
शनिवार, 26 सितंबर 2026
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गयाजी- पितृपक्ष मेला 2026 में इस बार आधुनिक तकनीक का रंग देखने को मिल रहा है। श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर प्रबंधन को लेकर गया जिला प्रशासन ने कई आधुनिक इंतजाम किए हैं। मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए तकनीक की मदद से व्यवस्थाओं को बेहतर और सुगम बनाने पर जोर दिया जा रहा है। सुरक्षा व्यवस्था पर भी विशेष नजर रखी जा रही है, ताकि श्रद्धालु सुविधाजनक और सुरक्षित माहौल में पिंडदान और तर्पण कर सकें। ‘पिंडदान गया जी’ ऐपजिला पदाधिकारी ने सभी दंडाधिकारियों और पुलिस पदाधिकारियों को अपने मोबाइल में ‘Pind Daan Gaya Ji’ मोबाइल ऐप अनिवार्य रूप से इंस्टॉल करने का निर्देश दिया है। इस ऐप के जरिए श्रद्धालु और आम लोग मेला क्षेत्र से जुड़ी अपनी शिकायत या समस्या दर्ज करा सकेंगे।शिकायतों के त्वरित समाधान की व्यवस्थाऐप पर प्राप्त शिकायतों को जिला प्रशासन द्वारा गठित संबंधित सेल तक पहुंचाया जाएगा। इसके बाद शिकायतों की निगरानी करते हुए संबंधित विभाग के माध्यम से उनका त्वरित समाधान कराने की व्यवस्था की गई है।प्रशासन का उद्देश्य है कि पितृपक्ष मेले के दौरान देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो और उनकी शिकायतों पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई की जा सके।तकनीक के जरिए बेहतर होगा मेला प्रबंधनपितृपक्ष मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने को देखते हुए प्रशासन सुरक्षा, यातायात, साफ-सफाई और अन्य व्यवस्थाओं पर विशेष नजर रख रहा है। ‘Pind Daan Gaya Ji’ ऐप को इसी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है, ताकि श्रद्धालुओं की समस्याओं को सीधे प्रशासन तक पहुंचाने और उनके समाधान की प्रक्रिया को आसान बनाया जा सके।गयाजी से प्रदीप सिंह की रिपोर्ट
बिहार के तराई इलाकों में लगातार हो रही भारी बारिश के बीच बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। नेपाल में पिछले तीन दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश के बाद गंडक नदी के जलस्तर में तेजी से बढ़ोतरी दर्ज की गई है। नेपाल के देवघाट से गंडक नदी में करीब 4.22 लाख क्यूसेक पानी डिस्चार्ज होने की सूचना है।गंडक नदी के बढ़ते जलस्तर से पश्चिम चंपारण, पूर्वी चंपारण, गोपालगंज और सारण समेत कई जिलों में बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। पश्चिम चंपारण के वाल्मीकिनगर क्षेत्र में स्थिति ज्यादा गंभीर बताई जा रही है। भेड़िहारी, रोहुआ टोला और चकदहवा समेत कई गांवों में पानी पहुंचने से जनजीवन प्रभावित हुआ है।जानकारी के मुताबिक, दोपहर 1 बजे तक गंडक नदी में करीब 2.90 लाख क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज किया गया। स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर है। प्रभावित इलाकों के लोगों को सुरक्षित स्थानों और राहत शिविरों में शिफ्ट किया जा रहा है।वहीं, मौसम विज्ञान विभाग ने बिहार के कई हिस्सों में आज भारी बारिश की आशंका जताई है। लगातार बारिश और नेपाल से आने वाले पानी के कारण आने वाले समय में गंडक नदी के जलस्तर में और बढ़ोतरी की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने निगरानी बढ़ा दी है।बगहा से राकेश सोनी की रिपोर्ट
पटना- बिहार में आई बाढ़ से प्रभावित परिवारों की सहायता के लिए पंजाब नेशनल बैंक ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 1 करोड़ रुपये का योगदान दिया है। बैंक की ओर से मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को 1 करोड़ रुपये का चेक सौंपा गया।मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस सहयोग के लिए पंजाब नेशनल बैंक का आभार जताया। उन्होंने कहा कि आपदा और कठिन परिस्थितियों के दौरान यह राशि जरूरतमंद लोगों की मदद में उपयोगी साबित होगी।इस अवसर पर पंजाब नेशनल बैंक के एमडी एवं सीईओ अशोक चन्द्र, बिहार के जोनल हेड लक्ष्मीकांत मिश्रा, पटना के सर्किल हेड युवराज सिंह राठौड़ और जोनल हेड से जुड़े अधिकारी रमेश कुमार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।पटना से राजीव रंजन की रिपोर्ट
