BIHAR NEWS : पटना में ‘इकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट-2026’ का आयोजन, मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने किया सम्मेलन का शुभारंभ
पटना : पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग, बिहार सरकार द्वारा राज्य में इकोटूरिज्म के सुनियोजित विकास तथा निजी क्षेत्र की सहभागिता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से सोमवार को पटना स्थित होटल मौर्या में'इकोटूरिज्म इन्वेस्टर्स मीट-2026' का सफल आयोजन किया गया. सम्मेलन का उद्देश्य राज्य में उपलब्ध इकोटूरिज्म निवेश संभावनाओं को निवेशकों के समक्ष प्रस्तुत करना तथा सार्वजनिक-निजी सहभागिता (PPP) मॉडल के माध्यम से इकोटूरिज्म परियोजनाओं के विकास को गति प्रदान करना था.
सम्मेलन का शुभारंभ पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ किया गया. इस अवसर पर अपर मुख्य सचिव, पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग आनंद किशोर, प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंदर सिंह सहित विभाग के वरीय पदाधिकारी, विभिन्न राज्यों से आए निवेशक, उद्योग जगत के प्रतिनिधि तथा पर्यटन क्षेत्र से जुड़े हितधारक उपस्थित रहे.
कार्यक्रम में राज्य के29जलाशयों तथा247तालाबों, पोखरों, झीलों एवं आर्द्रभूमियों पर इकोटूरिज्म आधारित परियोजनाओं के विकास हेतु उपलब्ध निवेश अवसरों का विस्तृत प्रस्तुतीकरण किया गया. सम्मेलन में राज्य एवं राज्य के बाहर से आए50से अधिक निवेशकों ने विभागीय अधिकारियों के साथ विभिन्न परियोजनाओं पर विस्तृत चर्चा की तथा निवेश की संभावनाओं पर विचार-विमर्श किया.
इस अवसर पर मंत्री डॉ. रामचंद्र प्रसाद ने कहा कि बिहार में इकोटूरिज्म के क्षेत्र में निवेश की व्यापक संभावनाएं उपलब्ध हैं. उन्होंने कहा कि इकोटूरिज्म केवल पर्यटन गतिविधि नहीं, बल्कि प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण, स्थानीय समुदायों के आर्थिक सशक्तीकरण तथा हरित अर्थव्यवस्था के निर्माण का प्रभावी माध्यम है. राज्य सरकार निवेशकों को हरसंभव सहयोग प्रदान करने तथा निवेश संबंधी समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है. उन्होंने देशभर के निवेशकों से बिहार की प्राकृतिक एवं पर्यटन संभावनाओं का लाभ उठाते हुए इकोटूरिज्म क्षेत्र में निवेश करने का आह्वान किया.
अपर मुख्य सचिव आनंद किशोर ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में बिहार ने इकोटूरिज्म के क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है. इसके परिणामस्वरूप राजगीर नेचर सफारी, जू सफारी, ग्लास ब्रिज एवं घोड़ाकटोरा, नवादा का ककोलत जलप्रपात, मुंगेर का भीमबांध, बांका का मंदार हिल तथा कैमूर का करमचट डैम सहित विभिन्न इकोटूरिज्म स्थलों पर पर्यटकों की संख्या में लगातार वृद्धि दर्ज की गई है. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के मार्गदर्शन में राज्य के पर्यटन स्थलों का समग्र विकास तथा निजी निवेश को बढ़ावा देने की दिशा में निरंतर कार्य किए जा रहे हैं. बिहार में उपलब्ध जलाशयों एवं आर्द्रभूमियों की प्रचुरता को देखते हुए एडवेंचर टूरिज्म एवं वाटर स्पोर्ट्स गतिविधियों के विकास की व्यापक संभावनाएं मौजूद हैं, जिनके माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी.
प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन बल प्रमुख) अरविंदर सिंह ने अपने स्वागत संबोधन में कहा कि बिहार की प्राकृतिक धरोहर, जैव विविधता एवं जल संसाधन राज्य को इकोटूरिज्म के क्षेत्र में विशिष्ट पहचान प्रदान करते हैं. उन्होंने कहा कि विभाग इकोटूरिज्म विकास के माध्यम से संरक्षण एवं विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है तथा निजी क्षेत्र की सहभागिता इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी.
