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रिम्स में नियुक्ति घोटाले का आरोप : डायरेक्टर के बेटे की बहाली पर उठ रहे सवाल

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रांची:सूबे के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल यानीरिम्समें नियुक्ति को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. संस्थान के निदेशक डॉ.राजकुमार के बेटेऋषभ कुमारकीसीनियर रेजिडेंट/ट्यूटरपद पर नियुक्ति ने पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े कर दिए हैं. 28 मार्च को हुए इंटरव्यू के आधार पर उनकी बहाली की गई है, अब उन्हें हर महीने करीब 1.25 लाख रुपये वेतन मिलेगा.

बेटे के लिए बनाया गया नया पद?

ऋषभ कुमार की नियुक्ति को लेकर सबसे बड़ा आरोप यह है कि उनके लिए खास तौर पर पद सृजित किया गया. बताया जा रहा है कि एनाटॉमी विभाग की एक सीट को घटाकरमास्टर्स इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन(एमएचए) विभाग में ट्रांसफर कर दिया गया. एनाटॉमी विभाग में जहां पहले 05 सीटें थीं, अब उन्हें घटाकर 04 कर दिया गया है.

योग्यता के मापदंड भी बने ‘फिट टू सूट’?

19 मार्च को जारी विज्ञापन में ऐसे मापदंड तय किए गए, ताकि केवल ऋषभ कुमार ही पात्र साबित हों.एमडी इन हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन या विशेष अनुभव जैसी शर्तें रखी गईं. जिससे उनके बैच के अन्य उम्मीदवार स्वतः बाहर हो गए.

सरकार ने नियुक्ति पर लगाई रोक

रिम्स में नियुक्ति मामले ने जब तूल पकड़ लिया तो स्वास्थ्य विभाग ने तत्काल प्रभाव से नियुक्ति पर रोक लगा दी. सरकार ने इसे नियमों के अनुरूप नहीं मानते हुए उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं. मामला अब शासी परिषद में रखा जाएगा और स्वास्थ्य मंत्री खुद इसकी जांच करेंगे.

पहले भी ‘सीट एडजस्टमेंट’ का खेल?

बताया जा रहा है कि छह महीने पहले भी एमएचए विभाग में नियुक्ति के लिए दूसरे विभागों से सीट उधार ली गई थी.पहले पीएमआर विभाग से सीट ली गई, अब एनाटॉमी से सीट काटकर एमएचए में जोड़ी गई, जिससे पूरे सिस्टम की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं.

नियमों की अनदेखी का आरोप

सबसे गंभीर सवाल यह है कि एमएचएको नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) से मान्यता नहीं है, जबकि एनाटॉमी विभाग पूरी तरह NMC गाइडलाइन के तहत आता है. इसके बावजूद सीटों में फेरबदल कर नियमों को नजरअंदाज करने का आरोप लग रहा है.


रांची से संवाददाता राहुल कुमार पांडेय की रिपोर्ट