BIHAR NEWS : पिंक बस लिख रही महिला सशक्तिकरण की गाथा, इनका पूर्ण संचालन जल्द महिलाओं के हाथों में
पटना : बिहार में महिला सशक्तिकरण की एक नई मिसाल गढ़ी जा रही है. जहां कभी बसों की स्टियरिंग पुरुषों के पास होती थीं,वहां अब पिंक बसों की पूरी कमान महिलाओं के हाथ में आने जा रही है. यह सिर्फ सुरक्षित यात्रा ही नहीं,बल्कि आर्थिक आत्मनिर्भरता,सामाजिक सम्मान और सपनों की उड़ान का प्रतीक है. मौजूदा समय में औरंगाबाद स्थित आईडीटीआर में 13 महिलाएं रोजाना 8 घंटे पिंक बस चलाने की ट्रेनिंग ले रहीं हैं. इन्हें सिम्युलेटर पर प्रैक्टिस,सड़क सुरक्षा के नियम,इंजन की बारीकियां और वाहन रखरखाव सिखाया जा रहा है,ताकि इस मार्च तक वे हेवी मोटर व्हीकल (एचएमवी) का लाइसेंस प्राप्त कर पिंक बसें दौड़ा सकें.
इस संस्थान के प्रशिक्षक अनिरुद्ध कुमार बताते हैं कि ये महिलाएं न सिर्फ ड्राइविंग सीख रही हैं,बल्कि आत्मविश्वास और नेतृत्व भी हासिल कर रही हैं.
गणतंत्र दिवस पर ऐतिहासिक झलक
गणतंत्र दिवस (26 जनवरी) को गांधी मैदान में परिवहन विभाग की झांकी में महादलित महिलाएं पिंक बस चलाती नजर आएंगी. ये छह महिलाएं बिहार की महिला बस चालक बनकर इतिहास रचेंगी.
रोजगार की नई राह बना रही पिंक बस
राज्य में पिंक बस के लिए जल्द ही 250 महिला चालकों और 250 महिला संवाहकों (कंडक्टर) की नियुक्ति होगी. वर्तमान में राज्य के 10 जिलों- पटना,गया,मुजफ्फरपुर,दरभंगा,पूर्णिया,कटिहार सहित अन्य जिलों में 100 पिंक बसें चल रही हैं,जो रोजाना सैकड़ों महिलाओं को बिना किसी डर के उनके गंतव्य तक पहुंचाती हैं.
अब इस बस में चालक, संवाहक व यात्री तक महिलाएं ही होंगी. यह पहल बताती है कि पिंक बस अब सिर्फ सफर तक सीमित नहीं, बल्कि महिलाओं के आत्मनिर्भरता की पसंदीदा सवारी बन गई है.