सम्मेलन के दौरान निवेशकों को वर्तमान में जारी विभिन्न परियोजनाओं की जानकारी भी दी गई. भीमबांध वन्यजीव अभयारण्य में इकोटूरिज्म परियोजना के विकास हेतु जारीRequest for Proposal (RFP) की अंतिम तिथि28जुलाई, 2026निर्धारित है. इसके अतिरिक्त राज्य के चयनित इकोटूरिज्म स्थलों पर एडवेंचर टूरिज्म गतिविधियों एवं वाटर स्पोर्ट्स सुविधाओं के विकास, संचालन एवं अनुरक्षण के लिए अनुभवी एवं योग्य एजेंसियों सेExpression of Interest (EOI) आमंत्रित किए गए हैं, जिसकी अंतिम तिथि6अगस्त, 2026निर्धारित है. साथ ही अन्य इकोटूरिज्म परियोजनाओं के लिए भी इच्छुक निवेशकों से सुझाव एवं प्रस्ताव आमंत्रित किए गए हैं.
परियोजनाओं को दो श्रेणियों में विभाजित किया गया है. ग्रुप-ए के अंतर्गत जलाशय आधारित इकोटूरिज्म परियोजनाएं तथा ग्रुप-बी के अंतर्गत तालाब, पोखर, झील एवं अन्य जल निकाय आधारित इकोटूरिज्म परियोजनाएं सम्मिलित हैं. चयनित निवेशकों को संबंधित स्थल30वर्षों की लीज पर उपलब्ध कराए जाएंगे. परियोजनाओं के क्रियान्वयन हेतु आवश्यक विभागीय अनुमतियां समयबद्ध ढंग से उपलब्ध कराई जाएंगी तथा वित्तीय व्यवहार्यता सुनिश्चित करने के लिए वायबिलिटी गैप फंडिंग (VGF) के माध्यम से वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी. इन परियोजनाओं को बिहार पर्यटन नीति के अंतर्गत उपलब्ध प्रोत्साहनों का लाभ भी प्रदान किया जाएगा.
ग्रुप-ए की परियोजनाओं के लिए प्रति स्थल न्यूनतम10करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर तथा एक से अधिक स्थलों के लिए अधिकतम50करोड़ रुपये तक की पात्रता निर्धारित की गई है. वहीं ग्रुप-बी की परियोजनाओं के लिए प्रति स्थल न्यूनतम2करोड़ रुपये वार्षिक टर्नओवर तथा एक से अधिक स्थलों के लिए अधिकतम10करोड़ रुपये तक की पात्रता निर्धारित की गई है.
सम्मेलन के दौरान विभाग द्वारा राज्य में इकोटूरिज्म के क्षेत्र में हो रही प्रगति के आंकड़े भी प्रस्तुत किए गए. राजगीर नेचर सफारी में वर्ष2022-23में लगभग1.59लाख पर्यटक पहुंचे थे, जो वर्ष2024-25में बढ़कर लगभग3लाख हो गए. इसी प्रकार मंदार हिल, करमचट डैम, नागी-नकटी पक्षी अभयारण्य, भीमबांध इकोटूरिज्म सेंटर तथा वाल्मीकिनगर इकोटूरिज्म क्षेत्र में भी पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है, जो राज्य में इकोटूरिज्म के बढ़ते आकर्षण को दर्शाती है.
कार्यक्रम में प्रधान मुख्य वन संरक्षक (विकास) अभय कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक (कैम्पा) सुरेंद्र कुमार सिंह, मुख्य वन संरक्षक (आई.टी.) एस. चंद्रशेखर, विशेष सचिव आलोक कुमार, मुख्य वन संरक्षक अमित कुमार, बिहार इकोटूरिज्म डेवलपमेंट सोसाइटी के परियोजना निदेशक के. नेशामणी, बिहार चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज (BCCI) के अध्यक्ष पी.के. अग्रवाल, कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन इंडस्ट्री (CII), बिहार के अध्यक्ष गौरव साह, बिहार इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (BIA) के अध्यक्ष रामलाल खेतान सहित विभाग के अन्य अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि एवं मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे.
पटना से नीरज उपाध्याय की रिपोर्ट-





