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श्रावण मास 2026 : महावीर मंदिर पटना में इस बार चार शिवलिंग पर होगी रूद्राभिषेक कराने की सुविधा

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पटना : इस साल सावन 30 जुलाई 2026 से शुरू हो रहा है और 28 अगस्त तक चलेगा. इस पवित्र महीने में चार सोमवार पड़ेंगे, जिसकी शुरूआत तीन अगस्त (सोमवार) से होगी. इस वर्ष पटना जंक्शन स्थित महावीर मंदिर में चार शिवलिंग पर रूद्राभिषेक कराने की व्यवस्था रखी गई है. सावन में रूद्राभिषेक के लिए भक्तों की गजब की भीड़ है. रूद्राभिषेक कराने वाले भक्तों के सहूलियत के लिए सारी व्यवस्था रखी गई है. इससे उन्हें किसी तरह की कोई परेशानी न हो. चार में तीन शिवलिंग पर रूद्राभिषेक सुबह पांच बजे से शुरू होगा जबकि महावीर जी के बगल वाले शिवलिंग पर रूद्राभिषेक दोपहर 12 बजे से शुरू होगा. इस शिवलिंग पर भक्त सुबह पांच बजे से सुबह 10 बजे तक जल चढ़ा सकते हैं.

पूजा की सामग्री मंदिर से मिलेगी..

बुकिंग कराने के बाद भक्त को किसी तरह की कोई सामग्री लाने की जरूरत नहीं होगी. पूजा की सभी सामग्री मंदिर की ओर से उपलब्ध कराई जाएगी. भक्त सिर्फ बुकिंग के अनुसार समय पर मंदिर पहुंच जाएं. जिससे समय पर रूद्राभिषेक शुरू हो जाय. सावन में मंदिर के अंदर स्थित चार शिवलिंग मंडप को फूलों से सजाया जायगा. महत्वपूर्ण है कि सभी शिव मंडप में एसी की सुविधा बहाल की गई है. जिससे भक्तों को रूद्राभिषेक कराने के दौरान गर्मी से निजात मिल सके.

श्री महावीर स्थान न्यास समिति के सचिव सायण कुणाल का कहना है कि सावन के दौरान महावीर मंदिर में रूद्राभिषेक कराने आने वाले भक्तों को किसी तरह की कोई परेशानी न हो, इसको ध्यान रखने का निर्देश दिया गया है. विशेषकर गर्मी में रूद्राभिषेक कराने वाले भक्त को गर्मी से राहत दिलाने के लिए सभी शिव मंडप में एसी की व्यवस्था कर दी गई है. जिससे भक्त आराम से पूजा-अर्चना कर सके.

पूजा-पाठ के लिए श्रावण सर्वश्रेष्ठ महीना...

वैसे सावन महीना शंकर भगवान की कृपा पाने और पूजा-अर्चना करने के लिए उत्तम संयोग है. स्कन्द पुराण से लेकर वायु पुराण तक प्रत्येक प्रमुख ग्रंथों में श्रावण को सर्वश्रेष्ठ मास घोषित किया है. इन ग्रंथों में न सिर्फ व्रत और पूजा की विधि बताई गई है,बल्कि यह स्पष्ट किया गया है कि इस महीने में अर्पित की गई जल की एक बूंद भी भगवान शिव को अत्यंत प्रसन्न करती है.

शास्त्र के अनुसार इस पावन महीने को क्या कहते हैं....

स्कन्द पुराण....श्रावण महीने में काशी में निवास करके भगवान शिव की पूजा करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है. सावन के सोमवार का व्रत और जलाभिषेक का सर्वाधिक वर्णन इसी ग्रंथ में मिलता है.

शिवपुराण....विद्येश्वरसंहिता में 12 महीनों में श्रावण को भगवान शिव का सर्वप्रिय महीना कहा गया है. बेलपत्र,जल और दुग्ध अभिषेक का फल इसी संहिता में वर्णित है.

लिंग पुराण....

श्रावण महीने में प्रतिदिन शिवलिंग पर जलधारा चढ़ाने से सौ यज्ञों के बराबर पुण्य की प्राप्ति होती है.

श्रीमद्भागवतम (द्वादश स्कन्द)....श्रावण मास में की गई उपासना का फल अन्य किसी महीने में संभव नहीं.

वायु पुराण....श्रावण महीने में नदी स्नान,दान और शिव पूजन को मोक्षदायक बताया गया है.

पटना से अंकिता की रिपोर्ट--