JHARKHAND NEWS : स्वाभिमान या इस्तीफा? – भानु प्रताप का वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर से सीधा सवाल
झारखंड की राजनीति में इन दिनों वार-पलटवार का दौर जारी है! और केंद्र में हैं राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री राधाकृष्ण किशोर।नौकरशाही के रवैये से नाराज मंत्री जी ने जब अपने सुरक्षा गार्ड वापस किए, तो मामला यहीं नहीं रुका। अब बीजेपी नेता और पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही ने मंत्री जी को पत्र लिखकर इस सियासी पारे को और चढ़ा दिया है।19 जुलाई को जारी अपने इस पत्र में भानु प्रताप शाही ने लिखा कि “आपकी पीड़ा पढ़कर व्यथित हूँ।”उन्होंने सीधे तौर पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक कैबिनेट मंत्री का इस तरह लाचार महसूस करना लोकतंत्र के लिए बेहद चिंताजनक है।
भानु प्रताप ने सीधा हमला बोलते हुए लिखा— "सच्चाई यह है कि बिना 'ऊपर वाले बॉस' की हरी झंडी के सचिवालय के अफसर किसी कैबिनेट मंत्री को अंगूठा दिखाने की हिमाकत नहीं कर सकते।बीजेपी नेता ने राधाकृष्ण किशोर को सलाह दी कि अगर मंत्री पद केवल शोभा बढ़ाने का जरिया रह गया है, तो सत्ता से चिपके रहने के बजाय अपने स्वाभिमान और पलामू की माटी के सम्मान के लिए तुरंत इस्तीफा दे देना चाहिए।उन्होंने पलामू के इतिहास की याद दिलाते हुए इंदर सिंह नामधारी और ददई दुबे जैसे कद्दावर नेताओं के उदाहरण दिए— जिन्होंने स्वाभिमान से समझौता करने के बजाय सत्ता को ठोकर मारना बेहतर समझा था।पत्र के अंत में भानु प्रताप ने राधाकृष्ण किशोर को कांग्रेस की परंपरा से जुड़ा नेता बताते हुए उम्मीद जताई कि वे जल्द ही कोई साहसिक निर्णय लेंगे।
अब देखना दिलचस्प होगा कि नौकरशाही से तंग आ चुके मंत्री राधाकृष्ण किशोर बीजेपी की इस सलाह पर क्या प्रतिक्रिया देते हैं? क्या वे कोई बड़ा कदम उठाएंगे या पत्राचार का यह सिलसिला ऐसे ही चलता रहेगा?





