BIHAR NEWS : प्री-मैच्योर बेटी की आंखों की रोशनी बची, IGIMS में लेजर इलाज से मां के चेहरे पर लौटी मुस्कान
पटना :मरीजों के बेहतर इलाज से प्रसिद्ध इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में पांच नयी व्यवस्था का शुभारंभ बुधवार को किया गया. अस्पताल में अपनी नवजात बच्ची के इलाज के लिए आयी दरभंगा की सपना कुमार ने कहा कि मेरी बेटी का जन्म प्री मैच्योर पीरियड में ही हो गया. जिसके कारण मेरी बच्ची को आंख व कान संबंधित समस्या से जुझना पड़ रहा था. आइजीआइएमएस में 17 दिन पहले मैंने अपनी बेटी का उपचार शुरू करवाया. अब मेरी बेटी पूरी तरह स्वास्थ्य है. लेजर के जरिये आंख का सटीक इलाज संभव हो पाया है. जिसके लिए मैं स्वास्थ्य मंत्री का धन्यवाद करती हूं.

वहीं अस्पताल के उपनिदेशक सह क्षेत्रीय चक्षु संस्थान के प्रमुख डॉ. विभूति प्रसन्न सिन्हा ने कहा कि क्षेत्रीय चक्षु संस्थान में 06 मॉडयूलर ऑपरेशन थियेटर, जिसमें दो विट्रो रेटीना, कॉर्निया & कैटरेक्ट के लिए दो-दो व ग्लूकोमा, ऑकुलोप्लास्टी संक्रमित आँखों से बचाव के लिए मॉडयूलर ओटी बनाया गया है. इसका कुल लागत 10.25 करोड़ है, जिसमें भारत सरकार का 60 प्रतिशत अंशदान व राज्य सरकार का 40 प्रतिशत है. इसके अलावा अस्पताल में सीसीटीवी कंट्रोल रूम एंड कमांड सेंटर का निर्माण किया गया है. इसके कार्यन्वयन होने से मरीजों की निर्भरता देश के अन्य भागों में कम हो जायेगी. यह अपने तरह का पूर्वी भारत क्षेत्र का एक गौरवशाली संस्थान होगा. इसमें आँखों के ऑपरेशन के लिए जो कमाईक्रोस्कोप लगे हैं. उनकी कीमत एक-एक करोड़ की होगी और मॉडयूलर ओटी की सुविधा होने से आँखों का संक्रमण कम होगा. साथ ही संस्थान परिसर के भवनों में लगे सभी सीसीटीवी कैमरों को एक केंद्रीय कंट्रोल रुम से जोड़कर 24*7 निगरानी की व्यवस्था की गयी है. किसी भी आपात स्थिति या संदिग्ध गतिविधि की जानकारी मिलने पर तुरंत कार्रवाई संभव होगी. उच्च गुणवत्ता वाली वीडियो रिकॉर्डिंग के कारण घटनाओं की जांच, सत्यापन व आवश्यक साक्ष्य प्राप्त करना आसान होगा. सभी वीडियो रिकॉर्डिंग सुरक्षित रुप से संग्रहित रहेंगे और आवश्यकता पड़ने पर आसानी से उपलब्ध करा सकेंगे. यह आधुनिक प्रणाली संस्थान परिसर में सुरक्षित वातावरण, बेहतर प्रबंधन पारदर्शिता और निर्बाध स्वास्थ्य सेवाएं सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी. इस व्यवस्था को लागू करने में कुल लागत 08.25 करोड़ खर्च किया गया है.

गंभीर मरीजों को सटीक उपचार के लिए 20 बेड का क्लोज्ड इंटेसिव केयर यूनिट
वहीं अस्पताल में क्रिटिकल केयर मेडिसीन यानि सीसीएम यूनिट का निर्माण किया गया है. आइजीआइएमएस में 20 बेड का क्लोज्ड इंटेसिव केयर यूनिट (आईसीयू) गंभीर रुप से बीमार चिकित्सा,शल्य चिकित्सा (मेडिकल व सर्जिकल) रोगियों को उच्च स्तरीय बहुविषयक (मल्टीडिसिप्लिनरी) गहन चिकित्सा सेवा प्रदान करता है. यह विशेष रुप से गैस्ट्रोएंटरोलॉजी,नेफ्रोलॉजी व केंद्रीय तंत्रिका तंत्र (सेंट्रल नर्वस सिस्टम) से संबंधित गंभीर रोगियों के उपचार में विशेषज्ञता रखता है. यूनिट में बहु-अंग (मल्टीऑर्गन) विफलता वाले रोगियों का उपचार किया जाता है और जटिल श्वसन विफलता (रिफ्रैक्ट्री हाइपोक्सेमिया) के लिए प्रोन वैटिलेशन व हाई-फ्रीक्वेंसी ऑसिलेटरी वेंटिलेशन (हफोव) जैसी उन्नत जीवनरक्षक तकनीकों का प्रशिक्षण दिया जाता है.
