पटना- ईबोला वायरस को लेकर बिहार स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड में है। एहतियात के तौर पर पटना मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में चार बेड सुरक्षित रखे गए हैं, जबकि दानापुर अस्पताल में ऑब्जर्वेशन सेंटर तैयार किया गया है। हालांकि राज्य में अभी तक ईबोला का कोई मामला सामने नहीं आया है, लेकिन संभावित खतरे को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।

ईबोला वायरस एक गंभीर और जानलेवा वायरल बीमारी है, जिसे ईबोला वायरस डिजीज कहा जाता है। यह बीमारी सबसे पहले वर्ष 1976 में अफ्रीका के कांगो क्षेत्र में ईबोला नदी के पास पाई गई थी, जिसके नाम पर इसका नाम ईबोला पड़ा। यह वायरस संक्रमित व्यक्ति के खून, पसीने, लार, उल्टी, मल या अन्य शारीरिक द्रवों के सीधे संपर्क से फैलता है। संक्रमित जानवरों के संपर्क में आने से भी संक्रमण का खतरा रहता है।

ईबोला के शुरुआती लक्षण सामान्य वायरल संक्रमण जैसे दिखाई देते हैं। इनमें तेज बुखार, सिरदर्द, अत्यधिक कमजोरी, मांसपेशियों में दर्द और गले में खराश शामिल हैं। बीमारी बढ़ने पर उल्टी, दस्त और कुछ गंभीर मामलों में आंतरिक या बाहरी रक्तस्राव भी हो सकता है। समय पर इलाज नहीं मिलने पर यह बीमारी जानलेवा साबित हो सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बार-बार हाथ धोना, संक्रमित व्यक्ति के सीधे संपर्क से बचना और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियों का पालन करना संक्रमण से बचाव के सबसे प्रभावी उपाय हैं। बिहार स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने और किसी भी संदिग्ध लक्षण की स्थिति में तुरंत अस्पताल से संपर्क करने की अपील की है। फिलहाल राज्य में कोई मामला नहीं मिला है, लेकिन स्वास्थ्य व्यवस्था को पूरी तरह सतर्क रखा गया है।

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट