 'सीएम स्कूल ऑफ एक्सलेंस' अपने नाम के अनुरूप उत्कृष्ट होना चाहिए, लेकिन इसके भवन और छात्रावास की स्थिति बेहद पीड़ादायक है।सुनवाई के दौरान एमिकस क्यूरी, अधिवक्ता दुर्गेश अग्रवाल ने अदालत के समक्ष मामले का पक्ष रखा।रिपोर्ट में मुख्य रूप से यह उजागर किया गया था कि स्कूल भवन के जीर्णोद्धार से जुड़ी फाइल लंबे समय से लंबित है। वहीं, दूसरी ओर जर्जर हो चुके छात्रावास में करीब 100 बच्चे रोजाना अपनी जान जोखिम में डालकर रहने को मजबूर हैं। बच्चों की सुरक्षा और स्कूल की इस दयनीय स्थिति को गंभीरता से लेते हुए हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को 28 अक्टूबर तक अपनी स्टेटस रिपोर्ट दाखिल करने का कड़ा निर्देश दिया है। इस मामले की अगली सुनवाई अब 29 नवंबर को तय की गई है।
झारखंड की राजधानी रांची में प्रस्तावित 10 लेन स्मार्ट रोड परियोजना को लेकर पेड़ों के संरक्षण का मुद्दा उठाया गया है. रांची के नागरिक शैलेश कृष्णा ने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के कार्यालय में 15 अक्टूबर को एक प्रतिवेदन सौंपकर सड़क निर्माण के दौरान मौजूदा पेड़ों को बचाने की मांग की है. उन्होंने परियोजना की डिजाइन और अलाइनमेंट में आवश्यक बदलाव करने का आग्रह किया है, ताकि विकास कार्य के साथ पर्यावरण संरक्षण भी सुनिश्चित किया जा सके. आवेदन के अनुसार, प्रस्तावित 10 लेन स्मार्ट रोड कॉरिडोर विवेकानंद स्कूल मोड़ से रिंग रोड तक बनाया जाना है. यह सड़क झारखंड हाईकोर्ट और विधानसभा होते हुए गुजरेगी. परियोजना के तहत पेड़ों की कटाई की आशंका को देखते हुए शैलेश कृष्णा ने संबंधित अधिकारियों से इस मामले पर गंभीरता से विचार करने की मांग की है.पेड़ों को बचाने के लिए संयुक्त निरीक्षण की मांगशैलेश कृष्णा ने प्रस्तावित सड़क मार्ग का संयुक्त स्थल निरीक्षण कराने और प्रभावित पेड़ों की सूची तैयार करने का आग्रह किया है. उन्होंने विशेष रूप से पुराने, फलदार और पर्यावरण की दृष्टि से महत्वपूर्ण पेड़ों को संरक्षित करने पर जोर दिया है. उनका कहना है कि सड़क निर्माण की योजना तैयार करते समय ऐसे विकल्पों पर विचार किया जाना चाहिए, जिनसे पेड़ों को कम से कम नुकसान पहुंचे.कटाई से पहले नियमों की जांच करने का आग्रहप्रतिवेदन में पेड़ों की कटाई से पहले जरूरी कानूनी अनुमतियों और पर्यावरण संबंधी नियमों की जांच करने की मांग भी की गई है. इसके साथ ही सड़क की डिजाइन और अलाइनमेंट में संभावित बदलावों पर विचार करने का आग्रह किया गया है, ताकि विकास परियोजना के साथ हरित क्षेत्र का संरक्षण भी हो सके.विकास के साथ पर्यावरण संरक्षण पर जोरइस मांग के जरिए प्रस्तावित स्मार्ट रोड परियोजना में पर्यावरणीय पहलुओं को प्राथमिकता देने की बात उठाई गई है. अब इस संबंध में मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित विभागों की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी.
