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सीएम और डीसी को ज्ञापन सौंपने पर फैसला : ऐतिहासिक पहाड़ी मंदिर में व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर हुई बैठक

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रांची:पहाड़ी मंदिर में व्याप्त भ्रष्टाचार, अव्यवस्था एवं स्थानीय लोगों की उपेक्षा को लेकर अजय तिर्की एवं उत्तम यादव के संयुक्त अध्यक्षता में रविवार को यात्री शेड परिसर में बैठक हुई. बैठक में सभी की सहमति से निर्णय लिया गया मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन एवं रांची उपायुक्त से मिलकर कमेटी द्वारा ज्ञापन सौंपा जाएगा. संगठन ने यह भी मांग की कि मंदिर परिसर में विभिन्न समितियों एवं मंडलों द्वारा अलग-अलग घेरे बनाकर होने वाली विशेष पूजा-पद्धति को समाप्त कर केवल एक अधिकृत एवं सार्वजनिक सरकारी पूजा व्यवस्था लागू की जाए. साथ ही पहाड़ी मंदिर विकास समिति एवं धार्मिक न्यास बोर्ड को भंग किया जाए. पहाड़ी मंदिर का चढ़ावा एवं आय ऑनलाइन करने की भी मांग की जाएगी.

उन्होंने कहा कि वर्ष 1992 में पहाड़ी मंदिर विकास समिति का गठन स्थानीय नागरिकों के आर्थिक सहयोग एवं सामाजिक प्रयासों से किया गया था. उस समय रांची के उपायुक्त को समिति का अध्यक्ष और एसडीएम को सचिव बनाया गया था. समिति में पहाड़ी मंदिर की चारों दिशाओं में निवास करने वाले स्थानीय लोगों को भी स्थान दिया गया था, ताकि मंदिर की व्यवस्था पारदर्शी एवं जनसहभागिता आधारित रहे.

उन्होंने बताया कि समय बीतने के साथ कुछ लोगों ने मंदिर पर एकाधिकार स्थापित करने की मंशा से स्थानीय नागरिकों को धीरे-धीरे समिति से बाहर कर दिया और मनमाने ढंग से कार्य करना प्रारंभ कर दिया. आज स्थिति यह है कि पहाड़ी बाबा की पूजा विभिन्न समितियों एवं मंडलों द्वारा अलग-अलग तरीके से की जाती है, जबकि सामान्य श्रद्धालुओं को उस समय पूजा-अर्चना की अनुमति तक नहीं दी जाती.

मंदिर परिसर में बड़े अक्षरों में “फोटो एवं वीडियो लेना निषिद्ध” लिखा गया है, परंतु प्रतिदिन कुछ विशेष लोगों एवं अधिकारियों को प्रसन्न करने के लिए पूजा के वीडियो, तस्वीरें एवं प्रसाद भेजे जाते हैं. जबकि,यह आस्था एवं समानता की भावना के विपरीत है.

उन्होंने आरोप लगाया कि देश का सबसे बड़ा राष्ट्रीय ध्वज स्थापित करने के नाम पर पहाड़ी मंदिर की मूल संरचना एवं सौंदर्य के साथ खिलवाड़ किया गया. मंदिर की संरचनात्मक व्यवस्था को क्षति पहुंचाई गई, परंतु इसकी कोई निष्पक्ष जांच आज तक नहीं हुई.

पहाड़ी मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए जाने वाले चढ़ावे का कोई पारदर्शी लेखा-जोखा तक उपलब्ध नहीं है. मंदिर की आय एवं व्यय की सार्वजनिक जानकारी नहीं दी जाती, जिससे आम लोगों के मन में अनेक प्रश्न उत्पन्न हो रहे हैं.