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कैग की रिपोर्ट में खुलासा : बिहार अब राजस्व घाटे वाले राज्यों में शामिल,बढ़ते सरकारी खर्च ने बदली स्थिति

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BIHAR NEWS:बिहार की वित्तीय स्थिति को लेकर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की हालिया रिपोर्ट ने चिंता बढ़ा दी है. रिपोर्ट के अनुसार बिहार अब राजस्व बचत वाले राज्यों की श्रेणी से निकलकर राजस्व घाटे वाले राज्यों में शामिल हो गया है.एक समय राज्य अपने राजस्व बजट में बचत दर्ज कर रहा था,लेकिन हाल के वर्षों में बढ़ते सरकारी खर्च ने इस स्थिति को बदल दिया है.

सरकार की आय की तुलना में खर्च तेजी से बढ़ा

कैग की रिपोर्ट के मुताबिक वेतन, पेंशन और विभिन्न सामाजिक कल्याण योजनाओं पर लगातार बढ़ रहे खर्च ने राज्य के राजस्व संतुलन को प्रभावित किया है. सरकार की आय की तुलना में खर्च अधिक तेजी से बढ़ा है,जिसके कारण राजस्व अधिशेष समाप्त होकर घाटे में बदल गया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कल्याणकारी योजनाओं पर बढ़ते व्यय और अपेक्षित राजस्व प्राप्ति नहीं होने से वित्तीय दबाव लगातार बढ़ रहा है.

राज्य सरकार को लेना पड़ रहाऋण

राजस्व घाटे की भरपाई के लिए राज्य सरकार को विकास कार्यों और अन्य खर्चों के लिए ऋण लेना पड़ रहा है. इसका सीधा असर राज्य की कुल देनदारियों और सार्वजनिक ऋण पर पड़ा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आय और व्यय के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले वर्षों में वित्तीय चुनौतियां और गंभीर हो सकती हैं.

वित्तीय वर्ष 2025 में केवल 13 राज्यों ने राजस्व अधिशेष दर्ज किया

कैग की रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि वित्तीय वर्ष 2025 में केवल 13 राज्यों ने राजस्व अधिशेष दर्ज किया,जबकि पिछले वर्ष यह संख्या 16 थी. बिहार, मिजोरम और तेलंगाना ऐसे राज्य रहे जो राजस्व अधिशेष से राजस्व घाटे की स्थिति में पहुंच गए. इससे देश में वित्तीय रूप से मजबूत राज्यों की संख्या में भी कमी आई है.

रिपोर्ट राज्य सरकार के लिए मानी जा रही चेतावनी

रिपोर्ट राज्य सरकार के लिए चेतावनी मानी जा रही है. विशेषज्ञों का कहना है कि राजकोषीय अनुशासन, राजस्व संग्रह में वृद्धि और खर्चों के बेहतर प्रबंधन के जरिए ही बिहार अपनी वित्तीय स्थिति को दोबारा मजबूत बना सकता है.

पटना से वरिष्ठ संवाददाता संजय कुमार की रिपोर्ट