मरीजों को डायलिसिस के लिए नहीं करना होगा लंबा इंतजार 16 बेड वाले नये डायलिसिस मशीनों का उद्घाटन
आइजीआइएमएस में अब मरीजों को डायलिसिस के लिए लंबा करने की जरूरत नहीं होगी. अस्पताल के नेफ्रोलॉजी विभाग के अंतर्गत 16 बेड वाले नए डायलिसिस सेंटर का शुभारंभ व विस्तार किया गया है. इससे नेफ्रोलॉजी विभाग को बढ़ते डायलिसिस भार का प्रभावी ढंग से प्रबंधन करने में काफी मदद मिलेगी साथ ही जरुरतमंद मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देखभाल भी उपलब्ध कराई जा सकेगी. यह भवन व मशीन भी भारत सरकार और बिहार सरकार के वित्तीय सहायता से करीब 8 करोड़ की लागत से बना है.
मरीजों व परिजनों को हरित व सकारात्मक वातावरण के लिए हर्बल गार्डन स्थापित
अस्पताल में मरीजों व उनके परिजनों को हरित व सकारात्मक वातावरण प्रदान करने के लिए हर्बल गार्डेन स्थापित किया गया है. इससे अस्पताल परिसर में हरित व सकारात्मक वातावरण का निर्माण होगा और मरीजों को मानसिक सुकून व स्वास्थ्यवर्धक वातावरण प्राप्त होगा. हर्बल गार्डन के माध्यम से अलग-अलग औषधीय पौधों के महत्व के प्रति लोगों में जागरुकता भी बढ़ेगी.
स्वास्थ्य मंत्री ने गुरुवार को आईजीआईएमएस में सुविधाओं का किया उद्घाटन
राजधानी के इंदिरा गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान में स्वास्थ्य मंत्री,निशांत कुमार के करकमलों द्वारा निम्नलिखित सुविधाओं का उदघाटन किया गया. इस अवसर पर विधायक,दीघा-सह-मुख्य सचेतक,डॉ़ संजीव चौरसीया,व स्वास्थ्य विभाग,बिहार सरकार के सचिव कुमार रवि उपस्थापित थे. इस शुभ अवसर पर मंत्री जी ने निम्न विभागों का उद्घाटन के बाद अन्य महत्वपूर्ण बिंदुओं का जायजा लिया.
उपचार के बाद मरीजों ने कहा अब बेहतर इलाज के लिए बाहर जाने की जरूरत नहीं
1: कई सालों से मुझे पैरालाइसिस संबंधित समस्या थी. इस बीमारी के इलाज के लिए निजी अस्पताल में करीब 20 लाख से अधिक खर्च हो चुके हैं. आइजीआईएमएस में मेरा सटीक उपचार किया जा रहा है. आइजीआईएमएस में जांच के बाद भी असल बीमारी का पता चल सका है. जिससे मेरा सटीक उपचार किया जा रहा है- आयुष कुमार, बेगूसराय
2: चार साल से मैं आइजीआइएमएस में डायलिसिस करवा रहा हूं. निजी अस्पताल में इसके लिए मोटी रकम वसूली जाती है. लेकिन आइजीआइएमएस में आसानी से मेरा इलाज हो रहा है. जिससे मैं बिल्कूल स्वस्थ हूं–अरविंद कुमार,
3: तीन महीने से मेरा डायलिसिस चल रहा है. अपनी बीमारी से लड़ने के लिए सप्ताह में तीन बार डायलिसिस प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है. राजधानी के आइजीआइएमएस अस्तपाल में आसानी व पूरी संतुष्टी के साथ यह संभव हो पाया है. जिसके लिए मैं बिहार सरकार का आभारी हूं- वीर कुमार, रोहतास





