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JHARKHAND NEWS : छात्रों का आंदोलन तेज: JPSC-JSSC मामले पर अर्जुन मुंडा ने दी सरकार और संगठन को दो टूक सलाह

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राज्य में JPSC और JSSC परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ छात्रों का आक्रोश अब सड़कों से लेकर राजनीतिक गलियारों तक भूचाल ले आया है। पिछले कई दिनों से रांची के जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में डटे इन युवाओं का आंदोलन अब और भी आक्रामक हो चला है। छात्र संगठनों ने 20 अगस्त को मुख्यमंत्री आवास के घेराव का बड़ा ऐलान कर दिया है! इस पूरे घटनाक्रम में नया मोड़ तब आया जब राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और वरिष्ठ बीजेपी नेता रघुवर दास सीधे छात्रों के बीच जा पहुंचे। उन्होंने सरकार को खुली चेतावनी दी थी कि अगर एक हफ्ते के भीतर छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं और मामले कीCBI जांच के आदेश नहीं दिए गए, तो वे बिरसा मुंडा समाधि स्थल के सामने अनशन पर बैठेंगे। आपको बता दें कि रघुवर दास की दी गई सात दिनों की यह मियाद पूरी हो चुकी है, जिसके बाद अब हर किसी की निगाहें 20 अगस्त पर टिकी हैं कि क्या वे अपने ऐलान पर कायम रहते हैं या नहीं। लेकिन इस गरमागरम सियासी माहौल के बीच, बीजेपी के एक अन्य दिग्गज नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्रीअर्जुन मुंडा के एक बयान ने राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी है। ईटीवी भारत से खास बातचीत में जब अर्जुन मुंडा से रघुवर दास के आंदोलन में कूदने के ऐलान को लेकर सवाल किया गया, तो उन्होंने बहुत ही नपा-तुला लेकिन कड़ा संदेश दिया।

अर्जुन मुंडा ने साफ कहा कि संगठन से जुड़ा कोई भी व्यक्ति ऐसे मामलों में व्यक्तिगत तौर पर फैसला नहीं ले सकता। आंदोलन को किस रूप में और कैसे समर्थन देना है, यह पार्टी का संगठन तय करता है। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि पार्टी में काम करने वाले हर कार्यकर्ता और नेता के लिए संगठन की नीति और दिशा-निर्देश सर्वोपरि होते हैं। इसे रघुवर दास के संदर्भ में एक बड़ी सांगठनिक नसीहत के तौर पर देखा जा रहा है।सिर्फ पार्टी के भीतर अनुशासन की बात ही नहीं, बल्कि अर्जुन मुंडा ने राज्य सरकार को भी इस मुद्दे पर आईना दिखाया है। उन्होंने कहा कि परीक्षाओं में घालमेल, माफिया और सिंडिकेट जैसी बातें सामने आना बेहद चिंताजनक है, जिससे युवाओं के भीतर भारी आक्रोश है। उन्होंने सरकार से अपील की कि इस संवेदनशील मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाay युवाओं के भविष्य से जोड़कर देखा जाए। भर्ती संस्थाओं की साख बचाने के लिए पारदर्शी और निष्पक्ष कार्रवाई बेहद जरूरी है, ताकि छात्रों का खोया हुआ भरोसा वापस लौट सके। अब सवाल यह उठता है कि क्या झारखंड सरकार छात्रों के इन उग्र तेवरों के आगे झुकते हुए CBI जांच की मांग मानेगी? क्या पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास अपने ऐलान के मुताबिक अनशन का रास्ता चुनेंगे? और इन सबके बीच क्या बीजेपी का अंदरूनी अनुशासन इस सियासी समीकरण को कोई नया मोड़ देगा?