JHARKHAND NEWS : अध्यक्ष के आदेश पर आए थे परिणाम…', जेपीएससी घोटाले में उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता का बड़ा खुलासा
झारखंड लोक सेवा आयोग यानी जेपीएससी (JPSC) मेधा घोटाले में जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ रही है, परत दर परत बड़े और चौंकाने वाले खुलासे सामने आ रहे हैं। इस मामले में गिरफ्तार की गईं जेपीएससी की उप परीक्षा नियंत्रक श्वेता गुप्ता ने सीआईडी की रिमांड के दौरान पूछताछ में कई अहम राज उगले हैं। श्वेता गुप्ता ने अपने ऊपर लगे आरोपों की सुई सीधे आयोग के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते की ओर घुमा दी है। आइए जानते हैं कि सीआईडी के तीखे सवालों के सामने श्वेता गुप्ता ने क्या-क्या बड़े खुलासे किए हैं।
सीआईडी की पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने खुद को पूरी तरह निर्दोष बताया है। उनका कहना है कि उन्होंने जो भी किया, वह तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते के आदेश पर ही किया था। श्वेता के मुताबिक, परीक्षा नियंत्रक असीम किस्पोट्टा के अवकाश पर जाने के बाद 8 जून 2025 को अध्यक्ष एल. खियांग्ते ने उन्हें परीक्षा नियंत्रक का अतिरिक्त दायित्व सौंपा था।
11वीं से 13वीं जेपीएससी की प्रारंभिक और मुख्य परीक्षा तो पूर्व नियंत्रक के कार्यकाल में ही हो चुकी थी, लेकिन सफल अभ्यर्थियों के साक्षात्कार और रिजल्ट तैयार करने की जिम्मेदारी श्वेता गुप्ता को दी गई।
दस्तावेज सत्यापन और सदस्यों की भूमिका: श्वेता गुप्ता ने सीआईडी को बताया कि उन्होंने पीटी और मुख्य परीक्षा के अंकों को जोड़कर रिजल्ट तैयार किया था। इसके बाद दस्तावेज सत्यापन के लिए उप सचिव सरोजनी तिर्की की अध्यक्षता में एक टीम बनाई गई। रिजल्ट जेपीएससी के तीनों सदस्यों—डॉ. अजिता भट्टाचार्य, डॉ. जमाल अहमद और डॉ. अनिमा हांसदा के पास से गुजरने के बाद सचिव और अंततः अध्यक्ष के अनुमोदन के बाद ही प्रकाशित किया गया।
पूछताछ में श्वेता गुप्ता ने परीक्षा का संचालन करने वाली एजेंसी टीडीपीएल (TDPL) के कर्मियों—उस्मान, एबाद, संजय कुमार, हेमंत और कंपनी के निदेशक रामवीर व सतपाल का नाम लिया है। उनके अनुसार, ओएमआर शीट में फेरबदल और उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैनिंग का काम प्रमोद तिवारी द्वारा किया जाता था।
धर्मेंद्र की शिकायत: श्वेता गुप्ता ने यह भी खुलासा किया कि कंप्यूटर ऑपरेटर धर्मेंद्र, पूर्व अध्यक्ष एल. खियांग्ते का करीबी था। टीडीपीएल के निदेशक रामवीर के कहने पर श्वेता ने धर्मेंद्र की शिकायत अध्यक्ष से की थी, क्योंकि धर्मेंद्र प्रश्नपत्र आउट करने का दबाव बना रहा था।
लाइव निगरानी: श्वेता ने बताया कि टीडीपीएल के ब्लैकलिस्ट होने की जानकारी उन्हें मौखिक रूप से मिली थी, और एजेंसी का इंपैनलमेंट भी अध्यक्ष के आदेश पर हुआ था। सबसे अहम बात यह है कि स्कैनिंग रूम के सीसीटीवी फुटेज की लाइव निगरानी खुद जेपीएससी के तत्कालीन अध्यक्ष एल. खियांग्ते करते थे।यह सिर्फ एक बानगी है। जेपीएससी घोटाले की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, बिचौलियों और एजेंटों के नाम भी सामने आ रहे हैं। हाल ही में गिरफ्तार बिचौलिया बुद्धेश्वर और अन्य आरोपियों से पूछताछ में एक करोड़ रुपये तक में चयन की डील और ओएमआर शीट खाली छोड़ने जैसे सनसनीखेज खुलासे हुए हैं। फिलहाल, पूर्व चेयरमैन एल. खियांग्ते की जमानत याचिका पर कोर्ट में सुनवाई होनी है और सीआईडी अन्य फरार आरोपियों की तलाश में ताबड़तोड़ छापेमारी कर रही है।





