JHARKHAND NEWS : रांची के नगड़ी में खेत में जाकर किसानों ने देखा इफको नैनो, उर्वरकों का सरसों फसल में प्रभाव
रांची : इफको एवं कृषि विज्ञान केन्द्र दिव्यायन के संयुक्त तत्वावधान में नगड़ी प्रखंड के ग्राम कोलांबी में मंगलवार को नैनो उर्वरक का सरसों फ़सल में प्रयोग आधारित एक दिवसीय बैठक का आयोजन किया गया.
बैठक में आसपास के लगभग 100 किसानों ने भाग लिया. इस बैठक में इफको के राज्य विपणन प्रबन्धक डॉ. शशि भूषण समदर्शी,कृषि विज्ञान केन्द्र के सस्य वैज्ञानिक डॉ. मनोज कुमार एवं इफको के प्रबंधक चन्दन कुमार उपस्थित हुए.
क्लस्टर फ्रंट लाइन प्रदर्शन स्कीम के तहत चालीस किसानों को सरसों की उन्नत,रोगमुक्त एवं उन्नत खेती के साथ अधिक तेल प्रतिशत प्राप्त करने के लिए सरसों के बीज के साथ इफको नैनो डीएपी, नैनो यूरिया एवं अन्य कृषि रसायनों को दिया गया था और उसकी वैज्ञानिक खेती के गुर बताये गये थे. उन्हें बताया गया था कि सरसों के बुवाई के पूर्व बीजों को नैनो डीएपी से शोधित करके पंक्तिबद्ध तरीके से बुवाई करें. फ़सल के 30 से 35 दिनों की अवस्था में दानेदार यूरिया की जगह पर नैनो उर्वरकों का स्प्रे करें एवं पुनः पुष्पावस्था के समय इनका स्प्रे करें. ऐसा करने से उत्पादन तो अच्छा होगा ही दाने पुष्ट बनेंगे एवं तेल की मात्रा भी अधिक होगी.
आज किसानों के बीच खेती के उपरांत खड़ी फ़सल में इसके प्रभाव को गांव के सभी किसानों को दिखाने एवं जागरूक करने के उद्देश्य से क्षेत्र दिवस का आयोजन किया गया.
प्रगतिशील कृषक नीतू कुमारी ने उपस्थित सभी किसानों को दानेदार यूरिया के बिना सरसों की सफल खेती के बारे में अपना अनुभव साझा किया.उन्होंने कहा कि नैनो उर्वरकों के प्रयोग से उनका सरसों का फसल अन्य किसानों के फ़सल से काफी अच्छा हुआ है. उन्होंने यह भी कहा कि सरसों की खेती में दानेदार यूरिया का प्रयोग नहीं करने के उपरांत भी इसका बढ़वार एवं फलियों का बनना बहुत अच्छा हुआ है.मुझे बहुत खुशी है कि अब मैं दानेदार यूरिया के बिना भी खेती कर सकती हूँ.
डॉ. मनोज कुमार ने आगामी खरीफ फसलों की खेती के बारे में बताते हुए अदरक की खेती के बारे में जानकारी दी एवं जड़ गलन से बचाव,जड़ों के अच्छे बढ़वार एवं फ़सल की तेजी से विकास के लिए अदरक के कन्दो को नैनो डीएपी एवं फफूंदीनाशी से उपचारित कर बुवाई की सलाह दी. डॉ. शशि भूषण समदर्शी ने फसलों में सूक्ष्म पोषक तत्वों की महत्ता के बारे में बताते हुए बोरान एवं कैल्शियम का प्रयोग करने की सलाह दी.
चंदन कुमार ने अच्छी एवं उन्नत खेती के लिए किसानों को दानेदार उर्वरकों के प्रयोग को कम करते हुए जैविक श्रोतों के साथ नैनो उर्वरकों के प्रयोग के लिए सभी से निवेदन किया. अंत में सभी किसान सरसों के खड़ी फ़सल का अवलोकन खेत में जाकर किया.





