पटना एम्स में 5 गुना कम खर्च पर न्यूरोसर्जरी : गंभीर बीमारियों का हो रहा सफल ऑपरेशन,आयुष्मान के लाभार्थियों का मुफ्त इलाज
पटना: बिहार के मरीजों के लिए राहत भरी खबर है। अब ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन हैमरेज, एन्यूरिज्म और रीढ़ की जटिल बीमारियों के इलाज के लिए दिल्ली, मुंबई या वेल्लोर जैसे बड़े शहरों का रुख करने की मजबूरी काफी हद तक कम हो गई है। एम्स पटना में अत्याधुनिक तकनीक की मदद से न्यूरोसर्जरी निजी अस्पतालों की तुलना में करीब पांच गुना कम खर्च पर की जा रही है। हालांकि, इस सुविधा की बढ़ती मांग के कारण मरीजों को लंबा इंतजार भी करना पड़ रहा है।
आधुनिक तकनीकों से जटिल न्यूरोसर्जरी संभव
एम्स पटना में रोबोटिक माइक्रोस्कोप, स्टील्थ नेविगेशन और थ्री-डी स्पाइन जैसी आधुनिक तकनीकों से जटिल न्यूरोसर्जरी की जा रही है। यहां ब्रेन ट्यूमर, ब्रेन हैमरेज, एन्यूरिज्म, आर्टिरियोवेनस मालफॉर्मेशन (एवीएम), स्कल बेस ट्यूमर, रीढ़ की हड्डी के फ्रैक्चर, काइफोसिस और स्कोलियोसिस जैसी गंभीर बीमारियों का सफल ऑपरेशन किया जा रहा है।
एम्स में लगभग एक-चौथाई लागत पर हो रहीसर्जरी
एम्स के न्यूरोसर्जरी विभाग के अनुसार,जिन ऑपरेशनों पर निजी अस्पतालों में दो से तीन लाख रुपये तक खर्च आता है, वहीं, सर्जरी एम्स में लगभग एक-चौथाई लागत पर हो रही है। ब्रेन ट्यूमर की सर्जरी 40 से 50 हजार में और स्पाइन सर्जरी 75 से 95 हजार रुपये में की जा रही है। आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थियों का इलाज निशुल्क किया जा रहा है।
बेहतर चिकित्सा सुविधा के कारण बढ़ रहीमरीजों की संख्या
सस्ती और बेहतर चिकित्सा सुविधा के कारण मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। फिलहाल न्यूरोसर्जरी के लिए 800 से 1000 मरीज प्रतीक्षा सूची में हैं और कई मरीजों को ऑपरेशन के लिए दो साल से अधिक का इंतजार करना पड़ रहा है। इसके बावजूद एम्स पटना की यह सुविधा बिहार और आसपास के राज्यों के मरीजों के लिए बड़ी राहत साबित हो रही है, क्योंकि अब उन्हें महंगे इलाज के लिए दूसरे राज्यों के अस्पतालों का रुख नहीं करना पड़ रहा है।





