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उपमुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान : सरकार के अधिसूचना में नाम के आगे उपमुख्यमंत्री का जिक्र नहीं रहने पर तूल पकड़ा मामला

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पटना:बिहार में उपमुख्यमंत्री पद को लेकर राजनीतिक विवाद शुरू हो गया है. राज्य सरकार ने स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा है कि डिप्टी सीएम का पद समाप्त नहीं हुआ है. हाल ही में मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के बाद सोशल मीडिया पर यह चर्चा तेज हो गई थी कि क्या बिहार सरकार ने उपमुख्यमंत्री का पद खत्म कर दिया है. दरअसल, सात मई को जारी अधिसूचना में मुख्यमंत्री और मंत्रियों के विभागों का उल्लेख किया गया था,लेकिन उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी और बिजेंद्र प्रसाद यादव के नाम के आगे “उपमुख्यमंत्री” पदनाम नहीं लिखा गया था. जिसके बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की अटकलें शुरू हो गईं है.

मामले ने तूल पकड़ा तो मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के सचिव अरविंद कुमार चौधरी ने सामने आकर स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि बिहार में उपमुख्यमंत्री का पद पूरी तरह कायम है और इसे समाप्त नहीं किया गया है. सचिव ने बताया कि हर अधिसूचना में पदनाम का उल्लेख करना अनिवार्य नहीं होता. उन्होंने यह भी कहा कि 15 अप्रैल को मुख्यमंत्री और दो उपमुख्यमंत्रियों के शपथ ग्रहण के समय जारी अधिसूचना में दोनों नेताओं का पद स्पष्ट रूप से उपमुख्यमंत्री लिखा गया था और वही अधिकृत तथा मान्य दस्तावेज है.

हालांकि, सोशल मीडिया पर कई यूजर्स सरकार की इस दलील से संतुष्ट नजर नहीं आए. लोगों ने पिछले वर्ष 21 नवंबर को जारी अधिसूचना का हवाला दिया, जिसमें तत्कालीन उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और विजय कुमार सिन्हा के नाम के साथ स्पष्ट रूप से “उपमुख्यमंत्री” लिखा गया था। इसी तुलना के आधार पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि इस बार ऐसा क्यों नहीं किया गया.

इस पूरे विवाद पर उपमुख्यमंत्री सह संसदीय कार्य मंत्री विजय चौधरी ने भी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि नाम के साथ पदनाम का उल्लेख नहीं होना संभवतः मुद्रण की भूल हो सकती है और विभाग इसमें सुधार कर लेगा. उन्होंने साफ कहा कि उपमुख्यमंत्री का पद समाप्त नहीं हुआ है.

संवैधानिक दृष्टि से देखे तो भारतीय संविधान में “उपमुख्यमंत्री” पद का अलग से उल्लेख नहीं है. संविधान में मुख्यमंत्री और मंत्रिपरिषद के सदस्यों का उल्लेख किया गया है,जबकि उपमुख्यमंत्री राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था के तहत दिया जाने वाला पद माना जाता है. ऐसे में अधिसूचना में पदनाम नहीं होने के बावजूद सरकार का कहना है कि व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है.