JHARKHAND NEWS : "आरोपियों को बचा रही है सरकार": JPSC-JSSC घोटाले पर बाबूलाल मरांडी का तीखा प्रहार
झारखंड की सियासत इस वक्त जेपीएससी (JPSC) और जेएसएससी (JSSC) परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों को लेकर पूरी तरह से उफन रही है। विपक्ष के तीखे हमलों के बीच सरकार बैकफुट पर नजर आ रही है, तो वहीं छात्र सड़कों पर उतरकर आर-पार की लड़ाई का ऐलान कर चुके हैं। आइए जानते हैं आखिर इस पूरे विवाद की असल वजह क्या है और क्यों सियासत का पारा सातवें आसमान पर है।बाबूलाल मरांडी ने सोशल मीडिया पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि सरकार अब तक छात्रों को जेपीएससी-जेएसएससी धांधली की जांच ईडी से कराने का झांसा देती रही। लेकिन जैसे ही ईडी की ओर से ईसीआईआर (ECIR) दर्ज हुई, वैसे ही राज्य की सीआईडी (CID) हरकत में आई और पूर्व मुख्य सचिव सह जेपीएससी के पूर्व अध्यक्ष एल ख्यांग्ते को गिरफ्तार कर लिया। मरांडी का आरोप है कि ख्यांगते को पहले भी चार बार पूछताछ के लिए बुलाया गया था, लेकिन गिरफ्तारी तभी हुई जब केंद्रीय एजेंसी की एंट्री हुई।"
मरांडी ने इसकी तुलना पूर्व अधिकारी विनय चौबे के मामले से करते हुए झारखंड की जांच एजेंसियों की निष्पक्षता पर बड़ा सवालिया निशान लगाया है। उनका सीधा दावा है कि मुख्यमंत्री के करीबी विनोद सिंह, मुख्य सचिव के सहयोगी धर्मेंद्र और एल ख्यांग्ते जैसे नाम सामने आने के बाद राज्य की एजेंसी निष्पक्ष जांच नहीं कर सकती। उन्होंने आशंका जताई है कि अगर इन मामलों की सीबीआई जांच हुई, तो जांच की आंच सीधे मुख्यमंत्री तक पहुंच सकती है, और इसी डर से सरकार सीबीआई जांच से भाग रही है।एक तरफ जहां विपक्ष सरकार को घेरने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने 11 अगस्त को विधानसभा में सरकार का पक्ष स्पष्ट कर दिया है। मुख्यमंत्री ने बड़ा ऐलान करते हुए कहा है कि सरकार 14वीं JPSC प्रारंभिक परीक्षा और बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने के लिए पूरी तरह तैयार है। साथ ही, जिन परीक्षाओं में 'टीडीपीएल' (TDPL) एजेंसी की भूमिका संदिग्ध रही है, उनकी भी जांच कराई जाएगी।"
मुख्यमंत्री ने यह भी भरोसा दिलाया है कि परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी और फूल-प्रूफ बनाने के लिए IIT, IIM और XLRI जैसे देश के प्रतिष्ठित संस्थानों के विशेषज्ञों से सलाह ली जाएगी, ताकि भविष्य में छात्रों के भविष्य के साथ कोई खिलवाड़ न हो सके।लेकिन इन तमाम घोषणाओं के बावजूद सड़कों पर उबले छात्रों का गुस्सा शांत होने का नाम नहीं ले रहा है। छात्र अड़े हुए हैं कि सरकार को हर हाल में JSSC-CGL परीक्षा का परिणाम रद्द करना ही होगा और TDPL द्वारा कराई गई सभी परीक्षाओं की जांच का जिम्मा सीबीआई को सौंपना होगा।





