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ट्रांसफर की खत्म टेंशन, तो होगा पढ़ाई पर अटेंशन? : सीएम का शिक्षकों को संदेश और उन पर संदेह क्या इशारा करता है ?

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What do the CM's message to teachers and his suspicion of them signify? What do the CM's message to teachers and his suspicion of them signify?

मास्टर साहब समय से स्कूल पहुंचे, पारिवार से दूर रहने की परेशानियों को परे रख पठन पाठन पर पूरो फोकस करें। अनजाने माहौल और अनजान जगह की अनजानी आफतों से खुद को अलग रखते हुए, अपने घरेलू माहौल में गृह जिला या प्रखंड पंचायतो के स्कूलो में पढ़ाने के लिए भेजे जाएं तो उनकी उपयोगिता और उत्पादक्ता उच्च क्षमता पर दिखेगी। इसी संभावना को देखते हुए सीएम सम्राट चौधरी ने साफ कर दिया है कि शिक्षकों को उनकी सुविधा अनुसार उनके गृह क्षेत्र में, उनके घर के जितने नजदीक संभव हो वहां ट्रांसफर कर पोस्टिंग देने को लेकर नियमावली को सरकार अगली कैबिनेट बैठक में स्वीकृति देने की तैयारी में लगी है। साथ ही सीएम की कही एक और बात मास्टर साहब के मन को छलनी करने वाली लगी!

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सम्राट चौधरी का विशेष रूप से ये कहना कि ट्रांसफर पोस्टिंग की उनकी मांग सरकार मान रही तो सरकार भी चाहती है कि मास्टर साहब सिर्फ बच्चों को पढ़ाने लिखाने में मन लगाएं। न राजनीति करें, न कामचोरी, और न ही स्कूल से हाजरी बनाकर लापता रहें, या स्कूल में सोते मिले। सीएम के कहे शब्दों का ये भाव शिक्षको पर भारी पड़ने वाला लगता है और मास्टर साहब की छवि को हल्का करने वाला। वो छवि जो पहले से बच्चों और अभिभावकों के बीच हल्की हुई है। बायोमेट्रिक एटेंडेंस को बायपास करने के शातिर तरीकों को लेकर। साथ ही सायकल, पोशाक या मध्याहन भोजन में गड़बड़ी के आरोपों और विभागीय अधिकारियों की जांच में पकड़े जाने के कारण। शिष्टाचार सिखाने वाले शिक्षक स्कूलो में होने वाली गड़बडियों के कारण भष्टाचार के उदाहरण बनने लगे। ऐसे में सीएम उनकी समस्या को मुंहमागी पोस्टिंग देकर दूर करना चाहते हैं और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की गुणवत्ता बेहतर कर समस्या को दूर करना चाहते हैं।

घर के पास पोस्टिंग से घटेगी परेशानी या बढ़ेगी लापरवाही ?

वैसे गृह क्षेत्र की सुविधा अपने साथ पहले की समस्याओं के समाधान के अलावे भविष्य की सम्भावित समस्याओं को भी साथ लाता है। जैसे मास्टर साहब की मंशा पर सवाल, कार्य-अवधि में विद्यालय में मौजूदगी पर संदेह। उनकी कार्यशैली, उनकी कर्त्व्यनिष्ठा पर नजर कैसे रखी जाए ? वो हाजरी लगा कर पठन पाठन के काम से कक्षा में मौजूद हैं या घर परिवार के काम में लग जाते हैं ये कौन और कैसे देखेगा जांचेगा? फिर किसी जिला में आने और जाने वाले शिक्षकों की संख्या और उस जिले के विद्यालयों में विषयवार रिक्त पदों की संख्या को समायोजित करना भी अपने आप में एक चुनौती होगी। सरकार कैबिनेट की बैठक में नीतिगत निर्णय लेकर शिक्षकों को अपनी सकारात्म मंशा का संदेश तो दे सकती है, लकिन ऐसी व्यवहारिक चुनौतियों से पार पाना आसान नहीं होगा। ट्रांसफर पोस्टिंग के लिए बहुतायत से आने वाली अर्जी का निपटारा चुनौती होगी, क्योंकि पहले भी एक बार सरकार ने प्रयास किया था, पर उसमें पुरी तरह से कामयाबी नहीं मिली। ऐस में सवाल तो पूछेंगे ट्रांसफर की खत्म टेंशन, तो होगा पढ़ाई पर अटेंशन?

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दीपक कुमार शर्मा, सीनियर एंकर