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झारखंड राज्य महिला आयोग 6 साल से ठप : महिलाओं की शिकायतों की नहीं हो रही सुनवाई, आयोग में 5200 से अधिक मामले लंबित

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रांची : झारखंड में महिलाएं घरेलू अत्याचार और मानसिक प्रताड़ना का शिकार हो रही हैं. वे न्याय के लिए भटक रही हैं. घरेलू अत्याचार और मानसिक प्रताड़ना की शिकार महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए बनाया गया राज्य महिला आयोग भी इन दिनों फंक्शनल नहीं है.

राजधानी रांची की एक महिला ने बताया कि मेरे सास-ससुर सोशल मीडिया के माध्यम से मुझे और मेरे पति समेत मेरे मायके वालों को समाज में बदनाम कर रहे हैं. इस कारण मेरी बदनामी हो रही है. लोग मुझे गलत नजरों से देख रहे हैं. मैंने राज्य महिला आयोग के समक्ष लिखित शिकायत कर अपने सास-ससुर और बड़ी ननद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर सख्त कार्रवाई करने की मांग की है. वहीं, पूर्वी सिंहभूम जिले की एक महिला ने राज्य महिला आयोग के समक्ष लिखित शिकायत दर्ज कराकर दुकान मालिक पर प्रताड़ित करने का आरोप लगाया है. संबंधित महिला ने आवेदन के माध्यम से कहा है कि मई 2026 में दुकान मालिक ने भद्दी-भद्दी गालियां देकर दुकान खाली करने की बात की. सिर्फ यही नहीं, दुकान में रखा सामान भी इधर-उधर फेंक दिया. इसके बाद बाल पकड़कर गर्दन पर कैंची घुसाने लगा. इस क्रम में गले से सोने का चेन भी खींच लिया और जान मारने की धमकी भी दी. संबंधित महिला ने राज्य महिला आयोग के समक्ष लिखित शिकायत कर इस मामले की जांच कराकर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि वह भय मुक्त होकर अपना व्यापार कर सके और इज्जत के साथ समाज में रह सके.

अब सवाल यह है कि जब राज्य महिला आयोग फंक्शनल ही नहीं है तो इन पीड़ित महिलाओं की फरियाद सुनेगा कौन? एचईसी धुर्वा स्थित आयोग के कार्यालय में शिकायतों से संबंधित फाइलों की ढेर लगी हुई है. आए दिन महिलाओं की शिकायत से संबंधित लिखित आवेदन सिर्फ रिसीव किए जा रहे हैं. आयोग कार्यालय में इन पीड़ित महिलाओं की फरियाद सुनने वाला कोई नहीं है. राज्य महिला आयोग पिछले 06 साल से ठप है. 06 जून 2020 को राज्य महिला आयोग की तत्कालीन अध्यक्ष कल्याणी शरण और उनकी पांच सदस्यीय टीम का कार्यकाल समाप्त हुआ था. उसके बाद 07 जून 2020 से लेकर अब तक राज्य महिला आयोग अध्यक्ष और सदस्य विहीन है. महिलाओं की शिकायतों की सुनवाई पूरी तरह बंद है. आयोग में 5200 से अधिक मामले लंबित हैं, जिसमें लगभग तीन हजार नए मामले शामिल हैं.

रांची से राजेश पाठक की रिपोर्ट--