JHARKHAND NEWS : चाईबासा सदर अस्पताल टेंडर घोटाला: 19 में से 14 फर्म हुईं योग्य, पर मलाईदार काम मिले सिर्फ 2 चहेती कंपनियों को
झारखंड के चाईबासा से एक बड़ा भ्रष्टाचार का मामला सामने आया है! सदर अस्पताल के टेंडर में नियमों को ताक पर रखकर ऐसा खेल खेला गया, जिसने पूरी पारदर्शी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। 19 में से 14 फर्में योग्य थीं, लेकिन मलाई सिर्फ 2 चहेते फर्मों को खिला दी गई।जनवरी 2026 में झारखंड टेंडर पोर्टल पर आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की ब्रांडिंग, रंगाई-पुताई और मरम्मत के लिए स्प्लिट टेंडर निकाला गया था।कुल 19 आवेदन आए, जिनमें से 14 फर्में तकनीकी रूप से योग्य (Qualified) घोषित हुईं।नियम के मुताबिक, स्प्लिट टेंडर में सभी योग्य फर्मों को बुलाकर सहमति से काम बांटना चाहिए था। लेकिन हुआ क्या?
26 मार्च 2026 को चुपचाप सिर्फ दो फर्मों—चाईबासा के मेसर्स नीरज कुमार और पलामू के मेसर्स राहुल इंटरप्राइजेज को कार्य आवंटित कर दिया गया! बाकी 12 योग्य फर्मों को अंधेरे में रखा गया।इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सस्पेंस और सवाल यह है कि जिस दिन नए सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी ने पदभार संभाला, इत्तेफाक देखिए कि उसी दिन इन दोनों फर्मों को काम बांटने का आदेश भी जारी हो गया!अब सवाल यह उठता है कि क्या नए सिविल सर्जन को बिना पूरी फाइल समझे किसी ने बहकाकर हस्ताक्षर करवा लिए? क्योंकि अमूमन पदभार लेते ही कोई अधिकारी इतनी बड़ी कार्रवाई नहीं करता। हद तो तब हो गई जब शिकायत दर्ज होने के तीन महीने बाद, यानी 9 जुलाई 2026 की शाम को जाकर पोर्टल पर यह जानकारी अपडेट की गई, ताकि पर्दादारी की जा सके।इस मनमानी के खिलाफ योग्य फर्म 'अल शीहन प्राइवेट लिमिटेड' ने मुख्यमंत्री, एनएचएम के अभियान निदेशक, डीसी और सिविल सर्जन तक लिखित शिकायत दर्ज कराई है।
जब इस बारे में वर्तमान सिविल सर्जन डॉ. जुझार मांझी से बात की गई, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा:"यह मामला मेरे संज्ञान में आया है। मैंने जांच के आदेश दे दिए हैं। यह टेंडर मेरे कार्यकाल में नहीं हुआ था और पदभार ग्रहण के दिन आवंटन के मामले में मैं दोबारा फाइलों की जाँच करूँगा।"





