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रांची : चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज ने की बैठक,रांची मास्टर प्लान 2037 सहित कई मुद्दों पर हुई चर्चा

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रांची:धुर्वा स्थित प्रोजेक्ट भवन कार्यालय में शहरी विकास एवं निगम से जुड़ी समस्याओं पर आज फेडरेशन ऑफ झारखण्ड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज की बैठक हुई. नगर विकास विभाग के सचिव सुनील कुमार के साथ चर्चा की गई.प्रतिनिधिमंडल ने विभाग द्वारा तैयार किये गये भवन नियमितीकरण योजना पर चर्चा की. विभागीय सचिव ने अवगत कराया कि यह बिल जल्द ही आने वाला है. चैंबर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा के आग्रह पर उन्होंने बिल का प्रारूप चैंबर से साझा करने के लिए आश्वस्त किया ताकि उस पर सुझाव प्राप्त हो सकें.

बैठक में रांची मास्टर प्लान 2037 पर भी चर्चा हुई. बताया गया कि प्रावधानों के अनुसार प्रत्येक पांच वर्ष में समीक्षा का प्रावधान है, लेकिन पिछले आठ वर्षों से इसकी समीक्षा नहीं हो सकी है, जिससे भू-मालिक अपनी भूमि का प्रभावी उपयोग नहीं कर पा रहे हैं. चैंबर ने मांग की है कि झारखण्ड चैम्बर के प्रतिनिधित्व से विभाग द्वारा उच्चस्तरीय कमिटी गठित कर मास्टर प्लान एवं बिल्डिंग बाई-लॉज की समीक्षा की जाए. जिस पर सचिव ने सकारात्मक रूख दिखाया. प्रतिनिधिमंडल ने झारखण्ड बिल्डिंग बाई लॉज 2016 में भी जरूरी संशोधन का सुझाव दिया.

बाजार टांड की दुकानों के किराया विवाद के समाधान में विलंब पर प्रतिनिधिमंडल द्वारा चिंता जताई गई है. कहा गया कि विवाद का स्थाई समाधान होने तक निगम द्वारा दुकानदारों पर कोई दंडात्मक करवाई नहीं की जाय तथा दुकानें सील नहीं की जाये. इसे जटिल एवं लंबे समय से लंबित मुद्दा बताते हुए विभाग द्वारा नगर निगम, झारखण्ड चैंबर एवं किरायेदार संघ के प्रतिनिधित्व में कमिटी बनाने की मांग की गई, जिस पर सचिव ने कार्रवाई का आश्वासन दिया.

शहर में होर्डिंग्स के मुद्दे पर भी चर्चा हुई. बताया गया कि पांच वर्ष के लिए रजिस्ट्रेशन कराने के बाद निवेश करने वाले संचालकों को अचानक हटाना उचित नहीं है. निगम को कॉन्ट्रैक्ट का पालन करना चाहिए. इस पर सचिव ने मामले की समीक्षा की बात कही.

प्रतिनिधिमंडल ने ट्रांसपोर्ट नगर को शीघ्र चालू कराने, वेयरहाउसिंग में लैंड यूज में रिलैक्सेशन देने और ट्रेड लाइसेंस प्रक्रिया को सरल बनाने की मांग रखी है. बताया गया कि ट्रेड लाइसेंस बनाने की जटिल विधि के कारण जो व्यापारी लाइसेंस नहीं नहीं ले पा रहे हैं उन्हें निगम द्वारा फाइन की जगह सीधे उनकी दुकानें सील करने का आदेश दिया जा रहा है, जो अव्यवहारिक है. यह मांग की गई कि तुरंत शार्ट नोटिस पर दुकानदारों पर कड़ी करवाई नहीं की जाये. विभागीय सचिव ने आश्वस्त करते हुए कहा कि ट्रेड लाइसेंस के अभाव में दुकानों को सील नहीं किया जाएगा.

प्रतिनिधिमंडल में चैम्बर अध्यक्ष आदित्य मल्होत्रा, महासचिव रोहित अग्रवाल, सह सचिव नवजोत अलग, रोहित पोद्दार, कार्यकारिणी सदस्य मुकेश अग्रवाल, पूर्व अध्यक्ष अंचल किंगर, उप समिति चेयरमैन अलोक सरावगी और आर्किटेक्ट अरुण कुमार शामिल हुए.