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बीजेपी के बिहार पुलिस पर भरोसा काहे नईखे? : बीजेपी के सहयोग से सरकार, फिर भी बिहार पुलिस पर वार

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5 फरवरी को लखीसराय में दो जगहों पर आरकेस्ट्रॉ का आयोजन हुआ

लखीसराय के दो अलग-अलग पंचायत में ये ठुमके तो 5 फरवरी को सरस्वती पूजा के मौके पर ही लगे थे। लेकिन इन ठुमकों पर बिहार की सियासत अब जाकर नाच रही है। दरअसल जब ये ठुमके लग रहे थे, तब बिहार में कोरोना को लेकर नाइट कर्फ्यू और इस तरह के आयोजन पर पाबंदी थी। लेकिन नियम कानून को ताक पर रखकर रात भर ये ठुमके चलते रहे...इसी दौरान पुलिस को सूचना मिली तो पुलिस ने मौके से दो लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जिसमें से एक बीजेपी का कार्यकर्ता है। बस इसी बात को लेकर विधानसभा अध्यक्ष और लखीसराय से विधायक विजय सिन्हा भड़क गए और फिर थाना प्रभारी को बुलाकर जमकर क्लास लगाई। विजय सिन्हा ने ना सिर्फ क्लास लगाई, बल्कि सीधे पुलिस पर राजनीति से प्रेरित होकर कार्रवाई करने का आरोप लगाया और उनसे जुड़े होने के कारण गिरफ्तार करने को लेकर फटकार लगाई। तो सवाल है कि क्या बिहार पुलिस बीजेपी कार्यकर्ताओं को टारगेट करती है। आखिर सरकार में सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद बीजेपी कार्यकर्ता क्यों बिहार पुलिस के निशाने पर है? ये सवाल खुद विजय सिन्हा उठा रहे हैं। हालांकि इसके बाद विजय सिन्हा यहीं नहीं थमे। उन्होने थाना प्रभारी पर शराब माफियाओं से मिलीभगत कर कार्रवाई करने का आरोप लगाया। शराब माफिया के साथ-साथ विजय सिन्हा ने बिहार पुलिस पर बालू माफियाओं से भी सांठगांठ करने का गंभीर आरोप लगाया।

वैसे पहली बार नहीं है जब बीजेपी से जुड़े किसी बड़े नेता ने सीधे बिहार पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हों। इससे पहले हाल ही में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने शराबबंदी को लेकर बिहार पुलिस पर सवाल उठाए थे।

इससे पहले बीजेपी विधायक संजय सरावगी, औरंगाबाद सांसद सुशील सिंह, मंत्री जनक राम समेत कई नेता और मंत्रियों ने भी बिहार पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सवाल है कि जिस बीजेपी के सहयोग से सरकार चल रही है। आखिर उसी सरकार की पुलिस पर बीजेपी को भरोसा क्यों नहीं है। बीजेपी को क्यों लगता है कि पुलिस बीजेपी कार्यकर्ता को टारगेट करती है। क्या जेडीयू-बीजेपी के बीच चल रहे घमासान के कारण बिहार पुलिस गंभीर आरोपों के घेरे में है या फिर बिहार पुलिस पर लग रहे आरोपों में दम है। अगर आरोप सच हैं तो फिर पुलिस व्यवस्था में क्यों नहीं सुधार किए जा रहे हैं।