BIHAR NEWS : पटना हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस संगम कुमार साहू ने बालगृह 'अपना घर', पटना का किया भ्रमण
पटना : उच्च न्यायालय, पटना के मुख्य न्यायाधीश संगम कुमार साहू ने शनिवार को समाज कल्याण निदेशालय, बिहार, पटना द्वारा संचालित बालगृह 'अपना घर', पटना का भ्रमण किया गया. उन्होंने पूरे बालगृह में घूम-घूम कर आवासित बच्चों एवं कर्मियों से बातचीत की. उनके द्वारा किस प्रकार बच्चों को संरक्षित करती है तथा कैसे उन बच्चों के रख-रखाव एवं अन्य जरूरतों को कैसे पूरा किया जाता है, इसकी जानकारी ली.
उन्होंने बच्चों के आवासन, शिक्षा एवं अन्य प्रकार की चल रही गतिविधियों को देखा तथा संतोषप्रद बताया. उन्होंने बच्चों को खूब पढ़ने तथा शिक्षकों एवं कर्मियों की बात मानने तथा कौशल सीखने के लिए प्रेरित किया. बच्चों द्वारा उनका स्वागत गान गाकर तथा पुष्प देकर सम्मानित किया गया.
बच्चों ने उनके द्वारा बनाई गई पेंटिंग न्यायाधीश को भेंट किया. न्यायाधीश ने आवासित बच्चों को अपने तरफ से कई प्रकार के उपहार अपने हाथों से दिए.
उन्होंने कहा कि "ऐसे बच्चों की सेवा एक तरह से भगवान की सेवा ही है. इसमें कर्मीगण नौकरी तो करते ही हैं साथ ही पुण्य का कार्य भी करते हैं".
इस अवसर पर बन्दना प्रेयषी,सचिव,समाज कल्याण विभाग,प्रदीप कुमार मल्लिक,रजिस्ट्रार जनरल,उच्च न्यायलय,पटना,पवन कुमार पाण्डेय,सदस्य सचिव,बिहार राज्य विधिक सेवा प्राधिकार,पटना,योगेश कुमार सागर,निदेशक,समाज कल्याण निदेशालय,रुपेश देव,प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश,व्यवहार न्यायलय,पटना पल्लवी आनंद,जिला विधिक सेवा प्राधिकार,पटना,समाज कल्याण निदेशालय,बिहार,पटना के अन्य पदाधिकारीगण उपस्थित थे.
इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग की सचिव बंदना प्रेयषी ने कहा कि समाज कल्याण निदेशालय द्वारा संचालित बालगृहों में बच्चों की सुरक्षा,देखभाल एवं समग्र विकास सर्वोच्च प्राथमिकता है. उन्होंने कहा कि विभाग यह पूर्णतः सुनिश्चित करता है कि बालगृह में आवासित प्रत्येक जरूरतमंद बच्चे को सुरक्षित वातावरण,गुणवत्तापूर्ण शिक्षा,स्वास्थ्य सुविधाएँ,पोषण एवं भावनात्मक संबल प्राप्त होता है तथा कौशल प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें समाज की मुख्य धारा में जोड़ा जाता है. उन्होंने कहा कि माननीय मुख्य न्यायाधीश के आगमन से बच्चों की प्रतिभा के संपूर्ण विकास हेतु संस्थान के कर्मियों को प्रेरणा मिलेगी.
सचिव ने बताया कि‘अपना घर’जैसे संस्थान संवेदनशील बच्चों के जीवन में आशा,आत्मविश्वास एवं नए अवसर प्रदान करने का माध्यम हैं. उन्होंने कर्मियों के समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि बच्चों की देखभाल केवल दायित्व नहीं बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व एवं मानवीय सेवा का कार्य है. विभाग सतत रूप से यह प्रयास करता रहेगा कि बच्चों को आत्मनिर्भर,शिक्षित एवं सशक्त नागरिक के रूप में विकसित किया जा सके.
पटना से अंकिता की रिपोर्ट--





