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AEDO परीक्षा में गड़बड़झाला : माफियाओं ने बायोमेट्रिक संभालने वाली कंपनी के साथ बनाई थी योजना,कमीशन पर हुआ था सौदा

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पटना: बिहार लोक सेवा आयोग की सहायक शिक्षा विकास पदाधिकारी (AEDO) भर्ती परीक्षा में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की साजिश का खुलासा हुआ है. EOU की जांच में सामने आया है कि परीक्षा माफियाओं ने बायोमेट्रिक प्रक्रिया संभालने वाली कंपनी साई एडुकेयर के कुछ कर्मियों के साथ मिलकर पूरे खेल को अंजाम देने की योजना बनाई थी. माफियाओं ने अपने भरोसेमंद लोगों को बायोमेट्रिक ऑपरेटर और सुपरवाइजर के पद पर अनुबंध के आधार पर बहाल कराया था,जिन्हें रोजाना 800 रुपये पारिश्रमिक के साथ मोटे कमीशन का लालच दिया गया था.

पूछताछ में गिरफ्तार कर्मियों और अभ्यर्थियों ने खुलासा किया है कि पटना के हरनीचक में उन्हें ट्रेनिंग दी गई थी,जहां सेंटर बुकिंग से जुड़ी एक एजेंसी का भी कार्यालय है. मामले में नालंदा और पटना कनेक्शन सामने आया है. आर्थिक अपराध इकाई अब मुख्य साजिशकर्ताओं-अभिजीत,विकास यादव और योगेश की तलाश में जुटी हुई है और उनके सत्यापन की प्रक्रिया चल रही है.

इस घोटाले में अभ्यर्थियों से 30 लाख रुपये लेकर नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था. एडवांस के तौर पर 2.5 से 3 लाख रुपये और शैक्षणिक प्रमाणपत्र भी लिए गए. राज्यभर में 700 परीक्षा केंद्रों पर आयोजित इस परीक्षा में 935 पदों पर बहाली होनी थी, लेकिन गड़बड़ी के चलते इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठ गए हैं.

अब तक 7 जिलों में 12 केस दर्ज किए गए हैं और 39 आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है. कई मामलों को EOU ने टेकओवर कर लिया है. साई एडुकेयर पर पहले भी गुजरात हाईकोर्ट परीक्षा में धांधली के आरोप लग चुके हैं और उसे ब्लैकलिस्ट किया जा चुका है.

ऐसे में अब यह बड़ा सवाल है कि इस कंपनी को बीपीएससी ने किस आधार पर ठेका दिया. जांच जारी है और आने वाले दिनों में और बड़े खुलासे हो सकते हैं।