गया- मोक्षधाम गयाजी में पितृपक्ष मेला-2026 का भव्य उद्घाटन मुख्यमंत्री ने किया। इस दौरान उन्होंने मेले में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के लिए की गई तैयारियों और व्यवस्थाओं का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को श्रद्धालुओं की सुविधा, सुरक्षा और बेहतर व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि पितृपक्ष मेला गयाजी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण आयोजन है। इस दौरान बड़ी संख्या में देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ विदेशों से भी श्रद्धालु पिंडदान और तर्पण के लिए गयाजी पहुंचते हैं। सरकार का प्रयास है कि यहां आने वाले हर श्रद्धालु को बेहतर और सुखद अनुभव मिले।मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रद्धालुओं का स्वागत “अतिथि देवो भवः” की भावना के साथ किया जाना चाहिए। मेले के दौरान श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी न हो, इसके लिए प्रशासन की ओर से व्यापक इंतजाम किए गए हैं। उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विशाल जनसमूह को संबोधित भी किया। उन्होंने गयाजी की धार्मिक महत्ता और पितृपक्ष मेले की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि श्रद्धालुओं की सेवा और सुविधा सरकार की प्राथमिकता है। प्रशासन को साफ-सफाई, पेयजल, यातायात, सुरक्षा और अन्य आवश्यक सुविधाओं पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है।पितृपक्ष के दौरान गयाजी में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। इसे देखते हुए प्रशासन की ओर से विभिन्न स्थानों पर व्यवस्थाओं को दुरुस्त किया गया है, ताकि श्रद्धालु शांतिपूर्ण और सुविधाजनक तरीके से पिंडदान कर सके।पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट
पटना- विश्वामित्र सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजकुमार चौबे के निर्देशानुसार संगठन को और अधिक सशक्त, अनुशासित, प्रभावी एवं व्यवस्थित बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण संगठनात्मक निर्णय लिया गया है। संगठन की वर्तमान कार्यप्रणाली एवं संरचना की समीक्षा के उपरांत विश्वामित्र सेना की सभी वर्तमान इकाइयों, समितियों एवं दायित्वों को तत्काल प्रभाव से भंग किया जाता है।यह निर्णय संगठन के व्यापक पुनर्गठन, विस्तार एवं आगामी कार्ययोजना को ध्यान में रखते हुए लिया गया है। संगठन को नई ऊर्जा, नई संरचना और स्पष्ट जिम्मेदारियों के साथ जमीनी स्तर तक और अधिक प्रभावी बनाने के उद्देश्य से आने वाले समय में नई संगठनात्मक संरचना का गठन किया जाएगा।विश्वामित्र सेना से जुड़े सभी पदाधिकारी, कार्यकर्ता एवं विभिन्न इकाइयों के सदस्य तत्काल प्रभाव से पूर्व निर्धारित पदों एवं दायित्वों का संचालन स्थगित करेंगे। किसी भी पूर्व पद, समिति अथवा इकाई के नाम पर संगठनात्मक निर्णय लेने, नियुक्ति करने अथवा संगठन की ओर से आधिकारिक गतिविधि संचालित करने का अधिकार फिलहाल किसी को नहीं होगा।पुनर्गठन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद संगठन की नई संरचना, पदाधिकारियों की नियुक्ति, जिम्मेदारियों एवं दायित्वों के संबंध में अलग से आधिकारिक दिशा-निर्देश जारी किए जाएंगे। संगठन के सभी कार्यकर्ताओं से अपेक्षा की जाती है कि वे इस संक्रमणकालीन अवधि में संगठनात्मक अनुशासन, मर्यादा एवं एकजुटता बनाए रखें तथा किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, व्यक्तिगत निर्णय अथवा अनधिकृत गतिविधि से बचें। विश्वामित्र सेना का उद्देश्य संगठन को और अधिक मजबूत, अनुशासित एवं जनहित के कार्यों के लिए प्रभावी बनाना है। आगामी पुनर्गठन इसी उद्देश्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। संगठन के सभी समर्पित कार्यकर्ताओं एवं सदस्यों से अपेक्षा है कि वे राष्ट्रीय नेतृत्व के निर्देशों का पूर्ण सम्मान करते हुए संगठन की एकता और गरिमा को बनाए रखने में अपना सहयोग प्रदान करेंगे। यह आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा।पटना से नीरज उपाध्याय की रिपोर्ट
गोपालगंज में नल-जल योजना की जमीनी हकीकत परखने के लिए जिलेभर में व्यापक औचक निरीक्षण कराया गया। बिहार सरकार के निर्देश और जिलाधिकारी समीर सौरभ के निर्देश पर जिला, अनुमंडल और प्रखंड स्तर के करीब 230 अधिकारियों को अलग-अलग पंचायतों में भेजा गया। अधिकारियों ने जिले के सभी 14 प्रखंडों की संबंधित पंचायतों में पहुंचकर नल-जल योजना की वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान योजना के संचालन, जलापूर्ति की स्थिति, पानी से जुड़ी संरचनाओं और आम लोगों को मिल रहे लाभ की जमीनी स्थिति की जांच की गई।निरीक्षण के दौरान अधिकारियों ने यह भी देखा कि संबंधित योजनाएं धरातल पर किस स्थिति में संचालित हो रही हैं और लोगों को नियमित रूप से पेयजल की सुविधा मिल रही है या नहीं। जिलाधिकारी के निर्देश पर निरीक्षण से जुड़ी जानकारी और जांच प्रतिवेदन ऑनलाइन दर्ज किया गया, ताकि जिले में नल-जल योजनाओं की वास्तविक स्थिति का समेकित आकलन किया जा सके।डीएम समीर सौरभ ने कहा कि नल-जल योजना का उद्देश्य प्रत्येक परिवार तक नियमित और गुणवत्तापूर्ण पेयजल उपलब्ध कराना है। इसके लिए योजनाओं का धरातलीय निरीक्षण कर कमियों की पहचान की जा रही है और आवश्यक सुधार की कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। यानि गोपालगंज में नल-जल योजना को लेकर प्रशासन ने सीधे धरातल पर पहुंचकर व्यवस्था की जांच की है। अब निरीक्षण रिपोर्ट के आधार पर सामने आने वाली कमियों को दूर करने की कार्रवाई की जाएगी।गोपालगंज से नमो नारायण मिश्रा की रिपोर्ट
