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JHARKHAND NEWS : NCST की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने रिम्स में प्रोफेसर्स की नियुक्ति समेत कई मामलों की समीक्षा की

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रांची : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग (NCST) की सदस्य डॉ. आशा लकड़ा ने मंगलवार को रिम्स की स्थिति, डॉक्टर्स और प्रोफेसर्स की नियुक्ति समेत कई मामलों की समीक्षा की. उन्होंने रिम्स 2 के निर्माण को लेकर कहा कि यह कहीं सुदूरवर्ती इलाकों में बनना चाहिए. रांची में क्यों इसकी आवशयक्ता है. गुमला, सिमडेगा एवं पलामू में इसकी आवश्यकता अधिक है. उन्होंने कहा रिम्स एक ऑटोनॉमस बॉडी है.

रिम्स को ऑटोनॉमस बॉडी इसलिए बनाया गया है, ताकि काम तेजी से हो और समस्याओं का जल्द से जल्द निराकरण हो सके, लेकिन किसी कारणवश जानकारी के अभाव में रिम्स प्रबंधन सरकार पर ही निर्भर रहते हैं. ऑटोनॉमस बॉडी होने के कारण जो भी नियम बनाना है, रिम्स प्रबंधन को खुद बनाना है. राज्य सरकार से रिम्स को जो लाभ मिलना है, वह लाभ राज्य सरकार रिम्स को देती रहेगी.

जानकारी के अभाव में रिम्स प्रबंधन अब तक ऑटोनॉमस बॉडी होने के नाते अपनी नियमावली नहीं बना पाई है. इस कारण रिम्स प्रबंधन को जो चेक_इन बैलेंस बनाना था, वह वहीं का वहीं स्थिर रह गया.

डॉ. आशा लकड़ा ने समीक्षा के दौरान रिम्स प्रबंधन को निर्देश देते हुए कहा कि अपना खुद का कानून बनाएं, ताकि ऑटोनॉमस बॉडी को अच्छी तरह से संचालित कर सकें. समीक्षा के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि रिम्स में जितने भी डॉक्टर्स, प्रोफेसर्स, जूनियर डॉक्टर्स, एमबीबीएस हैं, उनकी डायरेक्ट नियुक्ति या बैकलॉग नियुक्ति होती है. उनके लिए प्रमोशन और रोस्टर सिस्टम होता है. समीक्षा के दौरान उन्होंने रिम्स प्रबंधन को इसके लिए हर केटेगरी के लिए रोस्टर बनाने का निर्देश दिया है. उन्होंने कहा कि झारखंड में लगभग 26 प्रतिशत ट्राइबल हैं. रिम्स प्रबंधन से उन्होंने यह भी पूछा कि नियुक्ति 26 प्रतिशत वेकेंसी फुलफिल की गई है या नहीं. उन्होंने यह भी कहा कि यदि कोई ट्राइबल अभ्यर्थी जेनरल केटेगरी में चयनित होता है तो उसे जेनरल केटेगरी में रखा गया या ST केटेगरी में. यदि उसे जेनरल केटेगरी में रखा गया तो ST का एक सीट खाली रह जाता है. नियमावली के तहत इस सीट को ST केटेगरी के तहत ही भरा जा सकता है. उन्होंने रिम्स प्रबंधन को निर्देश दिया है कि रोस्टर सिस्टम ऑनलाइन होना चाहिए. बैठक में मुख्य रूप से आयोग के संयुक्त सचिव अमित निर्मल, शुभाशीष सोरेन लीगल सलाहकार, राहुल यादव लीगल सलाहकार, रिया अन्वेषक, कुशेश्वर साहू निजी सचिव, विवेक कुमार निजी सहायक सहित रिम्स के डायरेक्टर, अधीक्षक, चिकित्सा अधीक्षक, सहित अन्य अधिकारीगण शामिल रहे.