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JHARKHAND NEWS : आदिवासी महाजुटान में नहीं पहुंचे सीएम हेमंत सोरेन, जेएमएम विधायक विकास मुंडा ने संभाली कमान

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राजधानी रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में रविवार को आदिवासी समाज का एक महासैलाब उमड़ा। मौका था कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री बंधु तिर्की के नेतृत्व में आयोजित 'आदिवासी एकता महाजुटान' का। झारखंड के कोने-कोने से पहुंचे लाखों आदिवासियों ने इस मंच से अपनी एकता और अधिकारों की हुंकार भरी। इस महाजुटान में झारखंड के अलग-अलग जिलों से भारी संख्या में लोग पहुंचे। हालांकि, कार्यक्रम में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को भी आमंत्रित किया गया था, लेकिन वे खुद शामिल नहीं हो सके। उनकी जगह झामुमो विधायक विकास कुमार मुंडा ने मुख्यमंत्री के प्रतिनिधि के तौर पर शिरकत की। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि सीएम की गैरमौजूदगी के बावजूद प्रतिनिधि का पहुंचना इस आयोजन के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है.आयोजकों का दावा है कि इस रैली में लाखों लोग जुटे। लेकिन इस महाजुटान की असली ताकत इसके तीखे तेवर और गंभीर मुद्दे थे। मंच से वक्ताओं ने मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर जोर दिया:

  • प्रस्तावित परिसीमन का विरोध: सबसे बड़ा मुद्दा आने वाले परिसीमन को लेकर रहा। नेताओं ने आशंका जताई कि सिर्फ जनसंख्या के आधार पर परिसीमन होने से झारखंड में आदिवासियों का राजनीतिक प्रतिनिधित्व कमजोर हो सकता है। मांग उठाई गई कि इसके लिए ऐतिहासिक विस्थापन और विशेष संवैधानिक संरक्षण को आधार बनाया जाए।

  • जल-जंगल-जमीन और कानून: सीएनटी-एसपीटी एक्ट, एमएमडीआर संशोधन बिल और पांचवीं अनुसूची के प्रावधानों को सख्ती से लागू करने की मांग की गई।

  • केंद्र सरकार पर निशाना: मंच से केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए गए और आदिवासी हितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया गया।

    "बंधु तिर्की और अन्य आदिवासी नेताओं ने दो टूक शब्दों में कहा कि अपने संवैधानिक अधिकारों और राजनीतिक हिस्सेदारी की रक्षा के लिए अब समाज को और ज्यादा एकजुट होना पड़ेगा। बहरहाल, इस महाजुटान ने झारखंड की राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर आदिवासी मुद्दों को केंद्र में ला खड़ा किया है।