सुपौल- कोसी नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है, जिससे नदी किनारे बसे इलाकों में लोगों की चिंता बढ़ गई है। बढ़ते जलस्तर को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट है और संवेदनशील क्षेत्रों पर नजर रखी जा रही है। डीएम सावन कुमार ने कोसी बराज पर नेपाल और भारतीय अधिकारियों के साथ बैठक कर नदी के जलप्रवाह और संभावित स्थिति की समीक्षा की। डीएम ने बताया कि फिलहाल कोसी बराज से 2.54 लाख क्यूसेक पानी गुजर रहा है, जो इस सीजन में अब तक का सर्वाधिक जलप्रवाह है। जलप्रवाह में और वृद्धि की संभावना जताई गई है। पूर्वानुमान के मुताबिक कोसी बराज पर पानी का डिस्चार्ज 3.30 लाख क्यूसेक तक पहुंच सकता है।बैठक में नेपाल और भारत के संबंधित अधिकारियों ने कोसी नदी के जलप्रवाह, बराज की स्थिति और आगे की संभावित परिस्थितियों को लेकर जानकारी साझा की। प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर और बराज से निकलने वाले पानी की लगातार निगरानी की जा रही है। डीएम ने कहा कि फिलहाल स्थिति सामान्य है, लेकिन पानी के बढ़ते प्रवाह को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। संभावित स्थिति को देखते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक तैयारियां रखने और लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं।कोसी नदी के जलप्रवाह में बढ़ोतरी के कारण बराज और आसपास के इलाकों में प्रशासन की निगरानी बढ़ा दी गई है। अधिकारियों के स्तर से जलप्रवाह और मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते जरूरी कदम उठाए जा सकें। फिलहाल प्रशासन ने लोगों से घबराने के बजाय सतर्क रहने की अपील की है। कोसी बराज से पानी के डिस्चार्ज और आने वाले दिनों में नदी के रुख पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है।सुपौल से विष्णु गुप्ता की रिपोर्ट
सदियों पुरानी देवी मंदिर से जुड़ी कई रहस्यमयी और लोक आस्था से भरी कहानियां आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं... पटना से महज 35 किलोमीटर दूर यह देवी मंदिर स्थित है.. जहां आज भी मां की पूजा किसी भव्य मंदिर में नहीं.. बल्कि एक पवित्र पिंड के रूप में होती है... अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों के बीच मौजूद इस स्थान को लेकर करीब चार सौ साल पुरानी मान्यताएं हैं.. हर मंदिर की अपनी एक परंपरा होती है... मां वन देवी के दरबार की भी एक खास परंपरा है... मनोकामना की चुनरीभक्तों की आस्था और रहस्यमयी किस्सों से जुड़ा स्थानआस्था और रहस्य से जुड़ी कहानियां हमेशा लोगों का ध्यान खींचती हैं। पटना से करीब 35 किलोमीटर दूर बिहटा इलाके में भी एक ऐसा देवी स्थान मौजूद है। अमहारा, राघोपुर और कंचनपुर गांवों के संगम पर मौजूद इस स्थान को लेकर स्थानीय स्तर पर करीब चार सौ साल पुरानी मान्यताएं प्रचलित हैं। इस देवी स्थान की खास बात यह है कि यहां मां की पूजा किसी भव्य मंदिर में स्थापित प्रतिमा के रूप में नहीं, बल्कि एक पवित्र पिंड के रूप में की जाती है। दूर दराज के इलाके में स्थित होने के बावजूद स्थानीय लोगों की आस्था इस स्थान से गहराई से जुड़ी हुई है। स्थानीय लोगों के अनुसार सूर्यास्त के बाद लोग इस इलाके में जाने से आज भी बचते है।‘वन’ फिल्म से कैसे जुड़ रहा है इस जगह का नाम?हाल के दिनों में वन फिल्म को लेकर इस देवी स्थान की चर्चा भी सामने आ रही है। स्थानीय स्तर पर फिल्म की कहानी और इस स्थान से जुड़ी मान्यताओं के बीच समानता की बातें कही जा रही हैं। खास तौर पर जंगल, रहस्य और आस्था से जुड़े तत्वों को लेकर लोग इस जगह को फिल्म से जोड़कर देख रहे हैं। हालांकि, फिल्म की कहानी सीधे तौर पर इसी देवी स्थान के इतिहास पर आधारित है, इसकी आधिकारिक पुष्टि सामने आने तक इसे स्थानीय चर्चा और मान्यता के तौर पर ही देखा जाना चाहिए।मां से मनोकामना पूरी होने की है मान्यतायह पवित्र स्थान लंबे समय से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र रहा है। यहां पहुंचने वाले लोग मां की पूजा-अर्चना करते हैं और अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए प्रार्थना करते हैं। मान्यता है कि वन देवी माँ अपने भक्तों की रक्षा करती हैं और उनकी मनोकामनाएं पूरी करती हैं। वन देवी से जुड़े कई किस्से और चमत्कार आज भी स्थानीय लोगों की आस्था का हिस्सा हैं। अब ‘वन’ फिल्म को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच एक बार फिर इस प्राचीन देवी स्थान का जिक्र हो रहा है। यही वजह है कि स्थानीय लोगों के साथ-साथ इस रहस्यमयी स्थान को जानने में लोगों की दिलचस्पी बढ़ रही है।स्पेशल रिपोर्ट: पटना डेस्क
