कृष्ण जन्माष्टमी की धूम : मथुरा के बाद बेगूसराय के तेघड़ा में लगता है सबसे बड़ा मेला..चेचक के प्रकोप के बाद 1928 में हुई थी शुरूआत..

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Begusarai:-जनमाष्टमी के अवसर पर मधुरा के बाद बिहार के बेगूसराय जिले के तेघड़ा में सबसे बड़ा मेला लगता है.दो साल के कोरोना बंदी के बाद इस साल धूमधाम से जन्माष्टमी के अवसर पर मेला का आयोजन किया जा रहा है और इसकी तैयारी पूरी कर ली गई है.आज रात जन्माष्टमी के साथ ही भक्तों के आने का सिलसिला शुरू हो जाएगा.

बताते चलें कि बेगूसराय के तेघड़ा में जन्माष्टमी के अवसर पर पांच दिनों तक मेला लगता है.यहां मेले की शुरूआत आंग्रेजो के जमाने से 1928 से ही चली आ रही है.इस आयोजन के पीछे कई तरह की कथाएं भी प्रचलित हैं।एक कथा के अनुसार 1927 में तेघड़ा इलाके में चेचक का प्रकोप आया था.उसी वक्त एक कीर्तन मंडली तेघड़ा पंहुचा और उसने यहां भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा लगाकर मेले का आयोजन करने पर चेचक का प्रकोप खत्म होने की कामना की थी ,जिसके बाद चचेक का असर कम हुआ था.उसके बाद से 1928 में पहली बार एक मंडप से श्रीकृष्ण मेले का आयोजन किया गया जो अब 14 मंडप तक फ़ैल गया है।

यहां हर साल श्री कृष्ण जन्माष्टमी मेले का आयोजन होते आया है। पिछले दो साल से कोरोना की वजह से मेले का आयोजन नहीं हो रहा था लेकिन इस बार फिर पुरे धुम धाम से मेले का आयोजन किया गया है।यह मेला पांच किलोमीटर में फैला जिसमें 14 पंडाल बनाये गये है। कहा जाता है कि मथुरा के बाद सबसे बड़ा मेला तेघड़ा में ही लगता है। इस मेले में बिहार के कई जिलों के लोग मेला देखने आते है। इस मेले में व्यापक स्तर पर सूरक्षा व्यवस्था की गयी है। मेला की तैयारी पूरी कर ली गई है, इस मेले में भव्य पंडाल के साथ-साथ भगवान श्रीकृष्ण की अलग अलग तरह आकर्षक प्रतिमा बनाई गई है। वहीं लोगों के मनोरंजन के लिए झुला भी लगाया गया है।