JHARKHAND NEWS : पूर्व CM चम्पाई सोरेन का गंभीर आरोप- PESA नियमावली में आदिवासियों के हक मारे गए, राज्य सरकार ने दिया बड़ा धोखा
रांची: झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चम्पाई सोरेन ने प्रेस वार्ता करPESA (पंचायत एक्सटेंशन टू शेड्यूल्ड एरिया) नियमावली पर तीखे सवाल खड़े किये. उन्होंने कहा कि 25 साल लगने के बाद बनी इस नियमावली के पहले पेज से ही आदिवासियों के संवैधानिक अधिकारों का हनन हो गया है.
चंपाई सोरेन ने महागठबंधन सरकार पर सबसे लंबे समय तक सत्ता में रहने का हवाला देते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने आदिवासियों को धोखा दिया.
आदिवासी परंपराओं का अपमान : नियमावली में रूढ़िवादी परंपराओं को जोड़ने के बजाय ग्राम सभा अध्यक्ष के लिए विकल्प दिए गए,जिससे गांवों में दो गुट बन जाएंगे. कोई भी फर्जी व्यक्ति अध्यक्ष बन सकता है.
CNTएक्ट का उल्लंघन: पहले ड्राफ्ट में ग्राम सभा कोCNTएक्ट के तहत जमीन मंजूरी का अधिकार था,लेकिन नई नियमावली में बिचौलियों को जगह दी गई. इससे ग्राम सभा कमजोर हुई.
संवैधानिक भावना का अंत: संविधान के अनुच्छेदों में आदिवासियों को रूढ़िवादी परंपराओं का अधिकार है,लेकिन राज्य सरकार नेPESAकी मूल भावना को खत्म कर दिया.
नीलगिरी मामला उदाहरण: 2013 में सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के नीलगिरी पर्वत पर वेदांता के खनन पट्टे को रद्द कर आदिवासियों के धार्मिक अधिकारों को मान्यता दी. सोरेन ने चेतावनी दी कि ऐसी गलतियां झारखंड में दोहराई जा रही है.
आदिवासी आबादी पर संकट: आदिवासी क्षेत्रों में पुस्तैनी जमीन और समुदाय की संख्या घट रही है,जो इस नियमावली से और बिगड़ेगी. सोरेन ने सवाल उठाया कि विकल्प किसके लिए दिया गया?क्या बाहरी ताकतों को घुसपैठ का रास्ता बनाया जा रहा है?
रांची से राहुल कुमार की रिपोर्ट--