गयाजी- मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने शुक्रवार को प्रसिद्ध विष्णुपद मंदिर में दर्शन और विशेष पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने मंदिर के गर्भगृह में विधि-विधान के साथ पूजा की और भगवान विष्णु का आशीर्वाद लिया। इस दौरान उन्होंने मंदिर की धार्मिक महत्ता के बारे में भी जानकारी ली। मुख्यमंत्री के साथ उपमुख्यमंत्री विजय चौधरी, कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, मंत्री दिलीप जायसवाल समेत कई नेता और अधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री के विष्णुपद मंदिर पहुंचने को लेकर मंदिर परिसर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के विशेष इंतजाम किए गए थे। इस दौरान बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती की गई और मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन पूरी तरह अलर्ट पर है।गयाजी से प्रदीप सिंह की रिपोर्ट
पूर्णिया- वंदे मातरम् के 150वें वर्ष के उपलक्ष्य में पूर्णिया स्थित विद्या विहार कैरियर प्लस में शुक्रवार को विशेष सामूहिक गायन कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों में राष्ट्रभक्ति, राष्ट्रीय एकता, अखंडता, मातृभूमि के प्रति सम्मान और भारतीय सांस्कृतिक चेतना की भावना को मजबूत करना रहा। कार्यक्रम में संस्थान के करीब 160 छात्र-छात्राओं ने उत्साह और अनुशासन के साथ हिस्सा लिया। विद्यार्थियों ने एक स्वर, एक लय और एक भाव के साथ राष्ट्रगीत वंदे मातरम् का सामूहिक गायन किया। सामूहिक गायन से पूरा परिसर राष्ट्रभक्ति के भाव से गूंज उठा।कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों को ‘वंदे मातरम्’ के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रीय महत्व की जानकारी दी गई। उन्हें बताया गया कि ‘वंदे मातरम्’ भारतीय राष्ट्रीय चेतना और स्वतंत्रता आंदोलन के इतिहास में विशेष स्थान रखता है। इसके माध्यम से मातृभूमि के प्रति सम्मान, राष्ट्र के प्रति समर्पण, एकता और स्वाभिमान की भावना को अभिव्यक्ति मिली है। कार्यक्रम के जरिए विद्यार्थियों को यह संदेश भी दिया गया कि शिक्षा का उद्देश्य केवल शैक्षणिक ज्ञान हासिल करना नहीं, बल्कि जिम्मेदार, अनुशासित और संवेदनशील नागरिक तैयार करना भी है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों को अपनी संस्कृति, इतिहास और राष्ट्रीय मूल्यों से जोड़ने का माध्यम बनते हैं।विद्या विहार कैरियर प्लस के निदेशक अभियंता प्रशांत शंकर ने कहा कि विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में शिक्षा के साथ राष्ट्रप्रेम, अनुशासन, सामाजिक जिम्मेदारी और सांस्कृतिक मूल्यों की भी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि युवा शक्ति देश की बड़ी ताकत है और विद्यार्थियों को अपने ज्ञान एवं प्रतिभा का सकारात्मक इस्तेमाल समाज और राष्ट्र के विकास में करना चाहिए। वहीं, संस्थान के जनसंपर्क पदाधिकारी आशीष झा ने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ के 150वें वर्ष पर आयोजित सामूहिक गायन विद्यार्थियों के लिए केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि राष्ट्र के प्रति सम्मान, एकता, अनुशासन और जिम्मेदारी की भावना को समझने का अवसर है।कार्यक्रम के सफल आयोजन में केंद्र समन्वयक मनीष रंजन के साथ वर्षा सिंह, बबिता दास, काजल सिंह, ऋषि राज, दीपक कुमार और श्वेता कुमारी की महत्वपूर्ण भूमिका रही। सभी ने विद्यार्थियों की सहभागिता सुनिश्चित करने और कार्यक्रम की व्यवस्थाओं को सुचारू बनाए रखने में योगदान दिया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों ने राष्ट्र की एकता, अखंडता, गौरव और सांस्कृतिक विरासत के प्रति सम्मान बनाए रखने तथा समाज और राष्ट्र के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का ईमानदारी से निर्वहन करने का संकल्प लिया। एक समय, एक स्वर, एक लय’ की भावना के साथ आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए यादगार रहा और पूरे परिसर में राष्ट्रभक्ति एवं राष्ट्रीय एकता का संदेश देखने को मिला।पूर्णिया से जे पी मिश्रा की रिपोर्ट
