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JHARKHAND NEWS : JSSC CGL और JPSC परीक्षाओं पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, 4 परीक्षाओं पर लगाई रोक; सरकार से मांगा जवाब

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झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। राज्य में सिर्फ दो दिनों के भीतर, झारखंड हाईकोर्ट ने JSSC-CGL और JPSC समेत 4 प्रमुख परीक्षाओं और उनसे जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने के सरकार के फैसले पर रोक लगा दी है! इस फैसले के बाद से चयनित अभ्यर्थियों में जहां खुशी की लहर है, वहीं राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है। विस्तार से बात करें, तो पिछले दिनों झारखंड सरकार ने बड़े पैमाने पर कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद JSSC और JPSC की कुल 22 परीक्षाओं को रद्द करने का फैसला लिया था। इस सूची में JSSC-CGL (कम्बाइंड ग्रेजुएट लेवल), CDPO (बाल विकास परियोजना पदाधिकारी), 11वीं से 13वीं JPSC सिविल सेवा परीक्षा, और फूड सेफ्टी ऑफिसर (FSO) की परीक्षाएं शामिल थीं। लेकिन इसके खिलाफ चयनित अभ्यर्थी हाईकोर्ट पहुंच गए। मामले की सुनवाई झारखंड हाईकोर्ट केजस्टिस दीपक रोशन की अदालत में हुई। अदालत ने बेहद सख्त टिप्पणी करते हुए कहा कि'प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों (Principles of Natural Justice) का पालन किए बिना और बिना ठोस सबूत के किसी भी नियमित नियुक्ति को यूं अचानक रद्द नहीं किया जा सकता।

हाईकोर्ट ने गुरुवार और शुक्रवार को दो अलग-अलग आदेशों में JPSC और JSSC-CGL की इन चार प्रमुख परीक्षाओं की कैंसिलेशन नोटिफिकेशन पर अंतरिम रोक लगा दी।

इस अंतरिम आदेश के बाद करीब 1,975 CGL चयनित अधिकारियों, 64 CDPO और 11वीं से 13वीं JPSC के जरिए सेवा दे रहे सैंकड़ों नवनियुक्त अधिकारियों को बहुत बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि प्रभावित अधिकारियों को काम करने दिया जाए, उनका वेतन जारी रखा जाए और इस मामले में राज्य सरकार से जवाब तलब करते हुए अगली सुनवाई 7 से 15 सितंबर के बीच तय की गई है। कोर्ट ने सरकार से पूरी जांच का हलफनामा मांगा है।

राज्य में लंबे समय से छात्र आंदोलन चल रहा था, जिसके दबाव में सरकार ने ये परीक्षाएं रद्द करने का कड़ा कदम उठाया था। एक तरफ जहां इस फैसले से छात्र आंदोलकारियों में निराशा है, वहीं कोर्ट के स्टे के बाद सिलेक्टेड कैंडिडेट्स ने रांची में जश्न भी मनाया। विपक्ष भी इस मुद्दे पर सरकार को घेरने में जुटा है। अब सबकी नजरें इस बात पर टिकी हैं कि अगली सुनवाई में राज्य सरकार अदालत के सामने क्या पक्ष रखती है।