BIHAR NEWS : राजस्व सेवा अधिकारियों पर लगे आरोप निराधार, हाईकोर्ट के आदेशों का पालन हो - बिहार राजस्व सेवा महासंघ

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पटना : बिहार राज्य सेवा महासंघ (संयुक्त मोर्चा) ने विभागीय स्तर पर आयोजित हालिया प्रेस कॉन्फ्रेंस में राजस्व सेवा के अधिकारियों पर लगाए गए गंभीर आरोपों पर कड़ा विरोध दर्ज कराया है. महासंघ ने कहा कि यह संकेत देने की कोशिश की गई कि भूमि से जुड़े पदाधिकारी कथित रूप से “भूमाफियाओं के एजेंट” के रूप में कार्य कर रहे हैं और उनके खिलाफ निलंबन तथा सेवा समाप्ति जैसी कार्रवाई की जा सकती है. महासंघ ने इन आरोपों को तथ्यहीन और राजस्व सेवा की सामूहिक गरिमा को ठेस पहुंचाने वाला बताया है.

महासंघ का कहना है कि जिन राजस्व पदाधिकारियों पर राज्य में भूमि अतिक्रमण हटाने,अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई करने,भूमि विवादों के समाधान और राजस्व प्रबंधन जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां हैं,उन्हीं अधिकारियों की निष्ठा और ईमानदारी पर सामूहिक रूप से प्रश्न उठाना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है.

महासंघ के अनुसार यदि किसी अधिकारी के खिलाफ भूमाफियाओं से मिलीभगत के ठोस और प्रमाणित साक्ष्य उपलब्ध हों तो विधिसम्मत प्रक्रिया के तहत निष्पक्ष जांच और कड़ी कार्रवाई का वे भी समर्थन करेंगे. लेकिन बिना प्रमाण पूरे संवर्ग और संगठन को कटघरे में खड़ा करना न्यायसंगत नहीं है.

महासंघ ने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान विवाद का मूल कारण भूमि सुधार उपसमाहर्ता (DCLR)पद पर पदस्थापन से जुड़ा है. बिहार राज्य सेवा नियमावली 2010 के अंतर्गत भूमि सुधार उपसमाहर्ता के कुल 101 पद तथा समकक्ष श्रेणी के अन्य 33 पद मूल रूप से राजस्व सेवा संवर्ग के पदाधिकारियों के लिए अधिसूचित हैं. इसके बावजूद इन पदों की नियुक्ति अन्य संवर्ग के अधिकारियों को सौंपे जाने को सेवा संरचना की मूल भावना के विपरीत और राजस्व सेवा के अधिकारियों के अधिकारों का अतिक्रमण बताया गया है.

महासंघ के अनुसार प्रोन्नति के बाद पदस्थापन नहीं मिलने के मामले को लेकर यह मुद्दाPatna High Courtमें भी उठाया गया था. न्यायालय ने 19 जून 2025 को पारित आदेश में स्पष्ट निर्देश दिया कि जिन राजस्व सेवा अधिकारियों कोDCLRपद पर प्रोन्नति दी जा चुकी है,उन्हें उस पद पर पदस्थापित किया जाए और अन्य संवर्ग के अधिकारियों को नए सृजित पदों पर समायोजित किया जाए. साथ ही न्यायालय ने पूरी प्रक्रिया तीन महीने के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया था.

महासंघ ने आरोप लगाया कि न्यायालय के स्पष्ट निर्देशों के बावजूद नियमों में बदलाव कर आदेशों को व्यावहारिक रूप से निष्प्रभावी बनाने की कोशिश की गई. इस संबंध में अवमानना वाद (एम.जे.सी. संख्या 2380/2025) भी न्यायालय में विचाराधीन है. सुनवाई के दौरान 28 नवंबर 2025 और 30 जनवरी 2026 को पारित आदेशों में न्यायालय ने स्पष्ट किया कि आदेशों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए,अन्यथा संबंधित अधिकारियों को स्पष्टीकरण देना होगा और आगे की न्यायिक कार्रवाई भी संभव है.

महासंघ का कहना है कि इस पूरे विवाद का समाधान केवल उच्च न्यायालय के आदेशों के ईमानदार और समयबद्ध अनुपालन से ही संभव है. यदि स्पष्ट न्यायिक निर्देशों के बावजूद प्रशासनिक स्तर पर अनावश्यक विवाद खड़ा किया जाता है तो इससे न्यायिक व्यवस्था की गरिमा के साथ-साथ प्रशासनिक तंत्र की विश्वसनीयता भी प्रभावित होती है.

महासंघ ने यह भी दोहराया कि उनकी मांगें किसी प्रकार के विशेषाधिकार के लिए नहीं हैं,बल्कि सेवा संरचना के अंतर्गत अधिसूचित पदों पर वैधानिक अधिकार,प्रशासनिक दक्षता,संवर्गीय संतुलन और न्यायालय के आदेशों के अनुपालन से जुड़ी हुई है.

संगठन ने यह भी रेखांकित किया कि राजस्व सेवा के अधिकारी ही जमीनी स्तर पर भूमाफियाओं,अवैध कब्जों और भूमि विवादों के खिलाफ कार्रवाई का नेतृत्व करते हैं. ऐसे अधिकारियों को ही भूमाफियाओं से जोड़कर आरोपित करना न केवल तर्कहीन है,बल्कि इससे वास्तविक अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई भी कमजोर पड़ सकती है.

अंत में महासंघ ने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि उच्च न्यायालय के आदेशों का तत्काल और पूर्ण अनुपालन सुनिश्चित किया जाए,ताकि सेवा संरचना में संतुलन बना रहे और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारू रूप से संचालित हो सके.

पटना से अंकिता की रिपोर्ट--