पटना में महिलाओं की चेन स्नेचिंग करने वाले एक ऐसे गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है, जो वारदात के दौरान पुलिस को चकमा देने के लिए अनोखा तरीका अपनाता था। गिरोह के बाइक सवार बदमाश अपने साथ एक लड़की को भी बाइक पर बैठाकर चलते थे, ताकि देखने वालों को उन पर शक न हो।मामला कंकड़बाग थाना क्षेत्र का है। पुलिस के मुताबिक, गिरोह के सदस्य बाइक से महिलाओं को निशाना बनाते और मौका मिलते ही उनकी सोने की चेन झपटकर फरार हो जाते थे। लड़की के साथ होने की वजह से आरोपी सामान्य राहगीरों की तरह नजर आते थे और इसी का फायदा उठाकर वारदात को अंजाम देते थे।कंकड़बाग थाना पुलिस ने कार्रवाई करते हुए कुल 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने इनके पास से चार सोने की चेन भी बरामद की हैं। अब पुलिस गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर गिरोह से जुड़े अन्य मामलों और सदस्यों की जानकारी जुटा रही है।इस गिरोह के वारदात करने के तरीके ने पुलिस को भी हैरान किया है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने पटना में कितनी अन्य चेन स्नेचिंग की घटनाओं को अंजाम दिया है।पटना से विवेक कुमार की रिपोर्ट
बिहार के नरकटियागंज से पुलिस ने एक ऐसी गिरफ्तारी की है जिसने पुलिस को भी हैरान कर दिया। दरअसल साल 2006 के डकैती कांड का आरोपी सुरेंद्र ठाकुर करीब दो दशक से पुलिस की पकड़ से दूर था। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने अपना हुलिया तक बदल लिया। दाढ़ी-बाल बढ़ाए, साधु का भेष धारण किया और नेपाल के अलग-अलग इलाकों में ठिकाना बनाकर रहने लगा। लेकिन आखिरकार पुलिस की एक गुप्त सूचना ने उसकी पूरी कहानी का अंत कर दिया।नरकटियागंज पुलिस ने बताया कि डकैती के मामले में फरार होने के बाद सुरेंद्र ठाकुर नेपाल चला गया था। वहां उसने पुलिस से बचने के लिए साधु का रूप अपना लिया और लगातार अपने ठिकाने बदलता रहा। लंबे समय तक वह इसी पहचान के सहारे पुलिस की नजरों से बचता रहा। इसी बीच शिकारपुर पुलिस को आरोपी के बारे में गुप्त सूचना मिली। शिकारपुर थानाध्यक्ष मनोज कुमार सिंह ने एसआई राजेश कुमार के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की। टीम ने चमुआ चौक पर घेराबंदी की और मौके पर सुरेंद्र ठाकुर को दबोच लिया।गिरफ्तार सुरेंद्र ठाकुर लंगड़ा-दिउलिया गांव का रहने वाला है। उसके खिलाफ बलथर थाना में वर्ष 2006 में डकैती का मामला दर्ज है। पुलिस के अनुसार, अदालत से उसके खिलाफ स्थायी वारंट भी जारी था और वह लंबे समय से फरार चल रहा था। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के दौरान आरोपी ने वर्ष 2001 से डकैतों के साथ रहने और कई आपराधिक घटनाओं में शामिल होने की बात बताई है। हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होगी। करीब दो दशक तक पहचान छिपाकर पुलिस से बचता रहा आरोपी आखिरकार शिकारपुर पुलिस की घेराबंदी में फंस गया। गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।नरकटियागंज से अजय पाण्डेय की रिपोर्ट
गयाजी- अंतरराष्ट्रीय पितृपक्ष मेला महासंगम 2026 का आगाज 25 सितंबर से होने जा रहा है। यह मेला 10 अक्टूबर तक चलेगा। पितृपक्ष के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों के साथ-साथ विदेशों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु गया और बोधगया पहुंचेंगे और अपने पितरों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान और तर्पण करेंगे। पितृपक्ष मेले को लेकर गया और बोधगया में तैयारियां अंतिम चरण में हैं। विष्णुपद मंदिर श्रद्धालुओं के लिए प्रमुख पिंडदान स्थल रहेगा। इसके अलावा बोधगया की तीन प्रमुख पिंडदान वेदियों पर भी बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना है।पितृपक्ष में गया में पिंडदान को लेकर धार्मिक मान्यता है कि यहां फल्गु नदी, विष्णुपद मंदिर और पिंडदान वेदियों पर विधि-विधान से श्राद्ध और पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है। मान्यता के अनुसार, गया को पितृश्राद्ध के प्रमुख तीर्थस्थलों में माना जाता है और यहां पिंडदान करने से पूर्वजों का आशीर्वाद प्राप्त होता है। यह धार्मिक आस्था है; इसे वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित तथ्य के रूप में नहीं माना जाता।श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को देखते हुए प्रशासन की ओर से सुरक्षा, यातायात, साफ-सफाई , बिजली सेवा और अन्य व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने का काम किया जा रहा है। पितृपक्ष मेले के दौरान गया में देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की सुविधा प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती होगी। इसे देखते हुए संबंधित विभागों को व्यवस्थाएं समय पर पूरा करने पर जोर दिया जा रहा है। कुल मिलाकर, 25 सितंबर से शुरू होने वाले अंतरराष्ट्रीय पितृपक्ष मेला महासंगम को लेकर गया पूरी तरह तैयार है। अब देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के पहुंचने का इंतजार है।गयाजी से मनोज सिंह की रिपोर्ट
