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सरायकेला : हाथियों के हमले के बाद वन अधिकारियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार पर उठ रहे सवाल

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सरायकेला: ईचागढ़ विधानसभा क्षेत्र के हाड़ात, कुकडू और तिरुलडीह में पिछले दिनों मानव-हाथी संघर्ष की घटनाओं ने चार लोगों की जान ले ली है. सपारूम जंगल में रघुनाथ तंतुवाई एवं कुकडू में मुनिराम गोराई की मौत के बाद आक्रोश में आकर स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पत्रकारों द्वारा वन अधिकारियों के साथ किए गए दुर्व्यवहार ने इचागढ़ की राजनीतिक परिदृश्य को गंभीर चर्चा का विषय बना दिया है.

अधिकार का दुरुपयोग,कर्तव्य की अनदेखी

भारतीय संविधान के भाग-3, अनुच्छेद 12 से 35 तक मौलिक अधिकारों का उल्लेख है. अनुच्छेद-19 अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, वहीं अनुच्छेद-21 हर नागरिक को सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार प्रदान करता है, लेकिन हालिया घटनाक्रम में देखा गया है कि लोगों ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का दुरुपयोग किया और वन अधिकारियों के मानव अधिकारों का भी उल्लंघन किया.

अनुच्छेद-20 की अनदेखी

यहां लोग यह भूल गए कि उसी भारतीय संविधान के अनुच्छेद-20 में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर युक्तियुक्त प्रतिबंध की बात कही गई है. यानी आप अपने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का वह प्रयोग नहीं कर सकते जिससे किसी दूसरे के सम्मान, गरिमा या कर्तव्य निर्वहन में बाधा पहुंचे.

क्या है मामला

तिरुलडीह में हाथी के हमले में एक ही परिवार के चार लोगों की मौत हो गई थी. कुकडू में मुनिराम गोराई की जान गई थी, जिसके बाद घटनास्थल पर पहुंचे वन विभाग के अधिकारियों के साथ कुछ जनप्रतिनिधियों और स्थानीय पत्रकारों ने अभद्र व्यवहार किया. अधिकारियों पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए गाली-गलौज की गई.

भाग-4A में कर्तव्यों का जिक्र

संविधान के भाग-4A, अनुच्छेद 51A में मौलिक कर्तव्यों का उल्लेख है. इसमें सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना, वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाना और लोक सेवकों के साथ सहयोग करना शामिल है. अधिकार और कर्तव्य एक सिक्के के दो पहलू हैं.

वन विभाग ने मामले में वरीय अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी है. जिला प्रशासन ने लोगों से संयम बरतने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है.