पटना हाईकोर्ट ने कर्नाटक DGP से मांगा जवाब : वैशाली के 2 युवकों को बिना ट्रांजिट रिमांड के लेकर गई थी पुलिस,मुख्य सचिव को भी नोटिस
पटना:बिहार के वैशाली जिले से दो युवकों को कथित तौर पर हिरासत में लेकर बिना ट्रांजिट रिमांड के कर्नाटक ले जाने के मामले में पटना हाईकोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. अदालत ने कर्नाटक सरकार के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक को नोटिस जारी करते हुए पूरे मामले पर विस्तृत जवाब मांगा है.
न्यायमूर्ति राजीव रंजन प्रसाद और न्यायमूर्ति सुनील दत्ता मिश्रा की पीठ के समक्ष दायर याचिका में आरोप लगाया गया कि कर्नाटक पुलिस की एक टीम 12 अगस्त 2026 को वैशाली पहुंची थी। टीम ने आलोक उर्फ अंबानी और अमन कुमार को कथित रूप से हिरासत में लिया और उन्हें कर्नाटक ले गई.
याचिकाकर्ता शत्रुघ्न प्रसाद सिंह की ओर से अदालत को बताया गया कि युवकों की गिरफ्तारी की जानकारी स्थानीय थाना पुलिस को नहीं दी गई. साथ ही,बिहार से बाहर ले जाने से पहले सक्षम अदालत से ट्रांजिट रिमांड भी प्राप्त नहीं किया गया. याचिका में इसे गिरफ्तारी और हिरासत से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के निर्धारित कानूनी मानकों का उल्लंघन बताया गया है.
हाईकोर्ट ने मामले में बिहार और कर्नाटक सरकार के संबंधित अधिकारियों से विस्तृत हलफनामा दाखिल करने को कहा है. अदालत ने यह स्पष्ट करने को कहा है कि दोनों युवकों को किस आधार पर हिरासत में लिया गया,उन्हें किस कानूनी प्रक्रिया के तहत कर्नाटक ले जाया गया और वर्तमान में उनकी स्थिति क्या है.
अदालत ने यह भी जानना चाहा है कि गिरफ्तारी के बाद निर्धारित न्यायिक प्रक्रिया का पालन किया गया या नहीं. मामले की अगली सुनवाई 16 सितंबर 2026 को होगी. हाईकोर्ट के इस रुख के बाद कर्नाटक पुलिस की कार्रवाई और दोनों युवकों की गिरफ्तारी की कानूनी प्रक्रिया पर सवाल खड़े हो गए हैं.





