JHARKHAND NEWS : परीक्षाएं लंबित और खाली कुर्सी: क्या झारखंड के युवाओं का इंतजार कभी खत्म होगा?
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हजारों छात्रों के भविष्य पर एक बार फिर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। आरोप है कि JPSC में पिछले करीब एक महीने से चेयरमैन का पद खाली है, और कई महत्वपूर्ण परीक्षाएं लंबित हैं। ऐसे में छात्रों के बीच यह बड़ी चिंता है कि आखिर भर्ती परीक्षाओं का यह कैलेंडर कब पटरी पर लौटेगा? इस मुद्दे पर अब राज्य की राजनीति भी पूरी तरह गरमा चुकी है, और कांग्रेस-बीजेपी आमने-सामने आ गई हैं।
विपक्षी दल बीजेपी ने सरकार पर तीखा हमला बोला है। बीजेपी का आरोप है कि सरकार भर्ती प्रक्रिया को लेकर बिल्कुल भी गंभीर नहीं है और उसकी मंशा ही परीक्षाएं कराने की नहीं है। बीजेपी का दावा है कि लंबे इंतजार के बाद पहले ही JPSC में अध्यक्ष की नियुक्ति हुई थी। पार्टी का कहना है कि सरकार को योग्य और प्रशासनिक बैकग्राउंड के लोगों को यह जिम्मेदारी देनी चाहिए, लेकिन सरकार की नीयत पर ही सवाल खड़े होते हैं। बीजेपी का यह भी कहना है कि सरकार के पास भले ही साढ़े तीन साल का कार्यकाल बचा हो, लेकिन जिस सुस्त रफ्तार से काम चल रहा है, उससे लगता नहीं कि परीक्षाएं समय पर हो पाएंगी।
वहीं, सत्ताधारी कांग्रेस ने इन तमाम आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे विपक्ष की राजनीतिक बयानबाजी बताया है। कांग्रेस का कहना है कि हेमंत सरकार युवाओं के रोजगार और प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर पूरी तरह गंभीर है। कांग्रेस नेताओं का तर्क है कि हर नियुक्ति और परीक्षा प्रक्रिया को नियमों के तहत ही पूरा किया जा रहा है, और किसी भी छात्र के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। पार्टी का दावा है कि जल्द ही सभी लंबित परीक्षाओं की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जाएगा।
लेकिन सवाल सिर्फ सियासत का नहीं है... सवाल उन हजारों होनहार छात्रों का है, जो दिन-रात एक करके महीनों और वर्षों से इन प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे हैं। इन छात्रों को राजनैतिक जुबानी जंग से कोई मतलब नहीं, इन्हें तो सिर्फ तीन चीजें चाहिए— समय पर परीक्षा, पूरी तरह पारदर्शी प्रक्रिया, और तय समय पर नियुक्ति!
बहरहाल, सियासत अपने रास्ते पर है, लेकिन देखना यह होगा कि सरकार कब इन सुगबुगाहटों को विराम देकर जेपीएससी को उसका नया मुखिया देती है और छात्रों का भविष्य सुरक्षित करती है।





