निरसा में फ्लाईओवर निर्माण पर घमासान : एलिवेटेड रोड पर सांसद-विधायक का शक्ति प्रदर्शन,जमकर हुई नारेबाजी
निरसा:निरसा की सड़कों पर आज दो अलग-अलग राजनीतिक दलों का शक्ति प्रदर्शन देखने को मिला. एक ओर जहां सांसद ढुल्लू महतो की विशाल जनसभा तो दूसरी ओर विधायक अरूप चटर्जी के नेतृत्व में भाकपा (माले) की हजारों कार्यकर्ताओं ने पदयात्रा की. दोनों दलों ने भीड़ के जरिए अपना जनाधार और राजनीतिक ताकत दिखाने की पूरी कोशिश की. निरसा में बुधवार का दिन झंडों, बैनरों, नारों और समर्थकों के नारेबाजी से गूंजता रहा.मंच से तीखे आरोप लगे, सड़कों पर शक्ति का प्रदर्शन हुआ और समर्थकों ने अपने-अपने नेताओं के पक्ष में जमकर नारे लगाए.
एलिवेटेड फ्लाईओवर बनाराजनीतिक संघर्ष
जिस एलिवेटेड फ्लाईओवर को विकास की पहचान माना जा रहा था,वही अब राजनीतिक संघर्ष का सबसे बड़ा मुद्दा बन चुका है. मंच से दोनों नेताओं ने एक-दूसरे पर जमकर हमला बोला. विकास कार्यों में बाधा, कमीशनखोरी और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर आरोप-प्रत्यारोप की झड़ी लग गई. सांसद ढुल्लू महतो ने विधायक अरूप चटर्जी पर विकास रोकने और जनता को गुमराह करने का आरोप लगाया है. वहीं, समर्थकों ने भी जमकर नारेबाजी कर माहौल को पूरी तरह राजनीतिक बना दिया.
मंच सेविधायक अरूप चटर्जी का तीखा पलटवार
वहीं,विधायक अरूप चटर्जी ने भी मंच से तीखा पलटवार किया. उन्होंने कहा कि उनका विरोध फ्लाईओवर से नहीं, बल्कि निर्माण प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं से है. उन्होंने कहा कि परियोजना स्वीकृत डीपीआर, तकनीकी मानकों और इंजीनियरों की निगरानी में पूरी होनी चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया है कि निर्माण कार्य में कथित तौर पर कोयला माफियाओं का प्रभाव है और स्थानीय युवाओं को रोजगार से वंचित किया जा रहा है.
'निरसा में नहीं होने देंगे माफिया राज कायम'
अरूप चटर्जी ने सांसद ढुलू महतो पर सीधा निशाना साधते हुए कहा कि कोई बाघमारा से आकर निरसा में शक्ति प्रदर्शन करेगा और यहां अराजकता फैलाने की कोशिश करेगा, तो इसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा. उन्होंने कहा कि निरसा में माफिया राज कायम नहीं होने देंगे. यह शहीदों की धरती है, संघर्ष की धरती है और भाकपा (माले) का मजबूत गढ़ है. यहां डर और दबाव की राजनीति नहीं चलेगी.
सियासी टकराव के बढ़ते संकेत
एलिवेटेड फ्लाईओवर का मुद्दा अब केवल विकास परियोजना नहीं रह गया है, बल्कि निरसा की राजनीति का सबसे बड़ा रणक्षेत्र बन चुका है. आने वाले दिनों में यह सियासी टकराव और तेज होने के संकेत साफ दिखाई दे रहे हैं. अब नजर इस बात पर होगी कि यह लड़ाई विकास की दिशा तय करेगी या फिर राजनीति की गर्मी और बढ़ाएगी.





