बांकीपुर में कम वोटिंग ने बढ़ाई बैचेनी : उम्मीदवारों की बढ़ी चिंता,पिछले चुनावों के रिकॉर्ड भी कम वोटिंग का दिया संकेत
पटना: बांकीपुर विधानसभा सीट पर हुए उपचुनाव में इस बार अपेक्षा से कम मतदान दर्ज होने के बाद सभी प्रमुख दलों के उम्मीदवारों की चिंता बढ़ गई है। मतदान प्रतिशत पिछले चुनाव की तुलना में कम रहने से राजनीतिक दल अब मतदाताओं के रुझान का आकलन करने में जुट गए हैं। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि कम मतदान का असर चुनाव परिणाम पर निर्णायक हो सकता है।
हालांकि बांकीपुर सीट का चुनावी इतिहास बताता है कि यहां मतदान प्रतिशत सामान्यतः कम ही रहता है। इसके बावजूद हर चुनाव में मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा है। ऐसे में इस बार भी कम वोटिंग को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दल अपने-अपने तरीके से विश्लेषण कर रहे हैं।
इस सीट पर भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नवीन का लंबे समय से दबदबा रहा है। वे पहली बार वर्ष 2006 में तत्कालीन पटना पश्चिम विधानसभा क्षेत्र के उपचुनाव में विधायक चुने गए थे। इससे पहले वर्ष 2005 के चुनाव में उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा ने भी बड़ी जीत दर्ज की थी और उन्हें कुल मतों का लगभग 69.33 प्रतिशत समर्थन मिला था।
उपचुनाव के दौरान मतदान केंद्रों पर मतदाताओं की संख्या अपेक्षाकृत कम दिखाई दी। हालांकि महिलाओं और बुजुर्ग मतदाताओं की भागीदारी संतोषजनक रही, लेकिन कुल मतदान प्रतिशत उम्मीद से नीचे रहने के कारण सभी प्रत्याशियों की बेचैनी बढ़ गई है।
अब सभी की नजर मतगणना पर टिकी है। राजनीतिक दलों का मानना है कि कम मतदान का फायदा किस उम्मीदवार को मिलेगा, इसका स्पष्ट जवाब नतीजों के दिन ही मिलेगा। फिलहाल बांकीपुर का चुनावी माहौल चर्चा और अटकलों से गर्म है तथा सभी दल जीत के अपने-अपने दावे कर रहे हैं।





