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JHARKHAND NEWS : JSSC CGL मामला: रघुवर दास की मांग- CBI जांच कराकर दोषियों को तुरंत नौकरी से बर्खास्त करे सरकार

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"झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने छात्रों के समर्थन में अपना एकदिवसीय सांकेतिक अनशन फिलहाल स्थगित कर दिया है। जेपीएससी-जेएसएससी रिफॉर्म मंच के बैनर तले आंदोलनरत छात्रों के आग्रह और उनकी घोषणा का सम्मान करते हुए पूर्व सीएम ने यह कदम उठाया है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर पोस्ट शेयर करते हुए पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने बताया कि आंदोलनरत छात्रों ने फिलहाल अपने आंदोलन को स्थगित करने का फैसला लिया है। छात्रों ने राज्य सरकार को सीबीआई जांच की अनुशंसा के लिए 60 दिनों का समय दिया है।

रघुवर दास ने छात्रों के संघर्ष, समर्पण और सरोकार को नमन किया है। उन्होंने कहा कि चूंकि छात्रों ने सरकार को समय दिया है, इसलिए वे उनके निर्णय का सम्मान करते हुए अपना एकदिवसीय अनशन स्थगित कर रहे हैं।

आपको बता दें कि इससे पहले पूर्व सीएम ने आंदोलनरत छात्रों के मंच से सरकार को एक सप्ताह के भीतर छात्रों की मांगें मानने की चेतावनी दी थी। उन्होंने कहा था कि अगर मांगें पूरी नहीं हुईं, तो वे भगवान बिरसा मुंडा स्मारक स्थल पर उत्पाद सिपाही दौड़ के दौरान जान गंवाने वाले 19 अभ्यर्थियों को श्रद्धांजलि देते हुए एकदिवसीय अनशन करेंगे। साथ ही, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि छात्रों के इस आंदोलन को भारतीय जनता पार्टी (BJP) का पूरा नैतिक समर्थन प्राप्त था।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच, पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने राज्य सरकार के सामने तीन बड़ी और अहम मांगें रखी हैं:

  1. सीबीआई जांच: परीक्षाओं में हुई तमाम गड़बड़ियों की निष्पक्ष सीबीआई जांच कराई जाए।

  2. मुआवजा: उत्पाद सिपाही भर्ती परीक्षा के दौरान दौड़ में जान गंवाने वाले 19 झारखंडी-मूलवासी छात्रों के परिजनों को 1-1 करोड़ रुपये का मुआवजा दिया जाए।

  3. जेएसएससी सीजीएल (JSSC CGL) परीक्षा पर रुख: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व आदेशों का हवाला देते हुए उन्होंने मांग की है कि पूरी नियुक्ति प्रक्रिया को रद्द न किया जाए। इसके बजाय, मेरिट के आधार पर चयनित अभ्यर्थियों और धांधली या लेन-देन कर नौकरी में आए दागदार अभ्यर्थियों के बीच अंतर किया जाए। व्यापक जांच के बाद दागियों को तत्काल बर्खास्त किया जाए, ताकि योग्य छात्रों के साथ कोई अन्याय न हो।फिलहाल छात्रों द्वारा 60 दिन का समय दिए जाने के बाद आंदोलन को विराम मिला है, लेकिन इन तीन बड़ी मांगों को लेकर राज्य सरकार पर राजनीतिक और छात्र संगठनों का दबाव लगातार बना हुआ है। अब देखना यह होगा कि राज्य सरकार इन 60 दिनों में छात्रों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाती है।