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JHARKHAND NEWS : गढ़वा में लूट का नया और खौफनाक तरीका: न हथियार, न खौफ... बातों के जाल और 'सम्मोहन' से हो रही लाखों की चोरी

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झारखंड के गढ़वा में लुटेरों ने लूट का तरीका ही बदल दिया है। अब न पिस्टल दिखा रहे हैं, न चाकू... बल्कि बातों के जाल और कथित सम्मोहन के जरिए लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। गढ़वा शहर में एक के बाद एक ऐसी घटनाओं ने पुलिस की कार्यशैली पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब तक करीब पांच मामले सामने आ चुके हैं और लाखों रुपये के जेवरात और सामान की लूट हो चुकी है। हैरानी की बात ये है कि कई घटनाएं सीसीटीवी में कैद होने के बावजूद पुलिस के हाथ अब तक खाली हैं।गढ़वा शहर में इन दिनों लूट की घटनाओं का एक नया और हैरान करने वाला पैटर्न सामने आया है। लुटेरे हथियारों का इस्तेमाल किए बिना ही लोगों को अपनी बातों में ऐसा उलझा रहे हैं कि पीड़ित को कुछ समझ में आने से पहले ही वह अपना कीमती सामान उनके हवाले कर देता है। हाल के दिनों में जिला मुख्यालय में एक जैसे तरीके से चार वारदात सामने आ चुकी हैं। खास बात यह है कि इनमें से कई घटनाएं सीसीटीवी कैमरे में भी कैद हुई हैं। चार दिन पहले की ही घटना देखिए। महिला सुनीता देवी मेन रोड से अपने घर जा रही थीं। इसी दौरान एक व्यक्ति ने उनसे महिला डॉक्टर के बारे में बातचीत शुरू की। बातचीत का सिलसिला आगे बढ़ा और देखते ही देखते महिला ऐसी स्थिति में पहुंच गईं कि उन्होंने अपने शरीर पर पहने करीब पांच लाख रुपये के सोने के गहने खुद उतारकर लुटेरों को सौंप दिए। बाद में जब उन्हें अहसास हुआ तो उनके होश उड़ गए।

इसी तरह व्यवसायी नंद कुमार गुप्ता की दुकान पर एक व्यक्ति मंदिर जाने की बात कहकर खुल्ले पैसे मांगने पहुंचा। बातचीत के दौरान व्यवसायी को कुछ ऐसा महसूस हुआ कि कुछ देर बाद जब उन्हें होश आया तो उनके हाथ से सोने के आभूषण गायब थे। इस घटना में करीब एक लाख रुपये के नुकसान की बात सामने आई है। इतना ही नहीं, फरवरी महीने में शहर की एक स्वर्ण दुकान पर पहुंचे दो युवकों ने स्वर्ण व्यवसायी को बातों में ऐसा उलझाया कि कुछ ही सेकंड में करीब 30 लाख रुपये के गहने लेकर फरार हो गए। वहीं, हाल के दिनों में एक कपड़ा व्यवसायी भी इसी तरह की कोशिश का शिकार होते-होते बच गया। जबकि एक व्यवसाई ने कहा की मेरे दुकान मे आकर मेरे सामने एक लाख ले गया लेकिन मै कुछ नहीं कर पाया। इन घटनाओं में पीड़ितों ने सदर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है, लेकिन समय बीतने के साथ अब पीड़ितों का पुलिस से भरोसा भी डगमगाने लगा है। पीड़ितों का आरोप है कि शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस जांच का भरोसा तो देती है, लेकिन अब तक न लुटेरे पकड़े गए और न ही लूटा गया सामान बरामद हुआ।-लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने गढ़वा पुलिस के सामने बड़ी चुनौती खड़ी कर दी है।

पुलिस का कहना है कि सभी मामलों की प्राथमिकी के आधार पर जांच की जा रही है और घटनाओं के पैटर्न को जोड़कर लुटेरों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। गढ़वा एसडीपीओ ने आम लोगो से अपील है की अंजान व्यक्ति से दूर रहे क्योंकि कथित सम्मोहन विधि से ये लोग घटना को अंजाम दे रहे है उनसे वार्ता न करें।वहीं, लगातार एक जैसे तरीके से हो रही इन वारदातों को लेकर झारखंड के पूर्व डीजीपी और पलामू सांसद बीडी राम ने भी पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा है कि जब अपराधियों ने लूट का तरीका बदल दिया है, तो पुलिस को भी अपनी जांच और कार्रवाई का तरीका बदलना होगा।अब सवाल सिर्फ लाखों की लूट का नहीं है... सवाल ये है कि आखिर सीसीटीवी में चेहरे कैद होने के बावजूद ये कथित हाईटेक लुटेरे पुलिस की पकड़ से बाहर कैसे हैं?