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बिहार विधान परिषद चुनाव : सभी निर्वाचित विधान पार्षदों को मिला सर्टिफिकेट,निर्विरोध जीत के राजनीतिक मायने

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पटना: बिहार विधान परिषद की10सीटों के लिए हुए चुनाव में सभी10उम्मीदवार निर्विरोध निर्वाचित हो गए हैं. नाम वापसी की अंतिम समय सीमा समाप्त होने के बाद सभी उम्मीदवारों को निर्वाचन प्रमाण पत्र (सर्टिफिकेट ऑफ इलेक्शन) प्रदान कर दिया गया. चूंकि जितनी सीटें रिक्त थी,उतने ही उम्मीदवार मैदान में थे,इसलिए मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी.

निर्वाचित होने वालों में भाजपा के संजय मयूख,पवन सिंह,अनिल ठाकुर और शीला पंडित,जदयू के निशांत कुमार,भारती मेहता,शिवरानी देवी प्रजापति और ललन प्रसाद,लोजपा (रामविलास) के अशरफ अंसारी तथा राजद के सुनील सिंह शामिल हैं.

इस निर्विरोध जीत के कई राजनीतिक मायने हैं. पहला,इससे साफ होता है कि सत्तारूढ़ एनडीए ने अपने सहयोगी दलों के साथ बेहतर तालमेल स्थापित करते हुए सीटों का बंटवारा किया. दूसरा,विपक्षी दलों ने भी संख्या बल को देखते हुए अतिरिक्त उम्मीदवार उतारने से परहेज किया,जिससे अनावश्यक चुनावी मुकाबले की स्थिति नहीं बनी.

विधान परिषद के लिए निर्वाचित होने का अर्थ है कि अब ये सभी नेता बिहार विधानमंडल के उच्च सदन के सदस्य के रूप में कानून निर्माण,नीतिगत बहस और जनहित से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाने का अधिकार प्राप्त करेंगे. परिषद के सदस्य सरकार की नीतियों की समीक्षा करने और विभिन्न विधेयकों पर अपनी राय रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं.

राजनीतिक दृष्टि से यह परिणाम आगामी चुनाव से पहले एनडीए की संगठनात्मक मजबूती का संकेत माना जा रहा है. वहीं,राजद द्वारा सुनील सिंह को दोबारा सदन भेजना पार्टी नेतृत्व के उनके प्रति विश्वास को दर्शाता है. कुल मिलाकर,यह निर्विरोध निर्वाचन बिहार की वर्तमान राजनीतिक गणित और दलों के बीच व्यवहारिक समझ का प्रतिबिंब माना जा रहा है.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--