सुपौल- कोशी नव निर्माण मंच के आह्वान पर कोशी तटबंध के भीतर एकडेरा घाट पर कोशी बाढ़ पीड़ितों का एक दिवसीय जल सत्याग्रह आयोजित हुआ। जल सत्याग्रह में मरौना अंचल के सिसौनी पंचायत के एकडेरा, जोबहां, सिसौनी पलार, किशनपुर अंचल के बैराहा पंचायत के, बौराहा, गोढ़ियारी, मानिकपुर व बुर्जा मुसहरी, नोआबाखर पंचायत के परसाही, सिमराहा इत्यादि गांवों के बाढ़ पीड़ित एकत्र होकर बाढ़ की अपनी पीड़ा बताए। कोशी नदी में खड़ा होकर लोग बताए कि मानसून आने के बाद से कोशी तटबंध के भीतर हमलोगों के गांवों में पानी भरा है। घर, आंगन, रास्ते, चारों तरफ पानी ही पानी है। एक घर से दूसरे घर जाने के लिए नावों का ही सहारा है। महिला, बच्चे, बूढ़े, बीमार की स्थिति खराब है। पानी लगने से सभी परेशान है तो पशु भी पानी से बीमार हो रहे हैं। फसल तो इस साल किसी की नहीं बची है। सब पानी से बर्बाद हो गई है पर बाढ़ ही नहीं मान रही। प्रशासन को हमलोगों के गांव आकर समस्या सुननी चाहिए। बिहार सरकार के आपदा प्रबन्धन विभाग के पत्रांक 3340 दिनांक 3/9/16 में स्पष्ट उल्लेख है कि जब कोई मोहल्ला/ टोला एवं गांव नदी के पानी से चार-पांच दिनों तक चारो तरफ से घिर जाए, वहां पहुंचने के लिए कोई रास्ता नहीं बचे, इस घटना से लोगों का सामान्य जन-जीवन कुप्रभावित हो जाए तो वैसे मोहल्ले/ टोले एवं गाँव को बाढ़ पीड़ित माना जाएगा। राज्य सरकार के प्रावधानों को जिला प्रशासन अनुपालन नहीं कर रहा है और अन्याय कर रहा है। जबकि हमलोगों के विधायको में एक माननीय उप मुख्यमंत्री और वित्त मंत्री जी है इनको बिहार के बाढ़ पीड़ितों की चिंता है पर अपने विधान सभा और जिले के बाढ़ पीड़ितों को भूल गए। इसीलिए पानी में खड़ा होकर दुःख बताना पड़ रहा है।लोगों ने जिले को बाढ़ घोषित कर मानक संचालन प्रक्रिया और मानदर के तहत जी. आर. की राशि देनें, फसल क्षति का इनपुट अनुदान देनें, जिनके पास बाहर बसने को जगह नहीं है उन्हें बाहर पुनर्वासित कराने, तटबंध के भीतर स्वास्थ्य सुविधाओं की व्यवस्था करने, मेडिकल और पशुओं का निःशुल्क कैंप कराने, कोशी पीड़ित विकास प्राधिकार को पुनर्जीवित करने का प्रयास कराने सहित कोशी की छाड़न धाराओं को पुनर्जीवित कर कोशी का समाधान की दिशा में कार्य करने की मांग की।
पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी प्रसाद यादव ने जमुई में छात्रा के साथ हुई कथित छेड़खानी और अभद्रता की घटना को लेकर बिहार सरकार पर जमकर हमला बोला। तेजस्वी यादव ने कहा कि घटना का जो वीडियो सामने आया है, वह शर्मसार करने वाला है और इससे पूरे देश में बिहार की बदनामी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मामले को किसी भी सूरत में सामान्य या छिटपुट घटना बताना उचित नहीं है। जमुई की घटना के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है ।तेजस्वी यादव ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के पुराने बयान का जिक्र करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री ने कहा था कि रात में कहीं भी चले जाइए, अगर कोई छू देगा तो वे इस्तीफा दे देंगे। तेजस्वी ने कहा कि अगर मुख्यमंत्री अपने जुबान के पक्के हैं तो अब इस्तीफा देकर अपने बयान पर कायम रहें। प्रेस कॉन्फ्रेंस में तेजस्वी यादव एक महीने की अखबारों की कटिंग लेकर पहुंचे और उन्होंने बिहार के अलग-अलग जिलों में अपराध और महिलाओं के खिलाफ घटनाओं का हवाला देते हुए सरकार पर सवाल खड़े किए। तेजस्वी ने कहा कि बिहार में ऐसे सैकड़ों मामले सामने आ रहे हैं, लेकिन पुलिस की कार्रवाई और उसके नतीजे को लेकर सरकार को जवाब देना चाहिए। उन्होंने मुख्यमंत्री के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि बिहार में महिलाएं सुरक्षित हैं।तेजस्वी यादव ने कहा कि जमुई की घटना में जात-पात नहीं होना चाहिए। उन्होंने आरोपियों के खिलाफ कड़ी से कड़ी कार्रवाई की मांग करते हुए कहा कि अपराधी की कोई जात नहीं होती और दोषियों को कानून के मुताबिक सजा मिलनी चाहिए फांसी देना चाहिए उन्होंने यह भी कहा कि मामले में सात लोगों की भूमिका सामने आई है तो प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि अब तक किसके खिलाफ क्या कार्रवाई हुई है।