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पटना HC में बिहार के आम उत्पादकों का मामला : कोर्ट ने सरकार से किसानों को विशेष प्रशिक्षण हेतु विस्तृत रिपोर्ट देने का दिया निर्देश

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Patna : पटना हाईकोर्ट में राज्य के आम उत्पादकों को उनके फसल की सही कीमत नहीं मिलने और विदेशों में इसके निर्यात के लिए आधारभूत संरचना उपलब्ध नहीं होने के मामले पर सुनवाई हुई. चीफ जस्टिस मीनाक्षी मदन राय की खंडपीठ ने अधिवक्ता डॉ. मौर्य विजय चंद्र की जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार से आम उत्पादक किसानों के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम के बारे में विस्तृत रिपोर्ट तलब किया है. मामले पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी.

पिछली सुनवाई में कोर्ट ने राज्य सरकार को विस्तृत जिलेवार हलफ़नामा दायर कर कार्रवाईयों का रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया था. राज्य सरकार की ओर से इस सम्बन्ध में जवाब दायर किया गया था,लेकिन कोर्ट संतुष्ट नहीं था.

इसमें आम उत्पादकों के लिए की जा रही कार्रवाईयों का ब्यौरा दिया गया था. इस बार कोर्ट ने आम उत्पादन के बारे में जिलेवार रिपोर्ट राज्य सरकार से तलब किया था.

पूर्व की सुनवाई में जो ब्यौरा दिया गया था,उसमें आम उत्पादकों के लाभ के लिए प्रशिक्षण,बेहतर व वैज्ञानिक प्रबंधन से आम के फसल को बढ़िया किस्मों के लिए तैयार करने के तरीके बताने की बात कही गयी थी.

राज्य सरकार ने अपने जवाब में बताया था कि आम के फसलों की पैकेजिंग,विदेशों में निर्यात व किसानों को उनके फसलों की अच्छी कीमत प्राप्त हो,इसके लिए कार्रवाई और व्यवस्था की जा रही है.

कोर्ट ने राज्य सरकार को ये बताने को कहा था कि इस वर्ष आम उत्पादन करने वाले किसानों के प्रशिक्षण की क्या व्यवस्था की गयी. आधारभूत संरचना के विकास के लिए अब तक क्या कार्रवाई की गयी है.

याचिकाकर्ता अधिवक्ता डॉ. मौर्य विजय चंद्र ने कोर्ट को बताया था कि राज्य के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर बढिया किस्म के आमों का उत्पादन होता है. लेकिन आम उत्पादन करने वाले किसानों को उचित मूल्य नहीं मिल रहा है.

उन्होंने कोर्ट को बताया था कि राज्य सरकार की उपेक्षा व उदासीनता के कारण आम उत्पादकों को काफी नुकसान हो रहा है. उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भारतीय,विशेषकर बिहार के आमों की काफी मांग होती है.

राज्य में उत्तम श्रेणी का आम का उत्पादन होता है,लेकिन उन्हें लागत भी मिलना भी कठिन होता है. उन्होंने कोर्ट को बताया था कि इन आमों को विदेशों में निर्यात के लिए आधारभूत संरचना का काफी अभाव है.

आम को विभिन्न राज्यों व विदेशों में भेजने की व्यवस्था की जाये,तो आम उत्पादकों को न केवल आम का अच्छा मूल्य मिलेगा, बल्कि विदेशी मुद्रा भी अर्जित किया जा सकता है. इस मामले पर अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद की जाएगी.