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विवादों में CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग : राहुल गांधी से मिले रांची के छात्र सार्थक सिद्धांत,अनियमितताओं के आरोपों पर चर्चा

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नई दिल्ली/रांची: लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने रांची के 17 वर्षीय छात्र सार्थक सिद्धांत से मुलाकात कर CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली और उससे जुड़ी टेंडर प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं के आरोपों पर विस्तृत चर्चा की. राहुल गांधी ने छात्र द्वारा जुटाए गए तथ्यों और दस्तावेजों की जानकारी ली और पूरे मामले को गंभीरता से सुना.

संसद भवन में संसदीय समिति के समक्ष भी रखी अपनी बात

सार्थक सिद्धांत झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले हैं और उन्होंने इसी वर्ष CBSE बोर्ड से 12वीं की परीक्षा दी है. बताया जा रहा है कि नए मूल्यांकन सिस्टम से प्रभावित छात्रों में शामिल सार्थक ने री-इवैल्यूएशन प्रक्रिया के तहत अपनी स्कैन की गई उत्तर पुस्तिका मंगाई थी. उत्तर पुस्तिका का अध्ययन करने के दौरान उन्हें कुछ विसंगतियों का संदेह हुआ,जिसके बाद उन्होंने सीबीएसई के टेंडर दस्तावेजों की खुद जांच शुरू की. इसी मुद्दे को लेकर सार्थक सिद्धांत को मंगलवार को संसद भवन में संसदीय समिति के समक्ष अपनी बात रखने के लिए आमंत्रित किया गया था,जहां उन्होंने मूल्यांकन प्रणाली और टेंडर प्रक्रिया से जुड़े अपने निष्कर्ष साझा किए.

टेंडर नियमों में बदलाव कर विशेष कंपनी को फायदा पहुंचाने का आरोप

सार्थक सिद्धांत का आरोप है कि विभिन्न टेंडर दस्तावेजों की तुलना करने पर कई ऐसी खामियां और बदलाव सामने आए है,जो किसी विशेष सेवा प्रदाता कंपनी को लाभ पहुंचाने वाले प्रतीत होते हैं. उन्होंने कई दिनों तक दस्तावेजों का अध्ययन कर अपनी आपत्तियों और निष्कर्षों को एक ब्लॉग के माध्यम से सार्वजनिक किया.

एक विशेष कंपनी के लिए पात्रता हासिल करना आसान हो गया

छात्र के अनुसार,फरवरी 2025 में जारी पहले टेंडर में टीसीएस और कोएम्प्ट एडुटेक नाम के दो कंपनियों ने आवेदन किया था,लेकिन बाद में टेंडर को सार्वजनिक रिकॉर्ड से हटाकर नए नियमों के साथ दोबारा जारी किया गया. सार्थक का आरोप है कि ब्लैकलिस्टिंग, खराब प्रदर्शन और टर्नओवर से जुड़े नियमों में ऐसे बदलाव किए गए, जिससे एक विशेष कंपनी के लिए पात्रता हासिल करना आसान हो गया. हालांकि,सीबीएसई की ओर से इन आरोपों पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है.

वहीं, राहुल गांधी से मुलाकात और संसदीय समिति के समक्ष प्रस्तुति के बाद यह मामला शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस का विषय बन गया है.