बिहार में शराबबंदी पर फिर गरमाई सियासत : जीतन राम मांझी ने गुजरात मॉडल लागू करने की मांग दोहराई, NCAER रिपोर्ट से बहस तेज
पटना: बिहार में शराबबंदी कानून को लेकर एक बार फिर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। केंद्रीय मंत्री और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा के प्रमुख जीतन राम मांझी ने राज्य में गुजरात मॉडल की तर्ज पर शराबबंदी लागू करने की अपनी पुरानी मांग दोहराई है। मांझी लंबे समय से बिहार की मौजूदा शराबबंदी व्यवस्था की समीक्षा की वकालत करते रहे हैं।
मांझी के बयान पर शराब नीति पर राजनीतिक चर्चाएं तेज
मांझी का कहना है कि बिहार में शराबबंदी को प्रभावी बनाने के लिए ऐसी व्यवस्था जरूरी है, जिसमें कानून का पालन भी हो और अवैध शराब के कारोबार पर भी प्रभावी रोक लगे। उनके इस बयान के बाद राज्य की शराब नीति को लेकर राजनीतिक चर्चा फिर तेज हो गई है।
NCAERरिपोर्ट मेंशराबबंदी के कम असर का जिक्र
इसी बीच शराबबंदी को लेकर नेशनल काउंसिल ऑफ एप्लाइड इकोनॉमिक रिसर्च (NCAER) की रिसर्च रिपोर्ट भी चर्चा में है। रिपोर्ट में बिहार में शराबबंदी के सामाजिक और आर्थिक प्रभावों का अध्ययन किया गया है। रिपोर्ट में महिलाओं के खिलाफ हिंसा, नशीले पदार्थों के सेवन और राज्य के राजस्व पर शराबबंदी के असर जैसे मुद्दों पर चर्चा की गई है।
विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीचइस मुद्दे पर अलग-अलग तर्क
रिपोर्ट के निष्कर्षों को लेकर बिहार में शराबबंदी की समीक्षा और इसके प्रभावों पर नए सिरे से बहस शुरू हो गई है। विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच भी इस मुद्दे पर अलग-अलग तर्क सामने आ रहे हैं।
शराबबंदी बिहार की राजनीति मेंसंवेदनशील मुद्दा
शराबबंदी बिहार की राजनीति में लंबे समय से संवेदनशील मुद्दा रही है। सरकार की ओर से कानून को सामाजिक सुधार का महत्वपूर्ण कदम बताया जाता रहा है, जबकि इसके आलोचक अवैध शराब, तस्करी और राजस्व नुकसान जैसे मुद्दे उठाते रहे हैं।अब मांझी की ताजा मांग और NCAER की रिपोर्ट के बाद यह सवाल फिर उठने लगा है कि बिहार में मौजूदा शराबबंदी व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा या सरकार इसे पहले की तरह जारी रखेगी।





