जाली मैट्रिक प्रमाण-पत्र पर बड़ी कार्रवाई : बिहार सरकार ने पूर्व अंचलाधिकारी प्रिंस राज को किया बर्खास्त

Edited By:  |
jali matric praman-patra per badi karrawai jali matric praman-patra per badi karrawai

पटना : राज्य सरकार ने जाली एवं कूटरचित शैक्षणिक प्रमाण-पत्र के आधार पर सरकारी सेवा प्राप्त करने के मामले में सुपौल सदर के पूर्व अंचलाधिकारी प्रिंस राज को सेवा से विमुक्त (बर्खास्त) कर दिया है. राज्य मंत्रिपरिषद् से स्वीकृति मिलने के बाद शुक्रवार को राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने उनकी सेवा समाप्ति का आदेश जारी कर दिया.

विभागीय अभिलेखों के अनुसार,प्रिंस राज पिता रघुनंदन साह,ग्राम झिक्की,पोस्ट हिसार,जिला मधुबनी ने बिहार लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित 60-62वीं संयुक्त प्रतियोगिता परीक्षा में चयन के दौरान वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा का अंकपत्र एवं प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया था. उन्होंने यह परीक्षा एसटीएसवाई हाई स्कूल,मनमोहन (मधुबनी) से पास की थी. इससे पहले वर्ष 2004 में वे धर्मेंद्र कुमार के नाम से हाई स्कूल,खिड़हर (मधुबनी) से मैट्रिक की परीक्षा पास किये थे. बाद में जांच में 2006 के प्रमाण-पत्र को जाली बताया गया.

मामले की जांच के क्रम में विशेष निगरानी इकाई द्वारा दर्ज कांड संख्या 04/2025 में यह तथ्य सामने आया कि उन्होंने दो अलग-अलग नाम और जन्मतिथि से मैट्रिक परीक्षा उत्तीर्ण की थी. आरोप है कि इसी दस्तावेज का उपयोग आयु एवं शैक्षणिक अर्हता सिद्ध करने के लिए किया गया.

प्रकरण में निर्णायक स्थिति तब बनी जब बिहार विद्यालय परीक्षा समिति,पटना ने वर्ष 2006 की माध्यमिक परीक्षा के अंकपत्र और प्रमाण-पत्र को जालसाजी पाते हुए 1 अगस्त 2025 को रद्द कर दिया. इसके बाद विभाग ने बिहार लोक सेवा आयोग से मंतव्य प्राप्त किया,जिसमें आयोग ने निर्धारित प्रक्रिया पूर्ण करते हुए चयनमुक्त करने के मामले में विभाग को स्वतंत्र बताया.

विभागीय नियुक्ति अधिसूचना में स्पष्ट प्रावधान था कि यदि अभ्यर्थी द्वारा प्रस्तुत शैक्षणिक प्रमाण-पत्रों में त्रुटि अथवा प्रतिकूल तथ्य पाए जाते हैं तो सेवा बिना पूर्व सूचना के समाप्त की जा सकती है. इसी प्रावधान के तहत विभाग ने यह निष्कर्ष निकाला कि संबंधित अधिकारी सेवा में बने रहने का अधिकार खो चुके हैं.

उल्लेखनीय है कि वर्ष 2019 में नियुक्ति के बाद प्रिंस राज ने प्रशिक्षण प्राप्त किया. उनका पहला पदस्थापन राजस्व अधिकारी के रूप में चनपटिया (पश्चिम चंपारण) में हुआ. इसके बाद विभिन्न पदों पर पदस्थापन हुआ. विभागीय परीक्षा भी उत्तीर्ण की और वर्ष 2023 में सेवा संपुष्ट भी कर दी गई थी. हालांकि,शैक्षणिक प्रमाण-पत्र रद्द होने के बाद उनकी नियुक्ति की वैधता समाप्त हो गई.

शुक्रवार को मंत्रिपरिषद् से अनुमोदन प्राप्त होने के उपरांत सरकार ने उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा से बर्खास्त कर दिया.

सरकारी सेवा में जालसाजी करने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई: उपमुख्यमंत्री

उपमुख्यमंत्री सह राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शनिवार को कहा कि राज्य सरकार की नीति स्पष्ट है, सरकारी सेवा में किसी भी प्रकार की जालसाजी, कूटरचना या फर्जी प्रमाण-पत्र के लिए शून्य सहनशीलता अपनाई जाएगी. नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता से कोई समझौता नहीं होगा. जो भी व्यक्ति धोखाधड़ी कर सेवा में आया है, उसके विरुद्ध विधि सम्मत कड़ी कार्रवाई की जाएगी. यह निर्णय प्रशासनिक शुचिता और व्यवस्था में जनता के विश्वास को मजबूत करने की दिशा में उठाया गया आवश्यक कदम है.