पूर्णिया सदर विधानसभा चुनाव : क्या बीजेपी बचा पाएगी किला या होगी सियासी सेंधमारी? ये नये चेहरे भी आजमा सकते हैं किस्मत, महागठबंधन और निर्दलीय देंगे कड़ी टक्कर

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Bihar Assembly Election 2025 :चुनावी वर्ष में प्रवेश करते हुए बिहार की सियासी फिजां बदलने लगी है। सूबे की सारी पार्टियां अभी से ही अपनी गोटी सेट करने की जुगत में लग गई है। बिहार के पूर्णिया सदर विधानसभा क्षेत्र की बात करें तो आगामी चुनाव को लेकर यहां भी सरगर्मी तेज हो गई है। विधानसभा चुनाव में रण में उतरने को व्याकुल नेता लगातार जनसंपर्क के साथ-साथ अपने पार्टी के आलाकमान को खुश करने में लगे हुए है। साथ ही निर्दलीय भी ताल ठोंकने का मन बना लिया है लेकिन इन सब के बीच कौन-कौन प्रत्याशी हो सकते हैं, जो लगातार मेहनत करते किसी न किसी रूप में दिख रहे हैं। आइए उसपर गौर करें।

पूर्णिया सदर विधानसभा की ये सीट पर अगर बात करें तो इस पूर्णिया विधानसभा सीट पर अब तक 19 बार चुनाव हुए हैं, जिसमें 3 उपचुनाव शामिल हैं. यहां से सबसे अधिक 7 बार बीजेपी जीती है. वहीं, 5 बार कांग्रेस, 4 बार सीपीएम, एक बार एजीपी, जनता पार्टी और एनसीओ ने जीत दर्ज की है. महत्वपूर्ण बात ये है कि 1969 के बाद से कांग्रेस यहां से जीत नहीं पाई है. वहीं, बात करें इस सीट पर हुए चुनाव की तो पूर्णिया सदर विधानसभा क्षेत्र पर 1980 से लेकर 1995 तक सीपीएम के अजीत सरकार का दबदबा रहा था।

जून 1998 को अजीत सरकार की पूर्णिया में हत्या हो गई. उनकी हत्या के बाद हुए उपचुनाव में उनकी पत्नी माधवी सरकार जीती थीं. 2000 से 2010 तक बीजेपी के राज किशोर केसरी यहां से जीतते रहे, लेकिन जनवरी 2011 में उनकी भी हत्या हो गई. उसके बाद हुए उपचुनाव में किरण देवी बीजेपी के टिकट पर चुनाव जीतीं थी. फिलहाल, इस सीट पर बीजेपी का कब्जा है. बात करेंगे तो सीपीएम के अजित सरकार के बाद से किसी भी प्रत्याशी ने या किसी भी पार्टी ने बीजेपी को नही हरा पाया है।

जानकारी के मुताबिक़ सीपीएम इस सीट पर फिर से ताल ठोंकने का मन बनाया है। सीपीएम के नेता का कहना है कि ये सीपीएम की परंपरागत सीट रही है, जब से ये सीट कभी आरजेडी या कभी कांग्रेस को गयी है, तब से यहां हार ही मिली है। दूसरी सब से बड़ी बात अगर महागठबंधन के राजद के खाते में अगर रुपौली विधानसभा की सीट जाती है तो सीपीएम पूर्णिया सदर सीट पर अपनी दावेदारी मजबूती से रखेगी लेकिन इस बार कांग्रेस भी इस सीट पर उम्मीदवार बदलने का मूड बनाया है।

अभी फिलहाल यहां से BJP के विजय कुमार खेमका विधायक हैं। पिछले चुनाव में उन्होंने कांग्रेस की इंदु सिन्हा को हराया था। इस सीट पर मुस्लिम मतदाता सबसे ज्यादा हैं. इसके बाद राजपूत, ब्राह्मण, कोइरी, कुर्मी, पासवान और यादव वोटरों की भूमिका है। पुरुष वोटरः 1.59 लाख (52.4%),महिला वोटरः 1.44 लाख (47.4%), ट्रांसजेंडर वोटरः 8 (0.002%)।

आइए एक नज़र डालते हैं, जो 2025 में इस पूर्णिया सदर विधानसभा सीट से उम्मीदवार हो सकते हैं। भाजपा से रेस में वर्तमान में विधायक विजय खेमका को टिकट मिलने की पूर्ण सम्भावना है। पार्टी इन्हीं के नाम पर अपनी सहमति दे सकती है। अगर चेहरे को बदलती है तो गुटबाजी और नाराजगी होने की प्रबल संभावना फिर भी भाजपा से कई चेहरे मैदान में नज़र आ रहे हैं।

बात करें नूतन गुप्ता की तो महिला प्रत्याशी के तौर पर लोगों के बीच पहुंच कर जनसेवा कर रही हैं। अपनी दावेदारी पर उनका कहना है कि पार्टी अगर मौका देगी तो जरूर जनता को किए वादे पर सफल होंगी। वहीं, पूर्णिया नगर निगम की डिप्टी मेयर पल्लवी गुप्ता भी दिल्ली और पटना की दौड़ लगा रही हैं। भाजपा से होने वाले चहेरे में अनंत भारती, डॉक्टर एके गुप्ता, डॉक्टर संजीव कुमार, राजीव कुमार, तारा साह के अलावा भी कई चेहरे हैं, जो लगातार पटना और दिल्ली के सम्पर्क में हैं।

वहीं, पूर्णिया नगर निगम की महापौर विभा कुमारी के पति जितेंद्र यादव सबसे प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं, जो लगातार जनसंपर्क करते हुए लोंगो के बीच दिख रहे है। बात करें इनके चुनाव लड़ने की तो लोग निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर इनको देख रहे हैं लेकिन महागठबंधन से इनकी दिली इच्छा की टिकट इनको मिले, अगर मिलता है तो बीजेपी को कांटे की टक्कर दे सकते हैं।

सूत्र बता रहे हैं कि इनकी कई बैठक महागठबंधन के कई बड़े नेताओं से हो रही है। वहीं, कांग्रेस के जिला अध्यक्ष और जिला परिषद के उपाध्यक्ष नीरज कुमार सिंह उर्फ छोटू सिंह भी इस बार जबरदस्त ताल ठोके रहे हैं। इस बार कांग्रेस के साथ-साथ इनको कांग्रेस के प्रदेश अध्य्क्ष पर भी पूरा भरोसा है। मौका इनको मिलेगा इसलिए लगातार पूर्णिया सदर विधानसभा सीट पर मेहनत करते नज़र आ रहे हैं।

वहीं, सीपीएम के राजीव सिंह भी पूरी मजबूती से इस सीट पर तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि महागठबंधन में ये सीट जिसको भी जाएगी, हम तहेदिल से उनके साथ रहेंगे। महागठबंधन के धर्म का पालन करेंगे। अब बात करेंगे नए चेहरे में जनसुराज की, जो पूरी मुस्तैदी से लड़ने की बात इस सीट पर करेगी। कई और चेहरे हैं, जो अलग अलग पार्टियों के साथ-साथ निर्दलीय भी आएंगे और समीकरण बिगाड़ने का काम भी करेंगे। 2025 का चुनाव कई मायने में पूर्णिया सदर विधानसभा सीट के लिए अहम होगा और बीजेपी को अपना गढ़ बचाने की भी चुनौती होगी।