JHARKHAND NEWS : JSSC PGT विवाद: एक ही सेंटर से 147 अभ्यर्थियों के चयन ने खड़े किए बड़े सवाल, अभय तिवारी की परीक्षा पर भी उठे संशय
झारखंड में 3120 प्लस-टू शिक्षकों की नियुक्ति प्रक्रिया शुरू से ही विवादों और सवालों के घेरे में आ गई है। झारखंड कर्मचारी चयन आयोग यानी JSSC द्वारा CBT मोड में 24 केंद्रों पर यह परीक्षा ली गई थी। लेकिन अब जो आंकड़े सामने आए हैं, वे इस पूरी परीक्षा प्रक्रिया पर बड़ा संदेह पैदा करते हैं।सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या एक खास परीक्षा केंद्र से सुनियोजित तरीके से अभ्यर्थियों को पास कराया गया? इस परीक्षा में एक मार्केटिंग मैनेजर के सफल होने और उसके बाद तुरंत मिली प्रतिनियुक्ति ने इस विवाद को और हवा दे दी है। आइए सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि आखिर इस पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल क्यों खड़े हो रहे हैं।
रिजल्ट जारी होने के बाद से ही अभ्यर्थी कुछ चुनिंदा केंद्रों पर धांधली का आरोप लगा रहे हैं। आइए इन तीन बड़े उदाहरणों से जानते हैं कि शक की सुई आखिर कहां घूम रही है:
पहला उदाहरण - भूगोल विषय: भूगोल के अनारक्षित वर्ग के प्रथम चरण के रिजल्ट में कुल 72 अभ्यर्थी सफल हुए थे। चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से 41 अभ्यर्थी अकेले बोकारो के दो केंद्रों से पास हुए! वहीं, 24 में से आधा दर्जन से अधिक केंद्र ऐसे रहे, जहां से एक भी अभ्यर्थी सफल नहीं हो पाया।
दूसरा उदाहरण - भौतिकी विषय: भौतिकी में कुल 94 अभ्यर्थी सफल हुए, जिनमें से 30 फीसदी यानी 29 अभ्यर्थी सिर्फ बोकारो के केंद्र संख्या 102 से ही पास हो गए।
तीसरा उदाहरण - जीव विज्ञान विषय: जीव विज्ञान में भी यही कहानी दोहराई गई। इस विषय में कुल 90 अभ्यर्थी सफल हुए, जिनमें से 21 अभ्यर्थी अकेले इसी बोकारो केंद्र (संख्या 102) से आते हैं।
अगर केंद्रवार सफल अभ्यर्थियों की कुल संख्या पर नजर डालें, तो केंद्र संख्या 102 पर सबसे अधिक 147 अभ्यर्थी सफल हुए हैं, जबकि कई अन्य केंद्रों पर यह आंकड़ा दहाई या इकाई के अंक तक ही सिमट कर रह गया है।
इस पूरे विवाद के केंद्र में एक नाम और चर्चा में है—अभय तिवारी। जो परीक्षा से पहले एक निजी कंपनी में मार्केटिंग मैनेजर के तौर पर काम कर रहे थे। उन्होंने अंग्रेजी विषय से यह परीक्षा पास की।
नियमों के मुताबिक उनकी नियुक्ति देवघर के शशि भूषण राय प्लस-टू हाईस्कूल, सिमरा में की गई थी। लेकिन हैरानी की बात यह है कि चयन के तुरंत बाद ही उनकी प्रतिनियुक्ति देवघर के ही आर मित्रा जिला मुख्यमंत्री उत्कृष्ट विद्यालय में कर दी गई, हालांकि बाद में उन्होंने वहां योगदान नहीं दिया।
आयोग द्वारा जारी पहले चरण के रिजल्ट में अनारक्षित वर्ग के कुल 804 सफल अभ्यर्थियों में से 479 अभ्यर्थी सिर्फ 6 केंद्रों से पास हुए थे। ऐसे में, अभ्यर्थियों का यह गुस्सा और सवाल उठाना लाजिमी है कि क्या परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की अनदेखी की गई है? अब देखना यह होगा कि आयोग इन गंभीर सवालों पर क्या कदम उठाता है।