तेजस्वी यादव ने केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय के संसद में दिए गए जवाब का हवाला देते हुए बिहार में अपराध की स्थिति पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस व्यवस्था में राजनीतिक हस्तक्षेप हो रहा है और थानेदारों के तबादले तक मुख्यमंत्री आवास से होने का आरोप लगाया। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ईमानदार पुलिस अधिकारियों को परेशान किया जा रहा है और भ्रष्ट पुलिसकर्मियों को संरक्षण मिल रहा है।जमुई मामले में जातीय राजनीति को लेकर तेजस्वी यादव ने पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी के बयान पर भी प्रतिक्रिया दी। तेजस्वी ने कहा कि हर घटना में जाति जोड़ना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि जिस दिन जमुई में घटना हुई, उस दिन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी एक सम्मेलन में थे। तेजस्वी ने आरोप लगाया कि जो लोग इस मामले में जाति का मुद्दा उठा रहे हैं, उन्हें समझना चाहिए कि इससे अपराधियों को संरक्षण देने का संदेश जाता है। तेजस्वी यादव ने सरकार से जमुई मामले में पूरी कार्रवाई सार्वजनिक करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की मांग की।पटना से नीरज उपाध्याय की रिपोर्ट
कठपुतली का इतिहास काफी पुराना है. महान महर्षियों की पुस्तक और कई प्रामाणिक जगहों पर इसका उल्लेख मिलता है. इसकी शुरुआत जहां से भी हुई हो लेकिन ये कला सालों पुरानी है. बदलते दौर के साथ इस कला में भी काफी बदलाव आया. आधुनिकीकरण के इस युग में जहां इस कला को और विकसित होना चाहिए. वही यह कला पिछड़ता जा रहा है. और कठपुतली कला धीरे-धीरे इतिहास के पन्नों में सिमटती जा रही है। मनोरंजन के साथ संदेश देने का मजबूत माध्यम धागे और बेज़ुबान काठ के जरिए लोगों तक मनोरंजन के साथ सामाजिक और सांस्कृतिक संदेश पहुंचाने वाली यह परंपरा अब पहले जैसी दिखाई नहीं देती।कठपुतली भारत की पारंपरिक कथा-कथन परंपराओं में महत्वपूर्ण स्थान रखती है। संगीत, संवाद, गायन और दृश्य प्रस्तुति के माध्यम से कलाकार नैतिक संदेशों को लोगों तक पहुंचाते रहे हैं. भारत में कठपुतली की अलग-अलग क्षेत्रीय शैलियां रही हैं और इन परंपराओं का ज्ञान अक्सर पीढ़ी-दर-पीढ़ी कलाकार परिवारों के जरिए आगे बढ़ता रहा है।आकर्षण का केंद्र हुआ करता था कठपुतली कला बिहार के भी कई इलाकों में मेलों और धार्मिक आयोजनों के दौरान कठपुतली का मंच लोगों के आकर्षण का केंद्र हुआ करता था. कठपुतली केवल मनोरंजन का साधन नहीं थी. कलाकार अपनी प्रस्तुति में लोककथाओं और सामाजिक विषयों को शामिल करते थे. गायन और संवाद के साथ पुतलियों की गतिविधियों के जरिए ऐसी कहानियां प्रस्तुत की जाती थीं, जिन्हें दर्शक आसानी से समझ और याद रख सकें।आधुनिकता के दौर में बदला दर्शकों का रुझानबदलते दौर में टेलीविजन, मोबाइल फोन, इंटरनेट और डिजिटल मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव ने इस लोक कला के सामने नई चुनौती खड़ी की है. कठपुतली कला के जानकार बताते है कि बदलते दर्शक और मनोरंजन के दूसरे माध्यमों के दबाव के कारण कई कठपुतली कलाकारों ने प्रस्तुतियों की अवधि कम की है और कुछ कलाकारों ने दूसरे पेशों का रुख भी अख्तियार कर लिया है।नई पीढ़ी को भी जुड़ना जरूरीकठपुतली कला को बचाने के लिए केवल पुराने मंचों को याद करना पर्याप्त नहीं है. जरूरत है कि इस कला को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए. स्कूलों, सांस्कृतिक कार्यक्रमों, मेलों और लोक उत्सवों में कठपुतली प्रस्तुतियों को जगह मिलने से कलाकारों को मंच और दर्शक दोनों मिल सकते हैं। अगर समय रहते इसे संरक्षण और नए मंच नहीं मिले, तो आने वाली पीढ़ियां इस कला को सिर्फ तस्वीरों और किताबों में ही देख पाएंगी।स्पेशल रिपोर्ट: पटना डेस्क
पूर्णिया- बिहार की समृद्ध लोक संस्कृति के संरक्षण, संवर्धन और इसे जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से कला भवन, पूर्णिया स्थित लोक कला केंद्र के प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन केंद्र की ओर से एक विशेष सात दिवसीय लोक कला प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। 20 सितंबर से शुरू हुई यह कार्यशाला 26 सितंबर तक चलेगी।इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य बिहार की प्राचीन एवं पारंपरिक लोक परंपरा 'झिझिया' से नई पीढ़ी की नवयुवतियों को अवगत कराना और इस लोक नृत्य के माध्यम से उन्हें राष्ट्रीय फलक पर एक नई पहचान दिलाना है। इस विशेष प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन बिहार कला पुरस्कार से सम्मानित वरिष्ठ कलाकार विश्वजीत कुमार सिंह के कुशल नेतृत्व में किया जा रहा है। कार्यशाला में लगभग 25 कला साधक और युवा कलाकार हिस्सा ले रहे हैं, जिन्हें झिझिया नृत्य की बारीकियों, लय और भाव-भंगिमाओं का गहन प्रशिक्षण दिया जा रहा है।