BIHAR NEWS : मुख्य सचिव की अध्यक्षता में BIRSAC के कार्यों की हुई समीक्षा

Edited By:  |
bihar news bihar news

पटना: राज्य के मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत की अध्यक्षता में बुधवार को बिहार रिमोट सेंसिंग एप्लीकेशन सेंटर (BIRSAC)द्वारा संचालित परियोजनाओं की समीक्षा बैठक आयोजित की गई. बैठक में विकास आयुक्त मिहिर कुमार सिंह,विज्ञान,प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव डॉ. प्रतिमा तथा विभिन्न विभागों के अपर मुख्य सचिव,प्रधान सचिव एवं सचिव उपस्थित रहे.

बैठक में विज्ञान,प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा विभाग की सचिव द्वारा प्रस्तुतीकरण के माध्यम सेBIRSACकी वर्तमान गतिविधियों की जानकारी दी गई. बताया गया किBIRSACराज्य में प्राकृतिक संसाधनों एवं विभागीय परिसंपत्तियों का जियो-स्पैशियल इन्वेंट्री निर्माण,राज्य स्तरीय योजना एवं विकास कार्यों के लिए स्पैशियल डेटा उपलब्ध कराने,आपदा निगरानी एवं प्रबंधन तथा ग्राम स्तर पर जियो-स्पैशियल डेटाबेस के निर्माण जैसे कार्यों में सक्रिय भूमिका निभा रहा है.

समीक्षा के दौरान मुख्य सचिव ने सभी विभागों कोBIRSACकी जियो-स्पैशियल सेवाओं का व्यवस्थित एवं व्यापक उपयोग सुनिश्चित करने का निर्देश दिया. इस क्रम में राज्य सरकार कीBIRSACजियो-स्पैशियल सेवा उपयोग नीति की जानकारी दी गई,जिसके तहत ₹50 करोड़ अथवा उससे अधिक लागत की अवसंरचना परियोजनाओं केDPRमें जियो-स्पैशियल एनालिटिक्स को अनिवार्य ऐड-ऑन के रूप में शामिल किया गया है,जिसके अंतर्गत संबंधित विभाग द्वाराBIRSACकी सेवाओं के उपयोग हेतु कुल परियोजना लागत का मात्र 0.25 प्रतिशत शुल्क देय होगा;यह न्यूनतम शुल्क संस्थान की वित्तीय क्षमता को सुदृढ़ करने के साथ-साथ राज्य पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ डाले बिना पूरी व्यवस्था को आत्मनिर्भर बनाएगा.

बैठक में मुख्य सचिव द्वाराBIRSACकी जियो-स्पैशियल क्षमताओं को राज्य की अवसंरचना योजना प्रक्रिया से औपचारिक रूप से जोड़ने पर विशेष बल दिया गया. उन्होंने स्पष्ट किया कि राज्य में अवसंरचना विकास को वैज्ञानिक,डेटा-आधारित एवं भविष्य उन्मुख बनाने के लिएBIRSACकी सेवाओं का उपयोग अब वैकल्पिक नहीं,बल्कि आवश्यक है. सभी विभागों को निर्देश दिया गया कि योजना निर्माण के स्तर पर ही जियो-स्पैशियल इनपुट को सम्मिलित किया जाए,ताकि बाद के चरणों में तकनीकी,प्रशासनिक एवं भूमि संबंधी बाधाओं से बचा जा सके.

बैठक में मुख्य सचिव द्वारा स्पष्ट किया गया कि अब ₹50 करोड़ से अधिक लागत की सभी अवसंरचना परियोजनाओं केDPRको वित्तीय स्वीकृति दिए जाने से पूर्वBIRSACसे तकनीकी अनुमोदन प्राप्त करना अनिवार्य होगा. सभी विभागों को इस व्यवस्था का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया.

बैठक में विभागीय सचिव द्वारा बताया गया कि भास्कराचार्य अंतरिक्ष अनुप्रयोग एवं भू-सूचना विज्ञान संस्थान (BISAG-N)के सहयोग से अवसंरचना परियोजनाओं के लिएDPRनिर्माण हेतु एक डिजिटल टूल विकसित किया जा रहा है. यह टूलPMगति शक्ति पोर्टल पर उपलब्ध विभिन्न विभागीय डेटा का उपयोग कर परियोजनाओं की योजना,अलाइनमेंट एवं आकलन में सहायता करेगा औरDPRनिर्माण को अधिक सटीक बनाएगा.

उपस्थित विभागों ने सहमति व्यक्त की है कि इस व्यवस्था से कार्यों की पुनरावृत्ति पर रोक लगेगी,लागत में बचत होगी तथा सड़कों के अलाइनमेंट जैसे मामलों में भूमि,वन,क्रॉस-ड्रेनेज जैसी संभावित बाधाओं की पहचान प्रारंभिक चरण में ही संभव हो सकेगी. यह प्रणाली आपदा प्रबंधन एवं पराली जलाने जैसी गतिविधियों की निगरानी में भी सहायक होगी. इस व्यवस्था का लाभ सभी विभागों द्वारा आवश्कतानुसार उठाया जा सकेगा.

मुख्य सचिव ने सभी विभागों को पोर्टल पर कार्यों की प्रगति से संबंधित अद्यतन जानकारी नियमित रूप से उपलब्ध कराने तथा अंतर-विभागीय समन्वय को और सुदृढ़ करने का निर्देश दिया. उन्होंने BIRSAC द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना करते हुए संस्थान को तकनीकी एवं मानव संसाधन के स्तर पर और सशक्त बनाने पर बल दिया.