Hindi News / डिजिलॉकर पर अपलोड होंगे सभी विश्वविद्यालयों के लंबित दस्तावेज, 30 सितंबर तक का...

BIHAR NEWS : डिजिलॉकर पर अपलोड होंगे सभी विश्वविद्यालयों के लंबित दस्तावेज, 30 सितंबर तक का अल्टीमेटम

Edited By:  |
bihar news bihar news

बिहार में मादक पदार्थों के खिलाफ पुलिस का 'ऑपरेशन क्लीन' तेज हो गया है। पुलिस की विशेष टीमों ने इस बार तकनीक का सहारा लेते हुए अवैध अफीम की खेती पर बड़ी चोट की है। ड्रोन की मदद से राज्य में करीब 99.86 एकड़ में फैली अफीम की अवैध फसल को चिन्हित किया गया और फिर पुलिस ने उसे जड़ से नष्ट कर दिया।

मद्य निषेध एवं स्वापक नियंत्रण ब्यूरो के साथ मिलकर एसटीएफ की टीमें अब भारत-नेपाल सीमा और पूर्वोत्तर राज्यों से आने वाले रास्तों पर कड़ी नजर रख रही हैं। आंकड़ों की बात करें तो जुलाई तक बिहार में 3059 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया है। पुलिस का स्पष्ट संदेश है—अवैध शराब के साथ-साथ अब गांजा, अफीम और चरस के कारोबारियों की खैर नहीं। ड्रोन तकनीक के इस्तेमाल से दूरदराज के इलाकों में चल रहे इस अवैध खेल का पर्दाफाश करना पुलिस के लिए अब कहीं आसान हो गया है।

अब रुख करते हैं स्वास्थ्य जगत की खबर की ओर। बिहार में टीबी उन्मूलन की राह अभी भी चुनौतीपूर्ण बनी हुई है। राज्य में इस वर्ष जून तक 1,14,461 नए टीबी मरीज दर्ज किए गए हैं। देश में उत्तर प्रदेश के बाद बिहार दूसरे स्थान पर है।

चिंताजनक बात यह है कि इनमें से 21,550 मरीज ऐसे हैं जिनमें बीमारी के स्पष्ट लक्षण नहीं थे, जिनका पता सिर्फ जांच के दौरान चला। हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह है कि बिहार में टीबी उपचार की सफलता दर अब बढ़कर 88 प्रतिशत तक पहुंच गई है। स्वास्थ्य विभाग का जोर अब 'जल्दी पहचान, समय पर उपचार' के फॉर्मूले पर है। पिछले 6 वर्षों में राज्य में 10 लाख से अधिक मरीज सामने आए हैं, जिसे देखते हुए जांच केंद्रों और स्वास्थ्यकर्मियों की भूमिका अब और भी निर्णायक हो गई है।

अंत में, बिहार के विश्वविद्यालयों से पढ़ाई कर चुके लाखों छात्रों के लिए एक राहत भरी खबर है। अब डिग्री और मार्कशीट के लिए विश्वविद्यालयों के दफ्तरों के चक्कर काटने की मजबूरी जल्द ही खत्म होने वाली है।

राज्यपाल एवं कुलाधिपति सैयद अता हसनैन के निर्देश पर राज्य के सभी 17 विश्वविद्यालयों को यह आदेश दिया गया है कि वे लंबित शैक्षणिक दस्तावेजों को डिजिलॉकर पर 30 सितंबर तक अनिवार्य रूप से अपलोड करें। अपर मुख्य सचिव दीपक कुमार सिंह ने खुद इस प्रक्रिया की समीक्षा की है। अब छात्रों को नौकरी या उच्च शिक्षा के लिए अपनी डिग्रियां डिजिटल रूप में कहीं भी और कभी भी उपलब्ध होंगी। यह कदम न केवल छात्रों का समय बचाएगा, बल्कि व्यवस्था में पारदर्शिता और डिजिटल क्रांति भी लाएगा।