हेमंत सोरेन का 'मिशन असम' : विधानसभा चुनाव से पहले 70 लाख आदिवासियों पर टिकी निगाहें, हिंमता के गढ़ में गरजे हेमंत
रांची:मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन विधानसभा चुनाव की कवायद को लेकर 10 मार्च से दो दिवसीय असम दौरे पर है. हेमंत सोरेन के असम दौरे का आज दूसरा दिन है.पहले दिन सीएम हिमंता के गढ़ में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन कई कार्यक्रमों में शामिल हुए. आदिवासी स्टूडेंट यूनियन ऑफ असम, नारी शक्ति एवं आदिवासी काउंसिल ऑफ असम द्वारा बिस्वनाथ चारियाली स्थित मेजिकाजन चाय बागान में आयोजित जनसभा में शामिल हुए. असम विधानसभा चुनाव की तौयारी में झारखंड मुक्ति मोर्चा का बिगुल बज चुका है. इससे पहले भी हेमंत सोरेन फरवरी में असम दौरे पर गए थे. जेएमएम की नजर असम के चाय बगान में रहनेवाले 70 लाख आदिवासियों पर टिकी हुई हैं. जनसभा के माध्यम से हेमंत सोरेन आदिवासियों की समस्या को दूर करने के लिए भरोसा दिला रहे.
राजनीतिक गोलबंदी में जुटे सीएम
इस बार भी मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने जनसभा को संबोधित करते हुए असम में निवास करने वाले गरीब-गुरबा, किसान, आदिवासी, दलित, पिछड़ा, अल्पसंख्यक वर्ग के लोगों से कहा कि लम्बे समय से अत्याचार एवं शोषण की बातें लगातार सुनी है. सीएम ने कहा कि सभी लोगों ने यहां पर कई राजनीतिक एवं सामाजिक उतार-चढ़ाव देखे हैं. हजारों वर्षों से आप सिर्फ असम नहीं बल्कि इस देश के चाय व्यापार जगत का अभिन्न अंग है. आपके कारण ही चाय उद्योग चल रहा है.सीएम ने कहा कि असम के आदिवासी सामज के वैसे भाई-बहन, माता एवं बुजुर्ग जो चाय उद्योग में कार्य करते हैं उन्हें काम के बदले मेहनताना के रूप में क्या मिलता है. यह किसी से छिपा नहीं है. मुख्यमंत्री ने कहा कि यह दुर्भाग्य है कि आप लोगों के हक-अधिकार की लड़ाई लड़ते-लड़ते क्रांतिकारी नेता प्रदीप नाग ने अपने प्राणों की आहुति दी है.
'हक के लिए एकजुटता जरूरी'
हेमंत सोरेन ने कहा कि झारखंड में भी जल, जंगल, जमीन का संरक्षण एवं आदिवासी समाज की पहचान और उनके हक-अधिकार के लिए लम्बा संघर्ष हुआ है. लगभग 50 वर्ष के संघर्ष के बावजूद जब परिणाम सकारात्मक नहीं रहा तब हमारे अग्रणी नेता दिशोम गुरू शिबू सोरेन सहित अनगिनत क्रांतिकारी नेताओं ने अलग राज्य लेने का निर्णय लिया. अलग राज्य निर्माण का संकल्प उसे वक्त सबसे बड़ा संकल्प था. इस संकल्प को पूरा करने की शुरुआत धनबाद जिला यानी कि कोयला नगरी से शुरू हुई थी. सीएम ने असम के आदिवासियों से अपील करते हुए कहा कि अगर वे अपनी स्थिति बदलना चाहते हैं तो उन्हें एक छत और एक छांव के नीचे आना होगा.
झारखंड राज्य के संघर्ष का किया जिक्र
झारखंड अलग राज्य के संघर्ष का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कहा कि 50 वर्षों के लंबे संघर्ष और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के नेतृत्व में हुए आंदोलन के बाद हमें अपना हक मिला. उन्होंने स्वर्गीय शक्ति नाथ महतो के उस संकल्प को याद किया जिसमें कहा गया था कि पहली पंक्ति के लोग शहीद होंगे, दूसरी पंक्ति के लोग जेल जाएंगे और तीसरी पंक्ति के लोग राज्य को सजाएंगे. अपने संबोधन के अंत में उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य बनने के बाद यह दुर्भाग्य रहा की हमारे आदिवासी समाज के लोग आर्थिक, बौद्धिक और सामाजिक रूप से मजबूत नहीं बन सके.





