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BIHAR NEWS : AK-47 से लैस बालू माफिया, सीमित जवानों के भरोसे खनन विभाग, ड्रोन-CCTV के बावजूद बिहार में अवैध खनन पर सवाल

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पटना: बिहार में अवैध बालू खनन पर रोक लगाने के लिए प्रशासन की ओर से लगातार कार्रवाई और निगरानी के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर चुनौतियां अब भी बरकरार है. बालू माफिया के अत्याधुनिक हथियारों से लैस होने की बात सामने आती है, वहीं दूसरी ओर खनन विभाग सीमित सुरक्षा बल के सहारे निगरानी कर रहा है.

रिपोर्ट के अनुसार सोन की लाल बालू के अवैध कारोबार पर नियंत्रण के लिए घाटों पर निगरानी, ड्रोन, सीसीटीवी कैमरे, ई-चालान, ट्रांजिट पास, वाहनों की जांच और स्टॉक का सत्यापन जैसे इंतजाम किए गए हैं. इसके बावजूद सालभर अवैध खनन और बालू के कारोबार की शिकायतें सामने आती रहती हैं.

सबसे बड़ी चुनौती खनन विभाग के पास उपलब्ध सुरक्षा बल की संख्या को लेकर है. रिपोर्ट में बताया गया है कि विभाग के पास लाठीधारी होमगार्ड और कुछ सैप जवान हैं. वहीं, राज्य में बड़ी संख्या में बालू घाटों की निगरानी करनी होती है. केवल घाटों की सुरक्षा ही नहीं, बल्कि सेकेंडरी लोडिंग प्वाइंट और भंडारण स्थलों की निगरानी भी जरूरी है.

दूरदराज के गांवों और घाटों से अवैध खनन की सूचना मिलने पर तत्काल कार्रवाई करना भी सुरक्षा बलों की कमी के कारण चुनौतीपूर्ण हो सकता है. निगरानी व्यवस्था में मौजूद खामियों का फायदा अवैध कारोबारी उठाते हैं.

एक जिले में कार्रवाई तेज होने पर दूसरे क्षेत्र से अवैध कारोबार शुरू होने की समस्या भी सामने आती है. ऐसे में अवैध खनन रोकने के लिए पर्याप्त बल, तकनीकी निगरानी और पुलिस-प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत है.

पटना से संजय कुमार की रिपोर्ट--