खलारी,फुलबसिया के चामातू स्थित गोली टांड़ चेक पोस्ट पर CISF द्वारा चलाए जा रहे वाहन जांच के दौरान दो अवैध कोयला लदे हाइवा को जब्त किया गया। दोनों वाहनों के पास आवश्यक कागजात उपलब्ध नहीं थे। कार्रवाई के दौरान दोनों वाहनों के चालक मौके से फरार हो गए। जांच के दौरान एक खाली वाहन (JH19B-0677) तथा पांच अन्य खाली वाहन भी बिना आवश्यक कागजात के आवागमन करते पाए गए। कार्रवाई के तुरंत बाद CISF द्वारा स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। इसी बीच कुछ स्थानीय लोगों ने मौके पर विरोध-प्रदर्शन करते हुए जब्त वाहनों को छुड़ाने का प्रयास किया। जिसके बाद CISF की टीम ने तत्परता से स्थिति को संभाला। मामला गुरुवार देर रात का है।बाद में स्थानीय पुलिस भी मौके पर पहुंची। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति तनावपूर्ण, किंतु नियंत्रण में है। CISF एवं स्थानीय पुलिस द्वारा स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है तथा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखते हुए जांच अभियान जारी है।वर्तमान में गोली टांड़ क्षेत्र में सड़क से गुजरने वाले वाहनों की सघन जांच की जा रही है, ताकि बिना वैध कागजात के कोयले का परिवहन रोका जा सके।
सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद क्या झारखंड के पुलिस थाने अब भी महफूज नहीं हैं? थानों में सीसीटीवी कैमरे न लगाने पर झारखंड हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई है.मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस एमएस सोनक और जस्टिस मनोज प्रसाद की खंडपीठ कर रही है। अदालत ने सरकार से थानों में सीसीटीवी लगाने के लिए जारी टेंडर पर अब तक की प्रगति का विस्तृत जवाब मांगा है। साथ ही, डीजीपी को अगले आदेश तक व्यक्तिगत पेशी से छूट दे दी गई है। इस मामले की अगली सुनवाई 4 नवंबर को होगी, जिस पर सबकी निगाहें टिकी हैं। सुनवाई के दौरान न्याय मित्र अधिवक्ता रितेश कुमार महतो ने कोर्ट को बताया कि ईचागढ़ से जेएलकेएम के प्रत्याशी रहे तरुण महतो को जब न्यायिक हिरासत में लिया गया, तो उनकी हालत इतनी गंभीर थी कि उन्हें तुरंत सदर अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था।वहीं, राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता रोहित राय ने पक्ष रखते हुए कहा कि थानों में सीसीटीवी कैमरे लगाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू की जा चुकी है। पूरा मामला 19 नवंबर 2025 की रात का है। आरोप है कि तरुण महतो को पुलिस हिरासत में बेरहमी से प्रताड़ित किया गया, जिससे उनकी सेहत बिगड़ गई। इस दर्दनाक घटना से आहत उनकी पत्नी ने सीधे झारखंड हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई थी। हाईकोर्ट ने इस पर स्वतः संज्ञान लिया और इसे जनहित याचिका के रूप में दर्ज किया। अब देखना यह होगा कि 4 नवंबर को होने वाली अगली सुनवाई में सरकार क्या जवाब देती है और क्या थानों की सुरक्षा व्यवस्था सुधर पाती है।
झारखंड में इलेक्ट्रिक व्हीकल्स को बढ़ावा देने और चार्जिंग की समस्या को हमेशा के लिए खत्म करने के लिए एक बड़ा कदम उठाया गया है। झारखंड नवीकरणीय ऊर्जा विकास एजेंसी—यानी जेरेडा (JREDA), केंद्र सरकार की 'पीएम ई-ड्राइव योजना' के तहत राज्यभर में करीब 1,000 नए सार्वजनिक (Public) चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने की तैयारी कर रही है। ये स्टेशन पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी PPP मोड पर बनेंगे, जिनका संचालन निजी कंपनियां या व्यक्ति करेंगे और जेरेडा इसमें पूरी सहायता देगा। आपको बता दें कि केंद्र सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले पांच सालों में झारखंड में पहले ही 353 चार्जिंग स्टेशन लग चुके हैं, और अब इस नई योजना से पूरे राज्य में चार्जिंग नेटवर्क का दायरा और भी ज्यादा बड़ा हो जाएगा। इस योजना के तहत पूरे देश में चार्जिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए 2000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिसके तहत लोकेशन के हिसाब से सब्सिडी भी मिलेगी। बात करें झारखंड की, तो यहां पहले से ही 90 हजार से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन रजिस्टर्ड हैं। इनमें सबसे बड़ा हिस्सा यानी करीब 56 से 60 परसेंट इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स यानी ई-रिक्शा का है, लगभग 35 प्रतिशत टू-व्हीलर्स और करीब 5 प्रतिशत इलेक्ट्रिक फोर-व्हीलर्स शामिल हैं।इन 1000 नए चार्जिंग स्टेशनों के बनने से आम जनता को कई बड़े फायदे मिलेंगे:प्रदूषण में कमी: पेट्रोल-डीजल की जगह इलेक्ट्रिक गाड़ियां बढ़ने से प्रदूषण घटेगा।आसान लंबी यात्राएं: शहरों और हाइवे पर स्टेशन होने से लंबी दूरी का सफर अब बिना किसी टेंशन के तय किया जा सकेगा।रोजगार के अवसर: चार्जिंग स्टेशनों के निर्माण, संचालन और रखरखाव से राज्य में नए रोजगार भी पैदा होंगे।