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JHARKHAND NEWS : उफनता पानी और लाचार व्यवस्था: सिमडेगा के इस नाले ने फिर छीनी एक और जिंदगी

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विकास की राह जब अधूरी रह जाती है, तब उसकी सबसे बड़ी कीमत आम लोगों को अपनी जान देकर चुकानी पड़ती है। झारखंड के सिमडेगा से एक ऐसी ही झकझोर देने वाली खबर सामने आई है। प्रखंड के गेनमेर पंचायत स्थित टोंगरीटोली नाला एक बार फिर ग्रामीणों के लिए जानलेवा साबित हुआ है। पुल के अभाव में यहाँ एक और बेकसूर की जान चली गई।यह कहानी है सिमडेगा के भीष्म सिंह की। सोमवार का दिन उनके परिवार के लिए काल बनकर आया। भीष्म सिंह अपने एक परिजन के अंतिम संस्कार के लिए बाजार कफन खरीदने गए थे। लेकिन किसे पता था कि लौटते वक्त कुदरत का यह तेज बहाव उनकी अपनी ही अर्थी का सामान बन जाएगा।टोंगरीटोली नाला पार करने के दौरान तेज बहाव में वे बह गए। सूचना मिलते ही गिरदा ओपी पुलिस मौके पर पहुँची और ग्रामीणों के साथ मिलकर देर रात तक उनकी तलाश की गई, लेकिन अंधेरे के कारण कुछ पता नहीं चल पाया। आखिरकार, मंगलवार की सुबह एक ग्रामीण ने नाले में उनका शव देखा। करीब 24 घंटे की मशक्कत के बाद उनका शव बरामद किया गया, जिसके बाद पूरे गांव में मातम पसर गया और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।इस घटना के बाद ग्रामीणों का गुस्सा प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के खिलाफ फूट पड़ा है। ग्रामीणों का साफ कहना है कि टोंगरीटोली नाले पर पुल निर्माण की मांग वे वर्षों से कर रहे हैं। कई बार शासन-प्रशासन को लिखित आवेदन दिए गए, गुहार लगाई गई, लेकिन नतीजा सिफर रहा।

स्थानीय लोगों का दर्द है कि— 'यदि समय रहते यहाँ पुल बन गया होता, तो आज भीष्म सिंह की जान नहीं जाती

सिर्फ भीष्म सिंह ही नहीं, यह समस्या हर बारिश में इस इलाके के लिए अभिशाप बन जाती है। नाले का जलस्तर बढ़ने पर स्कूली बच्चों, किसानों और आम नागरिकों को रोजाना अपनी जान हथेली पर रखकर आवागमन करना पड़ता है। हालात इतने बदतर हैं कि कई बार शिक्षक भी स्कूल नहीं पहुँच पाते, जिससे नौनिहालों की पढ़ाई पर भी ग्रहण लग जाता है।एक तरफ देश और राज्य में विकास के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं सिमडेगा की यह तस्वीर व्यवस्था के दावों की पोल खोलने के लिए काफी है। सवाल यह है कि क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा था?अब ग्रामीणों की सिर्फ एक ही मांग है— टोंगरीटोली नाले पर जल्द से जल्द पुल का निर्माण हो, ताकि विकास के अभाव में किसी और को अपनी जान न गंवानी पड़े।