युवा कलाकारों को निखारने और झिझिया नृत्य की पारंपरिक शैली से रूबरू कराने के लिए क्षेत्र के दिग्गज कलाकार बतौर प्रशिक्षक जुड़े हैं। प्रशिक्षण देने वालों में प्रमुख रूप से काजल देवनाथ, दीपप्रिया, रिया डे, उदय कुमार (पटना के चर्चित लोक कलाकार) कार्यशाला के दौरान प्रतिभागियों को झिझिया नृत्य के ऐतिहासिक व सांस्कृतिक महत्व के साथ-साथ इसके गायन और मंच प्रस्तुति का भी अभ्यास कराया जा रहा है, ताकि बिहार की यह पारंपरिक कला धरोहर के रूप में भावी पीढ़ी तक सुरक्षित पहुंच सके।पूर्णिया से जे पी मिश्रा की रिपोर्ट
छपरा- जिस डबल डेकर को छपरा शहर की ट्रैफिक व्यवस्था की तस्वीर बदलने और लोगों को रोज-रोज के जाम से मुक्ति दिलाने का सपना दिखाकर शुरू किया गया था, वही परियोजना अब शहरवासियों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। 2018 में शुरू हुआ निर्माण आठ साल बाद भी पूरा नहीं हो सका है। तारीखें बढ़ती गईं, लागत बढ़ती गई, लेकिन लोगों की परेशानी जस की तस बनी हुई है। परियोजना की शुरुआत करीब 411.31 करोड़ रुपये की लागत से हुई थी और इसे जून 2022 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था। निर्धारित समय बीत गया, लेकिन काम पूरा नहीं हुआ। इसके बाद समय-सीमा आगे बढ़ती रही। अब विभागीय स्तर पर मार्च 2027 तक परियोजना पूरी करने का लक्ष्य बताया जा रहा है।डबल डेकर की मूल लागत 411.31 करोड़ रुपये थी। निर्माण में देरी और परियोजना में हुए बदलावों के बीच इसकी संशोधित लागत बढ़कर करीब 696.26 करोड़ रुपये हो गई। यानी सरकारी खजाने पर करीब 285 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ बढ़ गया।सवाल यह है कि जिस परियोजना को तय समय में पूरा कर शहर को राहत देनी थी, वह वर्षों बाद भी अधूरी क्यों है? लागत बढ़ने के साथ क्या लोगों के इंतजार की कोई कीमत तय है? निर्माण के कारण शहर के प्रमुख हिस्सों में यातायात व्यवस्था लगातार प्रभावित हो रही है। गांधी चौक, मौना चौक, नगरपालिका चौक समेत आसपास के इलाकों में लोगों को जाम, धूल, निर्माण सामग्री, बैरिकेडिंग और जलजमाव जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।व्यस्त समय में स्थिति और खराब हो जाती है। वाहन रेंगते हैं और लोगों को कुछ किलोमीटर की दूरी तय करने में भी काफी समय लग जाता है। स्थानीय दुकानदारों के लिए परेशानी और बढ़ गई है। निर्माण के कारण दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच प्रभावित होने की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।निर्माणाधीन हिस्सों में जल निकासी की समस्या भी लोगों के लिए मुसीबत बनी हुई है। बारिश के बाद कई जगह पानी जमा होने से पैदल चलने वालों और वाहन चालकों की परेशानी बढ़ जाती है। धूल और कीचड़ के बीच लोग रोजाना इस अधूरे प्रोजेक्ट का खामियाजा भुगत रहे हैं। निर्माण की धीमी रफ्तार का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि सितंबर 2026 में प्रशासन को निर्माण एजेंसी को तीन शिफ्टों में 24 घंटे काम कराने, मशीन और मजदूरों की संख्या बढ़ाने तथा लंबित कार्यों को तेजी से पूरा करने का निर्देश देना पड़ा। यानि जिस परियोजना को वर्षों पहले पूरा हो जाना चाहिए था, उसके लिए अब दिन-रात काम कराने की जरूरत पड़ रही है, छपरा के लोगों को डबल डेकर से शिकायत उसकी उपयोगिता से नहीं, बल्कि उसके लंबे निर्माण काल और उससे पैदा हुई परेशानियों से है। लोगों को आज भी उम्मीद है कि इसके पूरा होने के बाद शहर में जाम की समस्या कम होगी और यातायात व्यवस्था बेहतर होगी।लेकिन सवाल अब सिर्फ यह नहीं है कि डबल डेकर कितना बड़ा प्रोजेक्ट है। सवाल यह है कि 411 करोड़ से शुरू हुई परियोजना 696 करोड़ तक पहुंचने के बाद भी आखिर कब पूरी होगी?छपरा से मुकुंद पाठक की रिपोर्ट
पटना- बिहार में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की अध्यक्षता में कैबिनेट की बैठक शुरू हो गई है। बैठक मंत्रिमंडल सचिवालय में आयोजित की जा रही है।बैठक में सरकार के विभिन्न विभागों से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों और एजेंडों पर चर्चा होने की संभावना है। संबंधित विभागों के प्रस्तावों पर कैबिनेट की मुहर लग सकती है।बैठक में लिए जाने वाले फैसलों पर सभी की नजरें टिकी हैं। कैबिनेट बैठक समाप्त होने के बाद सरकार की ओर से लिए गए महत्वपूर्ण निर्णयों की जानकारी दी जाएगी।बैठक में किन प्रस्तावों पर लगी मुहर और क्या हुए बड़े फैसले, इसकी पूरी जानकारी बैठक के बाद सामने आएगी